सरकार इस साल पूरा कर सकती है राजकोषीय घाटे का लक्ष्य, एसबीआई ने अपनी शोध रिपोर्ट में जताया अनुमान

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 30 Jan 2019 10:05 PM IST
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सार

3.3 फीसदी रखा है चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय लक्ष्य सरकार ने
3.2 फीसदी अगले साल के लिए रखने का अनुमान जताया गया रिपोर्ट में 

विस्तार

चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजटीय लक्ष्य से बढ़ने की आशंका के बीच बुधवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में राहत का अनुमान जताया गया है। एसबीआई रिसर्च के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार इस साल अपने राजकोषीय लक्ष्य को पूरा कर सकती है। साथ ही अगले साल के लिए इस लक्ष्य को और घटाकर भी पेश किया जा सकता है।
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रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए तय राजकोषीय लक्ष्य 3.3 फीसदी को सरकार पूरा कर सकती है। यह जीडीपी के मुकाबले करीब 6.05 लाख करोड़ रुपये है। इस दौरान सरकारी प्रतिभूतियों से 30-35 हजार करोड़ रुपये जुटाने की संभावना जताई गई है।


शोधार्थियों का कहना है कि 2019 में सरकार ने छोटी बचत योजनाओं में अपना योगदान कम कर खर्च घटाने पर ध्यान दिया है। इसके जरिए कर्ज बजटीय लक्ष्य 75 हजार करोड़ (संशोधित 1 लाख करोड़) रुपये से घटकर नवंबर, 2018 में 45,396 करोड़ रुपये रहा है।  

आगे और घटेगा लक्ष्य

शोधार्थियों का कहना है कि आगामी वित्त वर्ष 2020 में सरकार शेयर बायबैक प्रक्रिया कम से कम करेगी जिससे अधिक मात्रा में नकदी को रखा जा सकेगा। इसके अलावा बेहद कम उम्मीद के बावजूद जीडीपी वृद्घि अगर 11.7 फीसदी होती है तो अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय लक्ष्य को जीडीपी के मुकाबले 3.2 फीसदी यानी 6.72 लाख करोड़ रुपये रखा जा सकता है। इस दौरान बाजार से कुल उधार 6.50 लाख करोड़ रुपये जबकि वास्तविक उधार 4.13 लाख करोड़ रुपये होगा जो 2019 के 4.20 लाख करोड़ रुपए से कम रहेगा।

ब्याज दरों में होगा अंतर

रिपोर्ट में कहा गया कि राष्ट्रीय लघु बचत योजनाओं के जरिेए बड़ा निवेश किए जाने के कारण बैंक जमा और लघु बचत की ब्याज दरों के बीच अंतर हो सकता है। पीपीएफ, सुकन्या समृद्घि खाते और बैंकों की ओर से पेश किए जाने वाले मियाद जमाओं के बीच ब्याज दरों में 98 आधार अंकों का अंतर आने की संभावना है। ऐसे में बैंकों के लिए जमा दरों को और घटाना मुश्किल हो जाएगा। 

सख्त हो सकती है ब्याज दर

रिपोर्ट में कहा गया कि 4 जनवरी, 2019 को सालाना आधार पर कुल जमा में 9.9 फीसदी का उछाल आया जो करीब 10.85 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि एडवांस बढ़त 14.5 फीसदी यानी 11.85 लाख करोड़ रुपये रही। इस अंतर को पूरा करने के लिए नकदी की जरूरत होगी जो बैंकिंग चैनल से ही आएगी। इसके लिए प्रतिभूतियों का बायबैक रोकना होगा और आरबीआई को ओएमओ से भी हाथ खींचना पड़ेगा। ऐसे में अगले साल के लिए ब्याज दरें सख्त हो सकती हैं।

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