Covid-19: जिनोटाइपिंग से जल्दी पकड़ में आएगा बहरूपिया कोरोना वायरस, नए स्वरूपों का पता लगाने के लिए तकनीक खोजी
जिनोटाइपिंग ऐसी तकनीक है जो किसी व्यक्ति के डीएनए सीक्वेंसिंग के जरिये उसके आनुवांशिक संरचना में परिवर्तन को पहचान सकती है और दूसरे सीक्वेंस के साथ तुलना करते हुए अपना परिणाम दे सकती है।
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बहरूपिया कोरोना वायरस के नए-नए स्वरूपों को अब समय रहते पकड़ना और आसान हो सकता है। द लांसेट माइक्रोब मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला है कि जिनोटाइपिंग तकनीक से कोरोना के नए स्वरूपों का पता तेजी से लगाया जा सकता है। अगर मौजूदा पारंपरिक तरीकों से इसकी तुलना करें तो महज एक सप्ताह से भी कम समय में जिनोटाइपिंग तकनीक कोरोना के नए स्वरूप के बारे में आनुवांशिक जानकारी हासिल कर सकती है।
जिनोटाइपिंग ऐसी तकनीक है जो किसी व्यक्ति के डीएनए सीक्वेंसिंग के जरिये उसके आनुवांशिक संरचना में परिवर्तन को पहचान सकती है और दूसरे सीक्वेंस के साथ तुलना करते हुए अपना परिणाम दे सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक स्थानीय स्तर पर वायरस के प्रसार नियंत्रण और संदिग्ध रोगियों की निगरानी में मदद करती है। साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारियों सहित सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स का बचाव सबसे पहले और समय पर किया जा सकता है।
बड़ी आबादी वाले देशों में अधिक कारगर
यूके में ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता इयान लेक के मुताबिक, जब कोरोना महामारी शुरू हुई तो जिस स्वरूप से लोग संक्रमित हुए, उसे शुरू में जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिये पहचाना गया। तब से पूरी दुनिया में इसी तकनीक को बेहतर माना जा रहा है, लेकिन भारत और चीन जैसे बड़ी आबादी वाले देशों में जीनोम सीक्वेंसिंग के सहारे वायरस के नए स्वरूपों की पहचान कर पाना एक बड़ी चुनौती भी है। इस तकनीक में न सिर्फ वक्त लगता है, बल्कि प्रशिक्षित कर्मचारी और क्षमतावान प्रयोगशालाओं की आवश्यकता पड़ती है।
1.15 लाख से अधिक मरीजों के नमूनों की जांच की
प्रो. लेक ने कहा, जीनोटाइप परख परीक्षण या जिनोटाइपिंग से वायरस के आनुवांशिंक स्वरूपों का पता लगाया जा सकता है। यह जानकारी 1.15 लाख से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों के नमूनों को सीक्वेंस करने के बाद मिली है। हमने अध्ययन में यह भी पाया कि जिनोटाइपिंग पूरे जीनोम सीक्वेंसिंग की तुलना में अधिक तेजी से और सस्ते में नए स्वरूप का पता लगा सकती है। औसतन छह दिन में इसके परिणाम सामने आए हैं। आमतौर पर जीनोम सीक्वेंसिंग में करीब आठ से नौ दिन का समय लग जाता है।
इससे अपनाने से बढ़ेगी क्षमता
प्रो. लेक ने अध्ययन में सुझाव देते हुए कहा, जिनोटाइपिंग को मनुष्यों और जानवरों में वायरस के नए स्वरूपों की खोज करने के लिए लागू किया जा सकता है। इस तकनीक के पास भविष्य में वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य निर्णय लेने और रोग नियंत्रण का मार्गदर्शन करने की बहुत बड़ी क्षमता है।