मुस्लिमों को ले लेनी चाहिए मस्जिद के लिए जमीन: रिजवी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने कहा है कि अयोध्या मसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करना मुसलमानों के हित में नहीं होगा। आयोग के अध्यक्ष गेयरुल हसन रिजवी ने रविवार को कहा कि इससे हिंदू-मुस्लिम एकता को नुकसान पहुंचेगा।
एक साक्षात्कार में रिजवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने एक बैठक की। उसमें सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि फैसले को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अयोध्या में मंदिर के निर्माण के लिए आगे आना चाहिए। वहीं हिंदुओं को मस्जिद के निर्माण में मदद करनी चाहिए। यह दोनों समुदायों में सामाजिक सौहार्द की मजबूती की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
रिजवी ने कहा कि फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने से हिंदुओं में गलत संदेश जाएगा और ऐसा माना जाएगा कि मंदिर बनाने में मुसलमान रोड़े अटका रहे हैं। यह हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कतई अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका इसलिए भी दाखिल नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद सहित सभी पक्षों ने वादा किया था कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा, उसे माना जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत जैसे मुस्लिम पक्ष अब अपने वादे से मुकर रहे हैं। वह वर्षों से कहते आ रहे हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे, तब पुनर्विचार याचिका दायर करने की क्या जरूरत है?
देश का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं
रिजवी ने इस बात पर हैरानी जताई कि जब मुस्लिम पक्षकार कह रहे हैं कि यह याचिका सौ फीसदी खारिज होगी, तब इसे दायर करने का क्या औचित्य है। भारत का आम मुसलमान पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं है, क्योंकि वह नहीं चाहता कि जो मसला हल हो गया है, उसे फिर से उठाया जाए।
इसलिए सवाल उठता है कि आप किसके लिए यह याचिका दायर करना चाहते हैं। केवल लॉ बोर्ड के चार-पांच सदस्य और असदुद्दीन ओवैसी रिव्यू पिटीशन के पक्ष में हैं। ओवैसी वोट के लिए मुस्लिमों का इस्तेमाल कर राजनीति कर रहे हैं।