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आयुष्मान भारत के 187 करोड़ रुपये का ममता सरकार से मांगा हिसाब

Wed, 20 Mar 2019 03:04 AM IST
Avdhesh Kumar परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Wed, 20 Mar 2019 03:04 AM IST
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government asks to mamta banarji for Rs 187 crore calculation of ayushman bharat
mamta - फोटो : PTI
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) पर पश्चिम बंगाल के रवैये से केंद्र आजिज आ चुका है। पिछले कुछ समय से न तो मरीजों के क्लेम की दावेदारी की जा रही है और न ही अब तक आधिकारिक रूप से इनकार किया गया है। पश्चिम बंगाल को मिले 187 करोड़ रुपये का हिसाब मांगा गया है। बताया जा रहा है कि बार-बार पत्र लिखने के बाद भी ममता सरकार रुख साफ नहीं कर रही।
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दरअसल इस साल जनवरी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने योजना से बाहर होने का एलान किया था। मरीजों को मिलने वाले ई-कार्ड से लेकर बैनर इत्यादि तक पर पीएम मोदी के फोटो को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई थी। जबकि गैर हिंदी भाषी राज्यों में पश्चिम बंगाल ने सबसे पहले इस योजना का करार किया था। राज्य के 1240 अस्पतालों में मरीजों को उपचार भी मिलने लगा था।
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तीन दिन बाद 23 मार्च को इस योजना के छह माह पूरे हो रहे हैं। योजना के सीईओ डॉ. इंदुभूषण ने बताया कि करार के बाद पश्चिम बंगाल को 187 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया था। उन्होंने कहा कि शुरू में पश्चिम बंगाल बेहतर कार्य कर रहा था, लेकिन फिलहाल वह खुद नहीं जानते कि बंगाल उनके साथ है अथवा नहीं। उन्हें अब तक आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इस योजना में देश के करीब 55 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये सालाना का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। 
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दिल्ली में जमीन का करार बना सबसे बड़ा रोड़ा

बार-बार प्रयास के बाद भी दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू न होने को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में ज्यादातर प्राइवेट अस्पताल सरकारी जमीन पर हैं। इसके कारण ये दिल्ली सरकार से बगावत कर आयुष्मान भारत से जुड़ना नहीं चाहते। यही वजह है कि दिल्ली में अब तक 15 अस्पताल ही इस योजना से जुड़े हैं।

मोदी केयर : योजना के छह माह हो रहे पूरे

. दिल्ली, ओडिशा और तेलंगाना में अब तक योजना नहीं है लागू।
. राजस्थान, पंजाब और केरल में चुनाव बाद शुरू होगी योजना।
. 16.5 लाख मरीजों को 2100 करोड़ रुपये का निशुल्क उपचार मिल चुका है।
. हर सेकंड बन रहे 10 ई-कार्ड, अब तक 2.5 करोड़ बने।
. 15 हजार सरकारी और निजी अस्पताल पैनल में आ चुके हैं।
. लाभार्थियों से रुपये हड़पने वाले झारखंड के 2 अस्पताल सस्पेंड।
. ज्यादा सर्जरी, बार-बार मरीज के भर्ती होने पर भी निगरानी।
. धोखाधड़ी करने वालों पर तीन गुना जुर्माने का प्रावधान।
. 1234 मरीजों की शिकायतों पर चल रही जांच।
. डिस्चॉर्ज होने के बाद मरीज से फोन पर लिया जा रहा है फीडबैक
 
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