'कश्मीर को लेकर पीएम मोदी इतने खामोश क्यों'
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कांग्रेस नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री मोदी को खत लिखकर कश्मीर मुद्दे पर चुप्पी तोड़ने को कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे खत में उन्होंने कहा कि कश्मीर में लोगों का दिल जीतने की कोशिश करे वहां की परिस्थिति बहुत खतरनाक स्तर तक पहुँच चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा है कि वो कश्मीर को लेकर उदासीन हैं। प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा है कि, कश्मीर के लोगों को यह विश्वास करना मुस्किल है कि केंद्र में कोई सरकार भी है।
गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री को खत लिखकर कश्मीर पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने लिखा, ‘मैं राज्य के लोगों का दिल जीतने और, तुरंत कदम उठाने के लिए आपसे ध्यान देने का आग्रह करता हूं कि जल्द से जल्द कानून व्यवस्था की स्थिति बहाल हो।’ राज्यसभा में विपक्ष के नेता आजाद ने इस बात को लेकर खेद जताया कि कश्मीर में स्थिति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कश्मीर मुद्दे का हल ‘इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत’ के दायरे में
आजाद ने अपने खत में पुरानी बातों का जिक्र करते हुए कहा, ‘तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिल्ली-लाहौर बस सेवा की शुरूआत की गई जिसकी सभी ने प्रशंसा की थी कि कश्मीर मुद्दे का हल ‘इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत’ के दायरे में किया जा सकता है।’ इसी तरह से मनमोहन सरकार तत्कालीन संप्रग सरकार ने उरी और मुजफ्फराबाद तथा पुंछ और रावलकोट के बीच बस सेवा शुरू करके राज्य के लोगों का दिल जीतने के लिए कुछ स्थिर और विश्वास के कदम उठाये थे। लेकिन मौजूदा सरकार कुछ नहीं कर रही है।'
गुलाम नबी आजाद ने एएनआई को बताया, 'कश्मीर पिछले 29 दिनों से जल रहा है। अभी भी कई जिलों में कर्फ्यू लगा है। कोई भी चुना हुआ नेता, सांसद, विधायक, एमएलसी, वहां नहीं जा सकते। स्कूल, ऑफिस बंद हैं। व्यापार में लगे लोगों की 20 से 25 प्रतिशत उपस्थिति है। संचार रडार से दूर है। कोई कानून व्यवस्था नहीं है। 55 से 60 लोग मर चुके हैं। 7,000 से 8,000 नागरिक व सुरक्षा बल के जवान घायल हुए हैं। पेलेट गन के इस्तेमाल ने सैंकड़ों लोगों को अंधा बना दिया है। ऐसी विकट परिस्थिति में भी केंद्र सरकार की तरफ से कोई जबाव नहीं आया, खासतौर पर प्रधानमंत्री की तरफ से। यह सब बातें लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या वहां केंद्र में कोई सरकार भी है।"