फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Ghayorul Hasan Rizvi says Hindu, Muslim unity may disrupt after filing a review petition

मुस्लिमों को ले लेनी चाहिए मस्जिद के लिए जमीन: रिजवी

Mon, 25 Nov 2019 05:11 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 25 Nov 2019 05:11 AM IST
विज्ञापन
Ghayorul Hasan Rizvi says Hindu, Muslim unity may disrupt after filing a review petition
सैयद गैयूरुल हसन रिजवी - फोटो : facebook

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने कहा है कि अयोध्या मसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करना मुसलमानों के हित में नहीं होगा। आयोग के अध्यक्ष गेयरुल हसन रिजवी ने रविवार को कहा कि इससे हिंदू-मुस्लिम एकता को नुकसान पहुंचेगा।

विज्ञापन


एक साक्षात्कार में रिजवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने एक बैठक की। उसमें सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि फैसले को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अयोध्या में मंदिर के निर्माण के लिए आगे आना चाहिए। वहीं हिंदुओं को मस्जिद के निर्माण में मदद करनी चाहिए। यह दोनों समुदायों में सामाजिक सौहार्द की मजबूती की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
विज्ञापन


रिजवी ने कहा कि फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने से हिंदुओं में गलत संदेश जाएगा और ऐसा माना जाएगा कि मंदिर बनाने में मुसलमान रोड़े अटका रहे हैं। यह हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कतई अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका इसलिए भी दाखिल नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद सहित सभी पक्षों ने वादा किया था कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा, उसे माना जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने आरोप लगाया कि पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत जैसे मुस्लिम पक्ष अब अपने वादे से मुकर रहे हैं। वह वर्षों से कहते आ रहे हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे, तब पुनर्विचार याचिका दायर करने की क्या जरूरत है?
 

देश का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं

रिजवी ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब मुस्लिम पक्षकार कह रहे हैं कि यह याचिका सौ फीसदी खारिज होगी, तब इसे दायर करने का क्या औचित्य है। भारत का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं है, क्योंकि वह नहीं चाहता कि जो मसला हल हो गया है, उसे फिर से उठाया जाए।



इसलिए सवाल उठता है कि आप किसके लिए यह याचिका दायर करना चाहते हैं। केवल लॉ बोर्ड के चार-पांच सदस्य और असदुद्दीन ओवैसी रिव्यू पिटीशन के पक्ष में हैं। ओवैसी वोट के लिए मुस्लिमों का इस्तेमाल कर राजनीति कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed