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Bypoll Results: घोसी उप-चुनाव में किसके साथ गया दलित मतदाता, इंडिया गठबंधन के लिए इस नतीजे के क्या मायने?
Sat, 09 Sep 2023 06:03 AM IST
जयदेव सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जयदेव सिंह
Updated Sat, 09 Sep 2023 06:03 AM IST
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सार
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By Election Results
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Amar Ujala
विस्तार
छह राज्यों की सात विधानसभा सीटों पर हुए उप-चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश की घोसी सीट की रही। इस सीट पर सपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा। पार्टी को 2022 में मिले वोटों से भी ज्यादा मत मिले। वहीं, भाजपा 2022 जितने वोट भी नहीं पा सकी।बसपा ने इस चुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर थी कि दलित वोटर किस तरफ जाता है। वहीं, इंडिया गठबंधन बनने के बाद हुए इस पहले चुनाव को इंडिया बनाम एनडीए के पहले टेस्ट के रूप में भी देखा जा रहा था।
ऐसे में ये जानना जरूरी है कि इस चुनाव में घोसी का दलित मतदाता किसके साथ गया? सपा की जीत की क्या वजह रही? इंडिया गठबंधन के लिए इस जीत के क्या मायने हैं? आइये इन सभी सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं…
घोसी सपा कार्यालय में जश्न मनाते नेता और कार्यकर्ता
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अमर उजाला
सबसे पहले बात नतीजे की कर लेते हैं
घोसी सीट पर समाजवादी पार्टी के सुधाकर सिंह जीतने में सफल रहे। सुधाकर सिंह ने भाजपा उम्मीदवार दारा सिंह चौहान को हराया। दारा सिंह चौहान 2022 में इस सीट से सपा के टिकट पर जीते थे। उन्होंने विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद हुए उप-चुनाव में भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। हालांकि, इस बार चौहान को जीत नहीं मिली। सुधाकर सिंह इससे पहले 2012 में भी इस सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं। 2017 में उन्हें भाजपा के फागू चौहान ने हरा दिया था। वहीं, 2022 के चुनाव में सपा ने उनकी जगह दारा सिंह चौहान को टिकट दिया था।
इस चुनाव में सुधाकर सिंह को कुल 1,24,295 वोट मिले। वहीं, भाजपा के दारा सिंह चौहान को 81,623 वोट से संतोष करना पड़ा। सुधाकर सिंह 42,759 वोट से जीतने में सफल रहे। 2022 में सपा इस सीट से 22,216 वोट से जीती थी। इस तरह पार्टी ने यहां अपनी जीत का अंतर भी बढ़ाया।
घोसी सीट पर समाजवादी पार्टी के सुधाकर सिंह जीतने में सफल रहे। सुधाकर सिंह ने भाजपा उम्मीदवार दारा सिंह चौहान को हराया। दारा सिंह चौहान 2022 में इस सीट से सपा के टिकट पर जीते थे। उन्होंने विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद हुए उप-चुनाव में भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। हालांकि, इस बार चौहान को जीत नहीं मिली। सुधाकर सिंह इससे पहले 2012 में भी इस सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं। 2017 में उन्हें भाजपा के फागू चौहान ने हरा दिया था। वहीं, 2022 के चुनाव में सपा ने उनकी जगह दारा सिंह चौहान को टिकट दिया था।
इस चुनाव में सुधाकर सिंह को कुल 1,24,295 वोट मिले। वहीं, भाजपा के दारा सिंह चौहान को 81,623 वोट से संतोष करना पड़ा। सुधाकर सिंह 42,759 वोट से जीतने में सफल रहे। 2022 में सपा इस सीट से 22,216 वोट से जीती थी। इस तरह पार्टी ने यहां अपनी जीत का अंतर भी बढ़ाया।
बसपा सुप्रीमो मायावती।
- फोटो :
amar ujala
बसपा की वोट नहीं देने या नोटा दबाने की अपील का क्या असर हुआ?
इस उप-चुनाव में बसपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। 2022 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार को 54,248 वोट मिले थे। इस चुनाव में बसपा की ओर से अपने मतदाताओं से अपील की गई थी कि वो किसी पार्टी को वोट नहीं दी। बसपा मतदाता अगर पोलिंग बूथ पर आते हैं तो नोटा का बटन दबाएं, या फिर घर से वोट डालने ही नहीं निकलें।
बसपा की इस अपील का घोसी के मतदाताओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। 2022 के चुनाव में घोसी में कुल 58.2% वोटिंग हुई थी। जबकि, उप चुनाव के दौरान 50.77 फीसदी वोट पड़े। कुल मतदान में करीब सात प्रतिशत की कमी हुई। नोटा पर महज एक हजार सात सौ के करीब वोट मिला। कुल मिलाकर बसपा की अपील का मतदाताओं पर ज्यादा असर नहीं हुआ।
इस उप-चुनाव में बसपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। 2022 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार को 54,248 वोट मिले थे। इस चुनाव में बसपा की ओर से अपने मतदाताओं से अपील की गई थी कि वो किसी पार्टी को वोट नहीं दी। बसपा मतदाता अगर पोलिंग बूथ पर आते हैं तो नोटा का बटन दबाएं, या फिर घर से वोट डालने ही नहीं निकलें।
बसपा की इस अपील का घोसी के मतदाताओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। 2022 के चुनाव में घोसी में कुल 58.2% वोटिंग हुई थी। जबकि, उप चुनाव के दौरान 50.77 फीसदी वोट पड़े। कुल मतदान में करीब सात प्रतिशत की कमी हुई। नोटा पर महज एक हजार सात सौ के करीब वोट मिला। कुल मिलाकर बसपा की अपील का मतदाताओं पर ज्यादा असर नहीं हुआ।
Ghosi Bypoll Election 2023
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अमर उजाला
बसपा का वोटर मतदान केंद्र पहुंचा तो उसने किसे वोट दिया?
2022 के चुनाव में घोसी सीट पर बसपा उम्मीदवार को 54 हजार से ज्याद वोट मिले थे। इस चुनाव में 2,17,387 वोट पड़े। जो 2022 के मुकाबले करीब 38 हजार कम थे। वहीं, नोटा को महज 1,725 वोट मिले। ये आंकड़ा 2022 में नोटा पर पड़े वोट के मुकाबले केवल 476 वोट ज्यादा था। सपा उम्मीदवार को 2022 के मुकाबले करीब 16 हजार ज्यादा वोट मिले। जबकि, 2022 के मुकाबले भाजपा उम्मीदवार के वोट करीब पांच हजार कम हुए।
वरिष्ठ पत्रकार नागेंद्र कहते हैं कि सपा को अपने कोर वोटर के साथ ही दलित वोटरों ने भी अच्छी संख्या में वोट दिया। वहीं, दारा सिंह चौहान न सिर्फ मतदाताओं के लिए बाहरी रहे भाजपा कार्यकर्ता भी उन्हें नहीं स्वीकार सके। बार-बार दल बदलने की वजह से भी उनके प्रति मतदाताओं में नाराजगी थी। इसका नुकसान भी भाजपा को हुआ। जहां तक बसपा के वोटर की बात है तो वह भी अब अपने लिए नए विकल्प तलाश रहा है।
2022 के चुनाव में घोसी सीट पर बसपा उम्मीदवार को 54 हजार से ज्याद वोट मिले थे। इस चुनाव में 2,17,387 वोट पड़े। जो 2022 के मुकाबले करीब 38 हजार कम थे। वहीं, नोटा को महज 1,725 वोट मिले। ये आंकड़ा 2022 में नोटा पर पड़े वोट के मुकाबले केवल 476 वोट ज्यादा था। सपा उम्मीदवार को 2022 के मुकाबले करीब 16 हजार ज्यादा वोट मिले। जबकि, 2022 के मुकाबले भाजपा उम्मीदवार के वोट करीब पांच हजार कम हुए।
वरिष्ठ पत्रकार नागेंद्र कहते हैं कि सपा को अपने कोर वोटर के साथ ही दलित वोटरों ने भी अच्छी संख्या में वोट दिया। वहीं, दारा सिंह चौहान न सिर्फ मतदाताओं के लिए बाहरी रहे भाजपा कार्यकर्ता भी उन्हें नहीं स्वीकार सके। बार-बार दल बदलने की वजह से भी उनके प्रति मतदाताओं में नाराजगी थी। इसका नुकसान भी भाजपा को हुआ। जहां तक बसपा के वोटर की बात है तो वह भी अब अपने लिए नए विकल्प तलाश रहा है।
इंडिया गठबंधन के लिए इस जीत के क्या मायने हैं?
इस जीत के साथ ही जिस तरह से कांग्रेस से लेकर सपा तक के नेताओं के बयान बता रहे हैं कि आने वाले समय में ये दल घोसी की जीत को किस तरह मुद्दा बनाएंगे। जीत के साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट करके कहा कि घोसी में इंडिया जीता। उन्होंने कहा कि घोसी की जनता के सिर्फ समाजवादी पार्टी के नहीं इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को जिताया है, और अब यही आने वाले कल का परिणाम होगा।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि इस उपचुनाव में INDIA गठबंधन के प्रत्याशी की जीत इस बात का ऐलान करती है कि भाजपा की जनविरोधी नीतियों और नफ़रत के बाजार से जनता परेशान हो चुकी है। तय मानिए! 2024 में उत्तर प्रदेश की जनता ने NDA को विदा करने का मन बना लिया है। वहीं, राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी ने सुधाकर सिंह की जीत को इंडिया का हौसला बढ़ाने वाली जीत बताया।
इस जीत के साथ ही जिस तरह से कांग्रेस से लेकर सपा तक के नेताओं के बयान बता रहे हैं कि आने वाले समय में ये दल घोसी की जीत को किस तरह मुद्दा बनाएंगे। जीत के साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट करके कहा कि घोसी में इंडिया जीता। उन्होंने कहा कि घोसी की जनता के सिर्फ समाजवादी पार्टी के नहीं इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को जिताया है, और अब यही आने वाले कल का परिणाम होगा।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि इस उपचुनाव में INDIA गठबंधन के प्रत्याशी की जीत इस बात का ऐलान करती है कि भाजपा की जनविरोधी नीतियों और नफ़रत के बाजार से जनता परेशान हो चुकी है। तय मानिए! 2024 में उत्तर प्रदेश की जनता ने NDA को विदा करने का मन बना लिया है। वहीं, राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी ने सुधाकर सिंह की जीत को इंडिया का हौसला बढ़ाने वाली जीत बताया।