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Namami Gange: नदी के संरक्षण की दास्तां बयां करेगा गंगा उत्सव, जानिए कितनी रंग लाईं सफाई की कोशिशें
Mon, 04 Nov 2024 12:27 PM IST
मार्केटिंग डेस्क
Media Solutions Initiative
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Published by: मार्केटिंग डेस्क
Updated Mon, 04 Nov 2024 12:27 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण करके उसको स्वच्छ बनाना था। हम आपको बताते हैं कि नमामि गंगे परियोजना क्या है, गंगा नदी की सफाई का काम कहां तक पहुंचा है और कब तक पूरा होगा?
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नमामि गंगे परियोजना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरिद्वार के चंडी घाट पर चार नवंबर से गंगा उत्सव 2024 शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत यह आयोजन लगातार आठवीं साल हो रहा है। इस बार यह उत्सव गंगा नदी के संरक्षण की दास्तां बयां करेगा। देश की सबसे प्रमुख नदी की सफाई को लेकर खूब कवायदें की गईं हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण करके उसको स्वच्छ बनाना था। हम आपको बताते हैं कि नमामि गंगे परियोजना क्या है, गंगा नदी की सफाई का काम कहां तक पहुंचा है और कब तक पूरा होगा?
नमामि गंगे योजना क्या है
केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2014 को संसद में पेश किए बजट में नमामि गंगे परियोजना शुरू करने का एलान किया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण कम करने, नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना था। इस कार्यक्रम के तहत गंगा नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए कई काम किए गए। इनमें अपशिष्ट जल उपचार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नदी तट प्रबंधन (घाट और श्मशान), जैव विविधता संरक्षण शामिल है।
अब तक क्या क्या हुआ
सरकार ने 2014 में परियोजना को शुरू करने के बाद तेजी से गंगा नदी की सफाई को लेकर काम शुरू कराया। उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक हर राज्य में बड़ी संख्या में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान), औद्योगिक इकाइयों पर प्रतिबंध और नदी के पानी को स्वच्छ करने के लिए काम कराए। योजना के तहत जून 2024 तक 39,080.70 करोड़ रुपये की कुल 467 परियोजनाएं शुरू की गई। इनमें से 292 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। इसके अलावा 5,282 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क बिछाने के लिए 32,071 करोड़ रुपये की लागत से 200 सीवरेज बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
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नमामि गंगे योजना क्या है
केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2014 को संसद में पेश किए बजट में नमामि गंगे परियोजना शुरू करने का एलान किया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण कम करने, नदी का संरक्षण और कायाकल्प करना था। इस कार्यक्रम के तहत गंगा नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए कई काम किए गए। इनमें अपशिष्ट जल उपचार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नदी तट प्रबंधन (घाट और श्मशान), जैव विविधता संरक्षण शामिल है।
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अब तक क्या क्या हुआ
सरकार ने 2014 में परियोजना को शुरू करने के बाद तेजी से गंगा नदी की सफाई को लेकर काम शुरू कराया। उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक हर राज्य में बड़ी संख्या में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान), औद्योगिक इकाइयों पर प्रतिबंध और नदी के पानी को स्वच्छ करने के लिए काम कराए। योजना के तहत जून 2024 तक 39,080.70 करोड़ रुपये की कुल 467 परियोजनाएं शुरू की गई। इनमें से 292 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। इसके अलावा 5,282 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क बिछाने के लिए 32,071 करोड़ रुपये की लागत से 200 सीवरेज बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
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नमामि गंगे परियोजना
- फोटो : अमर उजाला
औद्योगिक प्रदूषण शोधन संयंत्र
परियोजना के तहत औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के लिए पांच साझा प्रवाह शोधन संयंत्रों (सीईटीपी) का निर्माण किया गया। इसमें जजमाऊ, बंथेर, उन्नाव, मथुरा और गोरखपुर में संयंत्र बनाने का काम शुरू किया गया। इनमें से मथुरा और जजमाऊ में काम पूरा हो चुका है। इन संयंत्रों के तहत गंगा नदी के तट पर प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की जांच की जा रही है।
नदी तट विकास और सतह की सफाई
योजना के तहत 286 घाटों/श्मशानों और कुंडों/तालाबों के निर्माण, आधुनिकीकरण और नवीनीकरण के लिए 84 घाटों/श्मशानों की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। वहीं घाटों और नदी की सतह से तैरते ठोस अपशिष्ट को एकत्रित करने और उसके निपटान के लिए नदी सतह की सफाई का काम कराया गया।
मछली, डॉल्फिन और घड़ियालों का संरक्षण
नमामि गंगे परियोजना के तहत जैव-विविधता संरक्षण के लिए भी काम किए गए हैं। केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान ने मछलियों और डॉल्फिन के संरक्षण के लिए पहल की। भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और वन विभाग ने डॉल्फिन ऑर्ट्स, हिल्सा, कछुए और घड़ियालों के बचाव के लिए काम किए। इससे नदी में इनकी आबादी में इजाफा हुआ।
वनीकरण
गंगा नदी के आसपास वनीकरण को बरकरार रखने के लिए भी नमामि गंगे परियोजना के तहत पहल की गई। इसमें लगभग 347 करोड़ रुपये से 31,494 हेक्टेयर क्षेत्र पर वनीकरण किया गया।
गंगा कार्य बल
मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए पौधरोपण, जन जागरूकता और जैव विविधता की निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश में गंगा कार्य बल (जीटीएफ) बनाया गया। इसके तहत 45 हजार गंगादूत, 2900 गंगा प्रहरी, 700 गंगा मित्र बनाए गए। पांच राज्यों में गंगा तट के गांवो को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है।
परियोजना के तहत औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के लिए पांच साझा प्रवाह शोधन संयंत्रों (सीईटीपी) का निर्माण किया गया। इसमें जजमाऊ, बंथेर, उन्नाव, मथुरा और गोरखपुर में संयंत्र बनाने का काम शुरू किया गया। इनमें से मथुरा और जजमाऊ में काम पूरा हो चुका है। इन संयंत्रों के तहत गंगा नदी के तट पर प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की जांच की जा रही है।
नदी तट विकास और सतह की सफाई
योजना के तहत 286 घाटों/श्मशानों और कुंडों/तालाबों के निर्माण, आधुनिकीकरण और नवीनीकरण के लिए 84 घाटों/श्मशानों की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। वहीं घाटों और नदी की सतह से तैरते ठोस अपशिष्ट को एकत्रित करने और उसके निपटान के लिए नदी सतह की सफाई का काम कराया गया।
मछली, डॉल्फिन और घड़ियालों का संरक्षण
नमामि गंगे परियोजना के तहत जैव-विविधता संरक्षण के लिए भी काम किए गए हैं। केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान ने मछलियों और डॉल्फिन के संरक्षण के लिए पहल की। भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और वन विभाग ने डॉल्फिन ऑर्ट्स, हिल्सा, कछुए और घड़ियालों के बचाव के लिए काम किए। इससे नदी में इनकी आबादी में इजाफा हुआ।
वनीकरण
गंगा नदी के आसपास वनीकरण को बरकरार रखने के लिए भी नमामि गंगे परियोजना के तहत पहल की गई। इसमें लगभग 347 करोड़ रुपये से 31,494 हेक्टेयर क्षेत्र पर वनीकरण किया गया।
गंगा कार्य बल
मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए पौधरोपण, जन जागरूकता और जैव विविधता की निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश में गंगा कार्य बल (जीटीएफ) बनाया गया। इसके तहत 45 हजार गंगादूत, 2900 गंगा प्रहरी, 700 गंगा मित्र बनाए गए। पांच राज्यों में गंगा तट के गांवो को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है।
गंगा नदी में अठखेलियां करती डॉल्फ़िन।
नमामि गंगे परियोजना के मुख्य स्तंभ
अब तक कितना पैसा खर्च हुआ
केंद्र सरकार ने जब 2014-15 में नमामि गंगे परियोजना की शुरुआत की थी तो योजना के तहत मार्च 2021 तक 20 हजार करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था। इस बजट से सीवेज प्लांट का निर्माण, गंगा की सफाई समेत तमाम कार्य कराए गए। इसके बाद 2021 में परियोजना के बजट में इजाफा किया गया। इसका दोबारा बजट 22500 करोड़ रुपये तय किया गया। अब इस योजना को 2026 तक बढ़ा दिया गया है। परियोजना के तहत 2022 तक सबसे ज्यादा बजट 4205 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश को मिला। जबकि बिहार को 3516 करोड़, पश्चिम बंगाल को 1320 करोड़, उत्तराखंड को 1117 करोड़ रुपये दिए गए।
कितनी साफ हुई गंगा
सरकार का दावा है कि नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा नदी में पहले से काफी साफ हुई है। जलशक्ति मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 से 2021 तक नदी के पानी की स्थिति में अंतर आया है। नदी की सबसे प्रदूषित धारा उत्तर प्रदेश के कन्नौज से वाराणसी तक के बीच पानी में ऑक्सीजन की मांग (बीओडी) में कमी आई है। पहले यहां बीओडी 6 से 10 मिली ग्राम प्रति लीटर होता था। इसके अलावा साल 2022 में 13.73 टीडीपी बीओडी भार में कमी आई है।
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- वनीकरण
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- औद्योगिक अपशिष्ट निगरानी
- गंगा ग्राम
अब तक कितना पैसा खर्च हुआ
केंद्र सरकार ने जब 2014-15 में नमामि गंगे परियोजना की शुरुआत की थी तो योजना के तहत मार्च 2021 तक 20 हजार करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था। इस बजट से सीवेज प्लांट का निर्माण, गंगा की सफाई समेत तमाम कार्य कराए गए। इसके बाद 2021 में परियोजना के बजट में इजाफा किया गया। इसका दोबारा बजट 22500 करोड़ रुपये तय किया गया। अब इस योजना को 2026 तक बढ़ा दिया गया है। परियोजना के तहत 2022 तक सबसे ज्यादा बजट 4205 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश को मिला। जबकि बिहार को 3516 करोड़, पश्चिम बंगाल को 1320 करोड़, उत्तराखंड को 1117 करोड़ रुपये दिए गए।
कितनी साफ हुई गंगा
सरकार का दावा है कि नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा नदी में पहले से काफी साफ हुई है। जलशक्ति मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 से 2021 तक नदी के पानी की स्थिति में अंतर आया है। नदी की सबसे प्रदूषित धारा उत्तर प्रदेश के कन्नौज से वाराणसी तक के बीच पानी में ऑक्सीजन की मांग (बीओडी) में कमी आई है। पहले यहां बीओडी 6 से 10 मिली ग्राम प्रति लीटर होता था। इसके अलावा साल 2022 में 13.73 टीडीपी बीओडी भार में कमी आई है।
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