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गांधी सेवाग्राम में राजेश बादल की गपशप, नौजवानों से धड़कता हुआ दिन

Sat, 25 Aug 2018 11:32 AM IST
राजेश बादल
राजेश बादल Updated Sat, 25 Aug 2018 11:32 AM IST
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Gossip in Gandhi Seva Gram, Youngsters in Pleasant Seminar By Rajesh Badal

सेवाग्राम की सुबह सुहानी थी। रिमझिम फुहारों ने हवा में ठंडक घोल दी थी। दिल्ली की उमस भरी गर्मी बर्दाश्त करते गया था सो यह शीतलता अच्छी लगी। कहीं भी जाओ तो पहले दिन नींद अस्त व्यस्त हो ही जाती है। उस वजह से थोड़ा भारीपन था लेकिन जैसे ही मैं मित्र रज्जू राय के साथ कमरे से बाहर आया, हरियाली और हवा ने भारीपन कपूर की तरह उड़ा दिया। हम दोनों सेवाग्राम की सड़कों पर देर तक टहलते रहे। एक गुमटी खुल ही रही थी। वहां चाय पी, लेकिन मजा नहीं आया। पहली चाय का स्वाद बिगड़ जाए तो अंदर से अजीब सा लगता है। फिर हम लोग सेवाग्राम में चले गए। विकास संवाद के सौजन्य से चाय पी। साथ में सचिन जी, भाई राकेश पाठक, प्रकाश पुरोहित जी, चंद्रकांत नायडू जी से गपशप बोनस में हो गई।

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इसी बीच घंटी बजी और सुबह की प्रार्थनासभा में हिस्सा लेने चले गए। नाश्ते के बाद पहले सत्र की शुरुआत महात्मा गांधी की यात्राओं पर बनाई मेरी फिल्म 'सलाम राष्ट्रपिता' के प्रदर्शन से हुई। आधा घंटे की इस फिल्म का निर्माण मैंने इक्कीस बरस पहले 1997 में किया था। उस सालआजादी के पचास साल पूरे हुए थे। भारत में आवाज की दुनिया के पहले गरजदार सुपरस्टार देवकी नंदन पांडे फिल्म के एंकर थे। वॉयस ओवर भी उनका था। पांडे जी ने महात्मा गांधी के अंतिम संस्कार का ऑल इंडिया रेडियो पर हिंदी में आंखों देखा हाल सुनाया था। उनके अलावा गांधीजी के सहयोगियों के साक्षात्कार भी इस फिल्म में थे। अब इनमें कोई जीवित नहीं है। मित्रों को फिल्म पसंद आई - यह जानकर संतोष हुआ।
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फिल्म के बाद सत्र शुरू हुआ। यह पूरे आयोजन का सबसे अच्छा सत्र था। जाने माने गांधीवादी अर्थशास्त्री कश्मीर उप्पल ने भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ और अंतरराष्ट्रीय हालात पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। मुझे पता चला कि विश्व व्यापार संगठन में गोरों ने हिंदुस्तान को देश छोड़ने से पहले ही शामिल कर दिया था और उसकी शर्तें अपने हित में मानी थीं न कि भारत के हित में। उप्पल जी को लगता है कि आज जेल में न होते हुए भी पत्रकार कैद में हैं।

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Gossip in Gandhi Seva Gram, Youngsters in Pleasant Seminar By Rajesh Badal

चिंतक चिन्मय मिश्र ने बच्चों के साथ जाने अनजाने में समाज की ओर से किए जा रहे अत्याचारों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। भविष्य के डॉक्टर भी इन बच्चों में हैं। उन्होंने सनसनीखेज तथ्य बताया कि मध्य प्रदेश के पांचों निजी मेडिकल कालेजों के कर्ता धर्ता जेल में हैं। चिंतक पत्रकार रजनी बख्शी ने अपने ढंग से गांधीवाद की व्याख्या की। भाई गिरीश उपाध्याय ने कहा कि वास्तव में आज विमर्श का विषय गांधी विचार या व्यवहार होना चाहिए। साथी डॉक्टर राकेश पाठक ने सोशल मीडिया पर झूठ की बखिया उधेड़ दी। चंद्रकांत नायडू जी ने कहा कि हमारे सबके अंदर एक गांधी है। सेवाग्राम आते हैं तो वो जिंदा हो जाता है और माथापच्ची करके यहां से लौटते हैं तो वह गांधी सो जाता है। कुछ कुछ श्मशान वैराग्य जैसा भाव। मैंने भी अपनी बात रखी। जतिन देसाई, राकेश दीक्षित, अजीत जी और सोपान जोशी ने भी गांधी की पत्रकारिता के प्रसंग याद किए। 

इसके बाद का सत्र धड़क रहा था। नौजवान साथियों के मंच पर आते ही सेमिनार धड़कने लगा। लगा, अब तक इसी की कमी थी। पीयुष बबेले, भूपेंद्र सिंह, स्वतंत्र, पाठक जी मिश्र, दयाशंकर मिश्र, पशुपति शर्मा और इनके जवान साथियों ने मंच लूट लिया। सत्र के बाद तृप्ति हुई। डकार आ गई। अब सिर्फ पी साईंनाथ को सुनने की इच्छा थी जो कल है। इसलिए एक बार फिर भोजनशाला में डिनर और यात्रिनिवास में खुले आसमान के नीचे गीत, गजल और अन्य विधाओं की महफिल। यकीनन आज नींद अच्छी आने वाली थी।

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