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ISRO: अब 2027 में लॉन्च किया जाएगा गगनयान मिशन, इसरो प्रमुख बोले- पहले व्योममित्र को भेजेंगे अंतरिक्ष

Tue, 06 May 2025 06:53 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 06 May 2025 06:53 PM IST
सार

ISRO: भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' अब 2027 की पहली तिमाही में लॉन्च होगा, जिसमें इंसानों को पृथ्वी से 400 किमी ऊपर भेजा जाएगा। इसरो प्रमुख ने बताया कि 90 फीसदी तकनीकी काम पूरा हो चुका है। लेकिन उससे पहले 'व्योममित्र' रोबोट के साथ मानवरहित मिशन होगा। 

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Gaganyaan mission slated for first quarter of 2027: ISRO chief Narayanan
इसरो प्रमुख वी. नारायणन - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' अब 2027 की पहली तिमाही में लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन पहले 2022 में होना था, लेकिन अब इसमें करीब पांच साल की देरी हो गई है। इस जटिल मिशन को शुरू करने के लिए अभी कई तकनीकी चुनौतियां का सामना है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि इस साल के अंत तक पहला मानव रहित मिशन लॉन्च किया जाएगा। इसके बाद 2026 में दो और मानव रहित मिशन किए जाएंगे।
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इसरो प्रमुख ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, 'पहला मानव मिशन अब 2027 की पहली तिमाही में होगा।' उन्होंने आगे कहा, 'इसरो अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने से पहले मानवरहित मिशन के हिस्से के रूप में एक अर्ध-मानव रोबोट 'व्योममित्र' को अंतरिक्ष में भेजेगा।' 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में गगनयान मिशन की घोषणा की थी। उन्होंने भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए 2022 का लक्ष्य तय किया था। लेकिन कोरोना महामारी ने अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण में बाधा डाली। मिशन से जुड़ी तकनीकों को तैयार करने में भी अधिक समय लग रहा है। 

गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर भेजा जाएगा और कुछ दिनों बाद उन्हें सुरक्षित वापस लाया जाएगा। इसके लिए इसरो ने पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ईसीएलएसएस) नाम की प्रणाली तैयार की है, जो अंतरिक्ष यान के अंदर का तापमान, हवा की गुणवत्ता, दबाव और नमी नियंत्रित करेगी। अंतरिक्ष यात्रियों की साफ-सफाई और रहने के माहौल को भी संभालेगी।


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नारायणन ने कहा,  'यह बहुत जटिल प्रक्रिया है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है और अब हम अंतिम परीक्षण के चरण में हैं।' अगर गगनयान मिशन कामयाब रहता है, तो भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद अपने दम पर मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला चौथा देश बनेगा। 

नारायणन ने बताया कि दिसंबर में पीएसएलवी रॉकेट से भेजे गए दो उपग्रहों के साथ किया गया अंतरिक्ष डॉकिंग परीक्षण सफल रहा। अब इसरो इसका अगला चरण स्पैडेक्स-2 की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसका प्रस्ताव जल्द ही सरकार को भेजा जाएगा। 

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