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गौरी लंकेश हत्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने संगठित अपराध के आरोप रखे बरकरार, कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को किया दरकिनार
Thu, 21 Oct 2021 10:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 21 Oct 2021 10:05 PM IST
सार
जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने लंकेश की बहन कविता लंकेश द्वारा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर मोहन नायक पर लगे आरोपों को बहाल कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ani
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में हुई पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में गुरुवार को एक आरोपी के खिलाफ कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (ककोका) के तहत आरोपों को रद्द करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार कर दिया है।
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जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने लंकेश की बहन कविता लंकेश द्वारा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर मोहन नायक पर लगे आरोपों को बहाल कर दिया है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल, 2021 को 2018 में पारित बंगलूरू पुलिस आयुक्त के आदेश और उसके बाद दायर पूरक आरोपपत्र को रद्द कर दिया था।
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इसके तहत नायक के खिलाफ ककोका की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध हटा दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में आरोप लगाया गया कि नायक अपराध करने से पहले और बाद में लंकेश के हत्यारों को सक्रिय रूप से आश्रय दे रहे थे।
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याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने ककोका की धारा-24 की जांच न करके गलती की है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी विशेष अदालत, अधिनियम के तहत किसी भी अपराध पर संज्ञान पुलिस अधिकारी (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक या उससे ऊपर के रैंक वाले अधिकारी) की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं लेगी।