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बातचीत से ही होगा गोरखालैंड का समाधानः गोरखा जनमुक्ति मोर्चा

Thu, 11 Jan 2018 07:31 PM IST
संजय मिश्र/नई दिल्ली
संजय मिश्र/नई दिल्ली Updated Thu, 11 Jan 2018 07:31 PM IST
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Gorkhaland solution to be only talk: vimal gurung

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने अपने रुख में बदलाव लाते हुए वार्ता की राह पर आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। अब तक आंदोलन के जरिए अलग गोरखालैंड राज्य की मांग पर अड़े गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष विमल गुरुंग ने कहा है कि गोरखा मामले का समाधान बातचीत से ही संभव है। सभी राजनीतिक आंदोलनों की तरह हमें इस आंदोलन को भी पूरी निष्ठा के साथ समय देना होगा। 

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उन्होंने कहा कि वे किसी से भी बातचीत को तैयार हैं, चाहे राज्य की सरकार ही क्यों न हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की ममता सरकार को खुले दिमाग से बातचीत करनी होगी। प्रदेश सरकार की नीयत गोरखा मामले पर संदेह के घेरे में रहती है। 
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प्रदेश सरकार ने तमाम बोर्ड और अन्य कवायदों के जरिए गोरखाओं को भी बांटने की कोशिश की है, मगर देशभर के गोरखा अपनी पहचान के लिए एकजुट हैं। पिछले जून के महीने में दार्जिलिंग में जो कुछ भी हुआ वह पश्चिम बंगाल सरकार की दिशाहीनता का नतीजा है। 

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पहचान के लिए है आंदोलन

Gorkhaland solution to be only talk: vimal gurung
विमल गुरुंग ने कहा कि हमारा आंदोलन गोरखा की पहचान के लिए है। हम जो भी मांग रहे हैं, वो भारतीय संविधान के तहत मांग रहे हैं। हम भारत के अंग थे और रहेंगे। उन्होंने कहा कि देश का शांतिप्रिय नागरिक होने के नाते उनका संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अटूट सम्मान है। वे सच्चाई और न्याय आदर्श को लेकर गांधी जी से सहमत रहे हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। 

शांतिपूर्वक चलेगा अभियान
विमल गुरुंग ने बातचीत से समाधान की बात करते हुए गोरखालैंड आंदोलन को शांति से चलाने की प्रतिबद्धता दिखाई। उन्होंने कहा कि मैं बहादुर गोरखाओं की पहचान और जीवन के लिए शांति के साथ अभियान जारी रखूंगा। 

मैंने हमेशा कानून पर भरोसा किया है। किसी भी स्वतंत्र जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने को तैयार हूं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज फर्जी प्रकरणों की जांच उन्होंने देश की स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। न्यायपालिका पर उन्होंने अपना अटूट भरोसा जताया है। 
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