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Gujarat: अक्षय तृतीया पर तरंगा जैन मंदिर पहुंचे गौतम अदाणी, परिवार संग की पूजा-अर्चना
Sun, 19 Apr 2026 06:05 PM IST
Rahul Kumar
आईएएनएस, मेहसाणा
आईएएनएस, मेहसाणा
Published by: Rahul Kumar
Updated Sun, 19 Apr 2026 06:05 PM IST
सार
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अदाणी ने रविवार को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गुजरात के तारंगा पहाड़ियों में स्थित श्री अजितनाथ भगवान श्वेतांबर जैन देरासर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
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अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अदाणी अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर रविवार को गुजरात के तरंगा पहाड़ियों में स्थित अजीतनाथ भगवान श्वेतांबर जैन देरासर मंदिर गए और वहां पूजा की।
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मेहसाणा जिले के खेरालू तालुका में स्थित दाभोड़ा हेलीपैड पर सुबह लगभग 7:45 बजे पहुंचने पर, दंपति का जैन समुदाय के सदस्यों ने स्वागत किया और फिर वे पहाड़ी मंदिर की ओर रवाना हुए। मंदिर में श्रद्धालु सुबह से ही इकट्ठा होना शुरू हो गए थे, क्योंकि यह दिन विभिन्न परंपराओं में विशेष रूप से पवित्र माना जाता है।
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जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ को समर्पित यह मंदिर 12वीं शताब्दी का है और सोलंकी शासक राजा कुमारपाल से जुड़ा हुआ है। यह जैन समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। गौतम अदाणी ने मंदिर परिसर में समय बिताने से पहले गर्भगृह में प्रार्थना की। इस दौरान अदाणी दंपति ने कैंटीन का भी संक्षिप्त दौरा किया, जहां तीर्थयात्री अपनी यात्रा के दौरान एकत्रित होते हैं।
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इस यात्रा के दौरान, अदाणी ने मंदिर के न्यासी सचिन अशोकभाई शाह से मुलाकात की और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं में सुधार लाने की योजनाओं पर चर्चा की, जिसमें मंदिर की स्थापत्य और आध्यात्मिक अखंडता को संरक्षित करते हुए पहुंच और सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
अक्षय तृतीया को हिंदू और जैन पंचांगों में सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है, जो समृद्धि, नई शुरुआत और दान-पुण्य से जुड़ा है। जैन परंपरा में, यह वह दिन है जब ऋषभनाथ ने लंबे उपवास के बाद अपना पहला दान ग्रहण किया था, जिससे तपस्वियों को भोजन देने की प्रथा की स्थापना हुई। इससे पहले हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर, अदाणी और उनके परिवार ने भारत के सबसे प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक, अयोध्या के राम मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।