फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Gauhati HC asks East Pakistan immigrant to apply for citizenship under CAA sets aside Foreigner's Tribunal order in Assam news and updates

CAA: पूर्वी पाकिस्तान से भारत में आए शरणार्थी को सीएए के जरिए करना होगा नागरिकता के लिए आवेदन, गुवाहाटी हाईकोर्ट का आदेश

Mon, 10 Jan 2022 07:39 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 10 Jan 2022 07:39 PM IST
सार

गुवाहाटी हाईकोर्ट की जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह और मलाश्री नंदी की बेंच की तरफ से यह आदेश असम के करीमगंज के रहने वाले बब्लू पॉल उर्फ सुजीत पॉल की ओर से दायर रिट याचिका पर दिया गया।

विज्ञापन
Gauhati HC asks East Pakistan immigrant to apply for citizenship under CAA sets aside Foreigner's Tribunal order in Assam news and updates
guwahati high court

विस्तार

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के विदेशी न्यायाधिकरण के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए एक व्यक्ति को विदेशी घोषित किया गया था। इसी के साथ कोर्ट ने उसे असम की नागरिकता के लिए नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत आवेदन करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन


गुवाहाटी हाईकोर्ट की जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह और मलाश्री नंदी की बेंच की तरफ से यह आदेश असम के करीमगंज के रहने वाले बब्लू पॉल उर्फ सुजीत पॉल की ओर से दायर रिट याचिका पर दिया गया। गौरतलब है कि करीमगंज के ही विदेशी अधिकरण ने मई 2017 में पॉल को विदेशी घोषित किया था और कहा था कि वह 25 मार्च 1971 को या इसके बाद अवैध तरीके से भारत में घुसा था। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 30 सितंबर 1964 को सुजीत पॉल करीब दो साल का ही रहा होगा, जब उसके पिता बोलोराम पॉल और दादा चिंताहरण पॉल पूर्वी पाकिस्तान से भारत आए थे। अदालत ने कहा कि उन्हें शरणार्थी का दर्जा भारत सरकार ने दिया और पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पूर्वी पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को दिए गए प्रमाणपत्रों से यह बात काफी स्पष्ट है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिकाकर्ता के मुताबिक, उसके दादा पश्चिम बंगाल के जरिए भारत आए और फिर असम में बस गए। उनका नाम 1966 से ही राज्य की वोटर लिस्ट में भी आता था। बाद में उनकी मृत्यु हो गई।  इसे लेकर बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों को देखते हुए, इसमें कोई संदेह नहीं है कि याचिकाकर्ता ने 1964 में भारत में प्रवेश किया था। उसके बाद वह 1984 तक कलकत्ता (अब कोलकाता) में रहा, फिर असम चला आया और यहां बस गया।

पीठ ने पॉल को एक भारतीय नागरिक घोषित करने में असमर्थता जताई, क्योंकि उसका जन्म इस देश में नहीं बल्कि पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हुआ था और उसने 1964 में भारत में प्रवेश किया था। न्यायाधीशों ने कहा कि 1964 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से भारत में प्रवेश करने वाले व्यक्ति को भारतीय माना जा सकता है या नहीं, इसके लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत धारा 6 ए (2) को छोड़कर कोई और प्रावधान नहीं है।

अदालत ने कहा, ‘‘चूंकि याचिकाकर्ता को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के आधार पर अवैध प्रवासी नहीं माना जा सकता और चूंकि वह 1964 में प्रवेश करने के बाद अब से सात साल से अधिक समय से भारत में रह रहा था, हमारे विचार में, वह नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 के तहत पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्रदान करने पर विचार करने का हकदार है।’’ अदालत ने याचिकाकर्ता को नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 के तहत भारत के नागरिक के रूप में पंजीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष तुरंत आवेदन करने का निर्देश दिया।


पीठ ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी आवेदन प्राप्त होने पर याचिकाकर्ता की नागरिकता के संबंध में उचित आदेश पारित करेगा। आवेदन पर विचार होने तक, उसके खिलाफ राज्य / अधिकारियों द्वारा किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed