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अब रोज निकलेगा लाखों-करोड़ों मास्क का कचरा, संक्रमण के खतरे के बीच कैसे होगा निस्तारण

Mon, 01 Jun 2020 09:43 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Mon, 01 Jun 2020 09:43 PM IST
सार

  • लगभग दो करोड़ है दिल्ली की आबादी, बाहर निकलने वालों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य  
  • निगमों की चिंता, रोज लाखों मास्क बन सकते हैं बड़ी मुसीबत, संक्रमण के खतरे के बीच निस्तारण बना बड़ी चिंता

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Garbage of millions of crores of masks will be released everyday, how will be disposed of amid the risk of infection
लापरवाही: दिल्ली में अशोक रोड पर फेंका गया मास्क। - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अब मास्क पहनना अनिवार्य हो गया है। लेकिन लगभग दो करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में इससे मास्क के कूड़े के ढेर लग सकते हैं। अगर इनका सुरक्षित निस्तारण न किया गया तो ये दिल्ली में संक्रमण की बड़ी वजह बन सकते हैं। कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते खतरे के बीच इन्हें उठाना भी निगम के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए चुनौती बन गया है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने इन मास्क के कचरे को उठाने के लिए विशेष योजना बनाई है। अब कूड़ा इकट्ठा करने के दौरान बायोलॉजिकल वेस्ट के लिए अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था की जाएगी, या वर्तमान वाहनों में एक अलग विशेष केबिन बनाया जायेगा जहां लोग अपने घरों से निकलने वाले मास्क या अन्य संक्रमण संभावित कचरे को डाल सकेंगे। इसके बाद इसे बवाना के एक प्लांट में ले जाकर सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाएगा। पूर्वी दिल्ली नगर निगम भी इसी तरह की रणनीति पर काम कर रहा है।

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उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन जय प्रकाश ने अमर उजाला डॉट कॉम को बताया कि कोरोना के खतरे के बीच कचरे से भी संक्रमण फैलने की संभावना होती है। इस समय सभी लोग मास्क पहन रहे हैं और किसी भी घर से निकलने वाले मास्क से संक्रमण की संभावना हो सकती है। यही कारण है कि अब मास्क और अन्य बायोलोजिकल वेस्ट को उठवाने के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है। इसके तहत निगम क्षेत्र में रहने वाले सभी परिवारों से एक अलग थैले में ऐसे कूड़े को इकट्ठा कर निगम के स्वास्थ्यकर्मियों को देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए एक जागरूकता अभियान भी चलाया जायेगा। इसके सन्दर्भ में अगले हफ्ते एक बैठक कर रणनीति को अंतिम रूप दिया जायेगा।
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उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने Tripple-S (स्वच्छता-सफाई, सेनेटाइजेशन और सोशल डिसटेंसिंग) योजना लागू की थी। निगम के सभी 104 वार्ड में दो-दो विशेष कर्मियों के द्वारा इन नियमों के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है। निगम के 24520 कर्मचारियों के द्वारा रोज लगभग 3500 मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा किया जाता है। इसके लिए 14 डोपिंग स्टेशन बनाये गये हैं जहां से कर्मचारी विशेष पीपीई किट पहनकर संक्रमित लोगों के घरों से कचरा इकट्ठा करने के लिए निकलते हैं। ड्यूटी की समाप्ति पर यहीं स्वयं को डिसइन्फेक्ट कर अपने घरों को जाते हैं।  

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पूर्वी दिल्ली नगर निगम बना रहा ये योजना

मास्क के संभावित बड़े कचरे से निबटने के लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम भी विशेष योजना बना रहा है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्टैंडिंग समिति के चेयरमैन संदीप कपूर ने बताया कि उनके निगम क्षेत्र के 64 वार्ड्स में 364 टिप्पर चलते हैं। कोरोना पॉजिटिव लोगों के घरों से विशेष स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट्स में कूड़ा उठा रहे हैं। लेकिन अब मास्क जैसे कूड़े को इकट्ठा करने के लिए विशेष पीले रंग के बैग की व्यवस्था की जा रही है। इनमें लोगों को बायोलोजिकल वेस्ट डालने के लिए प्रेरित किया जायेगा। दिन के अंत में इन्हें बायोलोजिकल वेस्ट की विधि से निस्तारित किया जायेगा।
 
पूर्वी दिल्ली नगर निगम में इस समय 16579 सफाई कर्मी हैं। लेकिन इनमें 13-14 हजार कर्मियों से ही निगम को सफाई का काम करना पड़ रहा है। एक जून को भी केवल 13852 सफाईकर्मियों की उपस्थिति दर्ज की गई। इनके माध्यम से निगम रोजाना लगभग 2341 मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारित करता है। हर विधानसभा क्षेत्र से एक वाहन बायोलोजिकल वेस्ट को रोजाना स्वामी दयानन्द अस्पताल पहुंचाता है जहां इनका विज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाता है। मास्क को इकट्ठा करने की रणनीति के बाद उसे भी यहीं पर निस्तारित किया जायेगा जिससे उस कूड़े के जरिये किसी अन्य को संक्रमण न हो।
 
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के चेयरमैन भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि उनके क्षेत्र में औसतन 2200 मीट्रिक टन कचरा रोज उठाया जाता है। लगभग 19 हजार कर्मचारी क्षेत्र से कूड़ा एकत्र करते हैं। इसके लिए लगभग 1500 प्राइवेट लोगों को भी जिम्मेदारी दी जाती है। मास्क के कचरे को भी बायोलोजिकल वेस्ट के तरीके से निस्तारित करने की योजना बनाई जा रही है। 

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