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मेघालय को भारत से अलग कराने के प्रयासों में जुटा था ये संगठन, अब गृह मंत्रालय ने लगाया बैन
Mon, 18 Nov 2019 07:23 PM IST
आसिम खान
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: आसिम खान
Updated Mon, 18 Nov 2019 07:23 PM IST
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गृह मंत्रालय
- फोटो : ANI
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गृह मंत्रालय ने मेघालय के एक ऐसे संगठन पर बैन लगा दिया है जो उक्त राज्य को भारत से अलग करने के प्रयासों में जुटा था। हन्नीवट्रेप नेशनल लिब्रेशन काउंसिल (एचएनएलसी) संगठन राष्ट्र विरोधी, गैर कानूनी और हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल हैं। इस संगठन से जुड़े सभी अग्रणी गुट लंबे समय से खुलेआम यह घोषणा करते आए हैं कि उनका मकसद मेघालय राज्य (खासी और जैंतिया जनजातीय बाहुल्य आबादी वाले) क्षेत्र को भारत संघ से अलग कराना है।
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गृह मंत्रालय द्वारा अभी तक अलग अलग जगहों पर ऐसे 43 संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। ये सभी संगठन राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, एचएनएलसी ने खासी और जैंतिया के जनजातीय बाहुल्य वाले मेघालय राज्य के क्षेत्रों को भारत से अलग करने का खुलेआम समर्थन किया है। इस संगठन के सदस्य लोगों से जबरन धन वसूली करते हैं। वे आम नागरिकों को डराकर रखते हैं। लोगों में दिलों में आतंक बना रहे, इसके लिए संगठन के सदस्य पूर्वोत्तर क्षेत्र के अन्य विद्रोही समूहों के साथ संपर्क बनाए रखते हैं।
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इतना ही नहीं, संगठन के लोगों ने अपने लिए शरण स्थल और ट्रेनिंग के मकसद से बांग्लादेश स्थित विभिन्न शिविरों के साथ संपर्क बना रखा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले चार साल में 4 हिंसक घटनाओं में एचएनएलसी शामिल रहा है। इन घटनाओं में एक व्यक्ति मारा गया था। उक्त अवधि के दौरान एचएनएलसी के 16 काडरों को गिरफ्तार किया गया। चार हथियार बरामद हुए।साथ ही 14 काडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया।
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इसी अवधि में इस संगठन ने 4 व्यक्तियों का अपहरण भी कर लिया। इन सब घटनाओं के मद्देनजर केंद्र सरकार का मत है कि यह संगठन भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए अहितकर है। यदि इस पर बैन नहीं लगाया गया तो यह हथियारों से लैस होकर अपनी गैर कानूनी गतिविधियां बढ़ाएगा। यही वजह है कि हन्नीवट्रेप नेशनल लिब्रेशन काउंसिल और इससे जुड़े दूसरे संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
'सिख फॉर जस्टिस' को भी घोषित किया गया था गैर कानूनी
कुछ माह पहले न्यूयार्क से संचालित संगठन सिख फॉर जस्टिस को भी गैर कानूनी घोषित किया गया था। इस पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक यह संगठन खालिस्तान के नाम पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। इसके चलते खासतौर पर पंजाब की हालत बिगड़ रही थी। सरकार ने यह फैसला देश के कई सिख संगठनों से विचार विमर्श के बाद लिया है।
अलगाववाद एजेंडे के चलते केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया है। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से खालिस्तान ग्रुप सिख फॉर जस्टिस की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रख रही थी। आरोप था कि यह संगठन खालिस्तान जनमत संग्रह में शामिल होने के लिए आने वाले लोगों को मुफ्त हवाई टिकट दे रहा था। यह भी जानकारी मिली थी कि यह संगठन करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बहाने पाकिस्तानी एजेंसियों से संपर्क साधने में जुटा था।
खालिस्तान लिबरेशन फोर्स गृह मंत्रालय की सूची में शामिल
गृह मंत्रालय ने इसी साल खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) को 40 वें प्रतिबंधित संगठन के तौर पर अपनी सूची में शामिल किया था। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि केएलएफ 1986 के दौरान पंजाब में खालिस्तान की मांग लेकर अस्तित्व में आया था। इस संगठन का मकसद था कि किसी भी तरह की हिंसा से पंजाब को भारत से अलग करा लिया जाए।
बाद में केएलएफ का नाम अनेक बेगुनाह लोगों और पुलिस अफसरों की हत्या में सामने आया। इसके अलावा फिरौती, किडनेपिंग और बैंक डकैती के लिए इस संगठन ने अपने नेटवर्क को आगे बढ़ाने का काम किया। केएलएफ ने पंजाब के युवाओं को गुमराह कर उन्हें आतंक के रास्ते पर लाने का काम किया था। पुलिस ने अमृतसर में केएलएफ के चार आतंकियों को गिरफ्तार कर एक बड़े मॉडयूल को तोड़ा था। पिछले साल सुरक्षा एजेंसियों ने इस सगंठन के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
केएलएफ ने आठ लोगों की हत्या कर एक बार फिर खड़ा होने का प्रयास किया। आईईडी और दूसरी तरह के बम बनाने में भी इस संगठन का हाथ रहा है। केंद्र सरकार मानती है कि यह संगठन पूरी तरह से आतंकी गतिविधियों में शामिल है। यह देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी पहुंच बढ़ा रहा है।
सूची में शामिल अन्य आतंकी संगठनों में बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान कमांडो फोर्स, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, लश्कर ए तैयबा, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन, जैश ए मोहम्मद-तारिक ई फुरगन, अल उमर मुजाहिद्दीन, जम्मू कश्मीर इस्लामिक फ्रंट, 38 वें नंबर पर आईएसआईएस, 39 वें स्थान पर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (के) और 40 वें नम्बर पर अब केएलएफ का नाम जोड़ा गया है।
41 वें स्थान पर तहरीक उल मुजाहिदीन, 42 वें नंबर पर जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश, जमात उल मुजाहिदीन इंडिया और जमात उल मुजाहिदीन हिंदुस्तान का नाम प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल है। अब हन्नीवट्रेप नेशनल लिब्रेशन काउंसिल पर 43 वें गैर कानूनी संगठन के तौर पर प्रतिबंध लगाया गया है।