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गोवा विधायक अयोग्यता मामला: स्पीकर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी कांग्रेस, कहा- यह आदेश महज औपचारिकता
Sat, 02 Nov 2024 07:56 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
Published by: राहुल कुमार
Updated Sat, 02 Nov 2024 07:56 PM IST
सार
Goa MLA disqualification: स्पीकर रमेश तवाडकर ने शुक्रवार को दलबदल के आधार पर विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली चोडणकर की याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का यह आदेश महज औपचारिकता है।
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गिरीश चोडणकर
- फोटो : ANI
विस्तार
कांग्रेस के गिरीश चोडणकर ने शनिवार को कहा कि वह 2022 में भाजपा में शामिल होने वाले उनकी पार्टी के 8 विधायकों के खिलाफ उनकी अयोग्यता याचिका को अस्वीकार करने के गोवा अध्यक्ष के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
चोडणकर ने दो साल पहले कांग्रेस छोड़कर सत्तारूढ़ दल में शामिल होने के बाद विधायकों दिगंबर कामत, एलेक्सो सिकेरा, संकल्प अमोनकर, माइकल लोबो, डेलिलाह लोबो, केदार नाइक, रुडोल्फ फर्नांडीस और राजेश फलदेसाई को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
स्पीकर रमेश तवाडकर ने शुक्रवार को दलबदल के आधार पर विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली चोडणकर की याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का यह आदेश महज औपचारिकता है। मुझे स्पीकर के पास जाने और उनसे आदेश (याचिका को खारिज करने) लेने की औपचारिकता पूरी करनी थी क्योंकि ऊपरी अदालतों में जाने से पहले यह जरूरी है।
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कांग्रेस नेता चोडणकर ने कहा कि वे या तो पणजी में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा, मेरे पास दोनों विकल्प हैं और मैं उस पर कानूनी राय ले रहा हूं। लगभग दो साल तक विधायकों की अयोग्यता याचिका पर स्पीकर की ओर से फैसला नहीं सुनाए जाने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से याचिका पर जल्द से जल्द फैसला लेने को कहा था। शीर्ष अदालत ने अगली तारीख 4 नवंबर तय की है। स्पीकर ने संविधान की 10वीं अनुसूची की गलत व्याख्या की है। उन्होंने कांग्रेस के आठ विधायकों के भाजपा में अवैध रूप से शामिल होने को वैध ठहराया है।
कांग्रेस नेता ने रखी थी ये मांग
चोडानकर ने याचिका में मांग की थी कि विधानसभा अध्यक्ष संविधान के अनुच्छेद 191 के साथ दसवीं अनुसूची के पैरा-दो के तहत आठ विधायकों को इस आधार पर अयोग्य घोषित करें कि उन्होंने मूल पार्टी (कांग्रेस) की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दी थी। इन विधायकों ने कांग्रेस के टिकट पर गोवा विधानसभा के लिये चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इस मामले में मूल राजनीतिक दल का कोई वैध विलय नहीं है।
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चोडणकर ने दो साल पहले कांग्रेस छोड़कर सत्तारूढ़ दल में शामिल होने के बाद विधायकों दिगंबर कामत, एलेक्सो सिकेरा, संकल्प अमोनकर, माइकल लोबो, डेलिलाह लोबो, केदार नाइक, रुडोल्फ फर्नांडीस और राजेश फलदेसाई को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
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स्पीकर रमेश तवाडकर ने शुक्रवार को दलबदल के आधार पर विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली चोडणकर की याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का यह आदेश महज औपचारिकता है। मुझे स्पीकर के पास जाने और उनसे आदेश (याचिका को खारिज करने) लेने की औपचारिकता पूरी करनी थी क्योंकि ऊपरी अदालतों में जाने से पहले यह जरूरी है।
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कांग्रेस नेता चोडणकर ने कहा कि वे या तो पणजी में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा, मेरे पास दोनों विकल्प हैं और मैं उस पर कानूनी राय ले रहा हूं। लगभग दो साल तक विधायकों की अयोग्यता याचिका पर स्पीकर की ओर से फैसला नहीं सुनाए जाने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से याचिका पर जल्द से जल्द फैसला लेने को कहा था। शीर्ष अदालत ने अगली तारीख 4 नवंबर तय की है। स्पीकर ने संविधान की 10वीं अनुसूची की गलत व्याख्या की है। उन्होंने कांग्रेस के आठ विधायकों के भाजपा में अवैध रूप से शामिल होने को वैध ठहराया है।
कांग्रेस नेता ने रखी थी ये मांग
चोडानकर ने याचिका में मांग की थी कि विधानसभा अध्यक्ष संविधान के अनुच्छेद 191 के साथ दसवीं अनुसूची के पैरा-दो के तहत आठ विधायकों को इस आधार पर अयोग्य घोषित करें कि उन्होंने मूल पार्टी (कांग्रेस) की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दी थी। इन विधायकों ने कांग्रेस के टिकट पर गोवा विधानसभा के लिये चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इस मामले में मूल राजनीतिक दल का कोई वैध विलय नहीं है।