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पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्र आवास देने पर यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 15 Nov 2016 11:59 PM IST
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्र सरकारी आवास मुहैया कराने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति रंजन गोगई और न्यायमूर्ति पीसी पंत की पीठ ने लोकप्रहरी नामक गैर सरकारी संगठन की इस याचिका पर उत्तर प्रदेश सहित अन्य को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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याचिका में कहा गया है कि गत एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा गैरकानूनी तरीके से कब्जा जमाए बैठे सरकारी आवास को दो हफ्ते में खाली करवाने का आदेश दिया था लेकिन गत 17 सितंबर को सरकार ने उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन व भत्ता )संशोधित अधिनियम, 2016 लाकर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास देने का निर्णय लिया गया है।
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याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गुहार की गई है कि राज्य सरकार की इस अधिसूचना को शून्य और गैरकानूनी करार दिया जाए। साथ ही अधिसूचना असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि सरकार की अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज करने जैसा है। गत एक अगस्त को दिए अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि उत्तर प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री आवास आवंटन नियम, 1997 कानून के मुताबिक गलत है।
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पीठ ने 1997 के नियमों के तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्र सरकारी आवास देने को अतार्किक बताया था। साथ ही पीठ ने इन सभी को न केवल दो महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया था बल्कि जितने समय तक इन लोगों ने अनधिकृत तरीके से सरकारी आवास पर कब्जा रखा था, उसका किराया भी वसूलने के लिए कहा था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि सरकार को बिना उचित सोच-विचार किए सरकारी संपत्तियों को निजी लोगों या संस्था को देने का अधिकार नहीं है।