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गोवा के राज्यपाल बनने के बाद कश्मीर पर बोले मलिक- 'आज की रात बचेंगे, तो सहर देखेंगे'

Fri, 29 Nov 2019 10:57 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी Published by: अनवर अंसारी Updated Fri, 29 Nov 2019 10:57 AM IST
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Goa Governor Satyapal Malik says Kashmir Glory has not reduced yet, Article 370
गोवा के राज्यपाल सत्यपाल मलिक - फोटो : ANI

जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने घाटी में अपने कार्यकाल के दौरान सुरक्षा हालात का गुरुवार को जिक्र करते हुए कहा कि हर रात उन्हें 'पाकीजा' फिल्म की एक गजल की आखिरी लाइन 'आज की रात बचेंगे, तो सहर देखेंगे' याद आती थी।

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उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के बाद वहां कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई है। इस महीने के शुरू में गोवा के राज्यपाल के तौर पर शपथ लेने वाले मलिक का कहना है कि उनमें कश्मीर का 'खुमार' अबतक खत्म नहीं हुआ है।
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वह जम्मू कश्मीर राज्य के आखिरी राज्यपाल थे। गौरतलब हो कि केंद्र ने पांच अगस्त को राज्य के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था।
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उन्होंने कहा कि मुझे पाकीजा फिल्म की एक गजल की आखिरी लाइन हर रात याद आती थी। गजल कुछ इस तरह थी 'आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे, तीरे नजर देखेंगे ,आप तो आंख मिलाने से भी शर्माते हैं, आप तो दिल के धड़कने से भी डर जाते हैं ,उस पर जिद ये है कि हम जख्में जिगर देखेंगे,' लेकिन मुझे इसकी आखिरी पंक्ति ही याद आती थी कि 'आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे।'

मलिक ने कहा कि इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां हालात कितने खराब थे और जिंदगी हर समय दांव पर लगी होती थी। उन्होंने कहा कि आज की रात बचेंगे तो सहर देखेंगे। वहां काफी खतरे थे... मेरे वहां पहुंचने के बाद, 17 साल के अंतराल के पश्चात वहां पंचायत चुनाव हुए। सभी पार्टियों ने उनका बहिष्कार किया, हुर्रियत ने बहिष्कार किया, आतंकवादियों ने धमकी दी थी कि वे सभी प्रत्याशियों को मार देंगे।

मलिक ने कहा कि आपको जानकर खुशी होगी कि चार हजार लोगों को चुना गया था और कोई हताहत नहीं हुआ था। एक चिड़िया तक हताहत नहीं हुई। यह कश्मीर के इतिहास में अनोखी घटना थी।


मलिक ने गुरुवार को 50वें अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्मोत्सव (इफ्फी) के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म करने के बाद से घाटी में कोई हताहत नहीं हुआ है।

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