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कोरोना संकट के बीच अच्छी खबर, फेलू दा से महज 500 रुपये में टेस्ट, 5 मिनट में नतीजा

Tue, 21 Apr 2020 03:03 AM IST
संजीव कुमार झा शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 21 Apr 2020 03:03 AM IST
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Good news amid Corona crisis, feluda testing kit for just 500 rupees from Felu da, result in 5 minutes
कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कोविड-19 की देसी टेस्ट किट तैयार हो गई है। इससे टेस्ट न सिर्फ सटीक और आसान होगा, बल्कि बहुत सस्ता भी होगा। जांच में महज 450 से 500 रुपये तक लगेंगे। सीएसआईआर  की किट से नतीजे 5 से 7 मिनट में आ जाएंगे।

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पचास से अधिक मरीजों पर इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है। बाजार में उतारने से पहले आईसीएमआर की मंजूरी का इंतजार है। आशा है कि मंजूरी मिलने पर जल्द ही व्यावसायिक उत्पादन व उपयोग होने लगेगा। यह किट सीएसआईआर की प्रयोगशाला में दो वैज्ञानिकों ने तैयार की है।
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आईजीआईबी के डॉ देबज्योति चक्रवर्ती और डॉ सौविक मैती पिछले दो महीनों से कोविड-19 जांच पर 20-20 घंटे काम कर रहे थे।  उन्होंने बताया कि इसका नाम सत्यजीत रे के प्रसिद्ध जासूस फेलू दा के नाम पर रखा है। सीएसआईआर के निदेशक शेखर माडे कहते हैं कि यह टेस्ट पूरी तरह स्वदेशी है। तकनीक से लेकर रसायन तक हमने खुद विकसित किए हैं।

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पॉजिटिव मिलते ही रंग बदलेगा

डॉ चक्रवर्ती कहते हैं कि इस टेस्ट में प्रेगनेंसी की जांच करने वाली कागज की स्ट्रिप जैसी पट्टी का ही इस्तेमाल होगा। पॉजिटिव होने पर यह पट्टी भी रंग बदल देगी। इसकी कीमत और कम कैसे हो पाए, इस पर वे काम कर रहे हैं। पॉलीमरेस तकनीक के जरिए हो रहे मौजूदा टेस्ट की रिपोर्ट आने में 36 से 48 घंटे लगते हैं और निजी लैब में इसकी कीमत भी 4500 रुपये है। क्रिस्पर तकनीक पर आधारित नया टेस्ट भी पॉलीमरेस टेस्ट जितना ही सटीक होगा।

दो साल से जारी था शोध

डॉ. चक्रवर्ती ने अमर उजाला को बताया कि पिछले 2 साल से उनकी टीम डीएनए और आरएनए के म्यूटेशन पर काम कर रही थी। इस वर्ष की शुरुआत में जब कोविड-19 ने एक के बाद एक पूरी दुनिया के देशों में फैलना शुरू किया तो उन्होंने अपना फोकस इसकी टेस्ट किट विकसित करने पर कर लिया। जिस तकनीक से यह टेस्ट होगा उसी तकनीक पर अमेरिका के दो संस्थानों - एमआईटी और कैलिफोर्निया स्थित बर्कले इंस्टीट्यूट ने भी टेस्ट किट तैयार कर रहे हैं।

हर पट्टी पर होंगी दो रेखाएं

वैज्ञानिकों के मुताबिक हर स्ट्रिप पर एक कंट्रोल लाइन होगी और दूसरी टेस्ट लाइन। ओरल स्वैब के पट्टी के संपर्क में आते ही यदि कंट्रोल लाइन रंग बदल लेती है तो इसका अर्थ होगा पट्टी ठीक से काम कर रही है। और टेस्ट लाइन के रंग बदलने का अर्थ होगा कि मरीज कोरोना पॉजिटिव है।

सभी टेस्ट जासूसों के नाम पर

चूंकि इस टेस्ट को तैयार करने वाले दोनों वैज्ञानिक बंगाली है। उन्होंने बंगाल के जाने-माने साहित्यकार और फिल्मकार सत्यजीत रे की कृतियों के प्रसिद्ध जासूस फेलूदा के नाम पर रखा है। चक्रवर्ती कहते हैं क्योंकि उनका टेस्ट फेलू दा की तरह ही चुपचाप और बहुत तेजी से काम करता है इसलिए इसका यह नाम रखा। मजे की बात यह है कि एमआईटी के टेस्ट का नाम अगाथा क्रिस्टी के प्रसिद्ध जासूस शरलॉक होम्स के नाम पर शरलॉक रखा गया है तो बर्कले ने अपने टेस्ट किट का नाम डिटेक्टर रखा है।

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