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Godhra Case: गोधरा कांड में मौत की सजा पाए दोषियों की जमानत याचिकाएं शीर्ष कोर्ट ने की खारिज, की अहम टिप्पणी

Mon, 17 Apr 2023 10:34 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 17 Apr 2023 10:34 PM IST
सार

निचली अदालत ने 11 दोषियों को मौत की सजा जबकि 20 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में मौत की सजा को कम करते हुए 31 की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। इनमें से कुछ ने अपनी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपनी अपीलों के निस्तारण तक जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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Godhra train burning: SC dismisses bail pleas of those who were awarded death penalty by trial court
गोधरा कांड (फाइल फोटो) - फोटो : Social media

विस्तार

2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सजा पाए दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इन  दोषियों में वह आरोपी शामिल थे, जिन्हें निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदल दिया था।

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निचली अदालत ने 11 दोषियों को मौत की सजा जबकि 20 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में मौत की सजा को कम करते हुए 31 की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। इनमें से कुछ ने अपनी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपनी अपीलों के निस्तारण तक जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आगजनी के चलते 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य में सांप्रदायिक हिंसा भड़क हुई थी।
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21 अप्रैल को होगी सुनवाई
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील के अलावा दोषियों की जमानत याचिकाओं से कुशलतापूर्वक निपटने के लिए भेद करने की आवश्यकता थी। अभी वह उन लोगों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर रहा है जिन्हें निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। पीठ अब दोषियों की जमानत की अन्य याचिकाओं पर 21 अप्रैल को सुनवाई करेगी।
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गुजरात सरकार ने दिया ये तर्क
गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई की शुरुआत में कहा कि हम उन दोषियों को मौत की सजा देने के लिए गंभीरता से दबाव डालेंगे, जिनकी मौत की सजा को हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया। यह दुर्लभ से दुर्लभ मामला है जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 59 लोग जिंदा जल गए। हर जगह यही कहा गया कि बोगी (कोच) पर बाहर से ताला लगा हुआ था। यह केवल पथराव का सामान्य मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को कहा था कि वह मामले की सुनवाई की अगली तारीख पर दोषियों की जमानत याचिकाओं का निस्तारण करेगी। 20 फरवरी को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह उन 11 दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग करेगी जिनकी सजा को गुजरात हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया था।


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गुजरात सरकार ने किया विरोध
गुजरात सरकार ने गोधरा ट्रेन कोच जलाने के कुछ दोषियों की जमानत याचिका का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया। इन दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली हुई है। प्रदेश सरकार ने कहा कि 2002 गोधरा ट्रेन कोच जलाने का मामला गंभीर अपराधों में शामिल है और दोषियों ने पथराव किया तथा ट्रेन के दरवाजे बंद कर दिए थे। 


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