क्यों हुआ संजय लीला भंसाली पर हमला, कौन थीं पद्मावती, जानें
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क्या है इतिहासकारों की राय, क्यों बन रही है फिल्म?
रानी पद्मावती को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग मत हैं। कुछ पद्मावती की गौरवगाथा को इतिहास का हिस्सा बताते हैं, तो कुछ इसे महज कोरी कल्पना करार देते हैं। इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि किस तरह धारावाहिक या फिल्म निर्माता एक डिस्क्लेमर (शुरू में ही की गई घोषणा की हमारी कहानी का किसी जीवत या मृत व्यक्त से कोई लेना देना नहीं है) की आड़ में इतिहास के साथ मन मर्जी छेड़खानी करते हैं। उन्होंने कहा कि भक्तिकाल के कवि मलिक मोहम्मद जायसी की एक रचना ‘पद्मावत’ का एक किरदार है पद्मावती। इसका वास्तविक इतिहास से कोई लेना देना नहीं है। पद्मावत ग्रंथ को जायसी ने अकबर के समय करीब 1550 के आसपास लिखा था। इस कहानी में अलाउद्दीन खिलजी का जिक्र आया है, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी का काल 1296 से 1316 के बीच का रहा।
हबीब ने बताया कि मेवाड़ के राजा रतन सिंह को लंका की राजकुमारी पद्मावती से प्रेम हो जाता है और वह शादी करके उसे मेवाड़ ले आते हैं। एक युद्ध में अलाउद्दीन खिलजी रतन सिंह को बंदी बना कर दिल्ली ले जाता है। पद्मावती अपनी चतुराई से धोखा देकर रतन सिंह को कैद से निकाल ले आती हैं। बाद में एक युद्ध में रतन सिंह की मौत हो जाती है। इस बीच अलाउद्दीन पद्मावती को चाहने लगता है और उसे हासिल करने की ख्वाहिश करता है। रतन सिंह की मौत के बाद वह पद्मावती को हासिल करने जाता है, लेकिन उससे पहले ही वह स्वयं को सती कर लेती हैं।
पद्मावती के सौंदर्य की बात खिलजी तक कैसे पहुंची?
लेकिन मुगल शासक खिलजी तक पद्मावती के सौंदर्य की बात पहुंची कैसे, इसके पीछे भी एक कहानी है।
दरअसल, कहानी यह है कि पद्मावती सिंहल द्वीप (आज का श्रीलंका) का राजा गंधर्वसेन की पुत्री थीं। उनका नाम पद्मिनी भी कहा जाता था। उसने एक तोता पाल रखा था, जिसका नाम हीरामन था। एक दिन पद्मावती की गैरमौजूदगी में बिल्ली के आक्रमण से बचकर तोता भाग निकला और एक बहिलिए ने उसे कैद कर लिया। एक ब्राह्मण ने बहेलिए से तोते को खरीद लिया। ब्राह्मण ने चित्तौड़ पहुंचकर वहां के राजा रतनसिंह राजपूत को तोता बेच दिया। तोते ने राजा को पद्मावती अद्भुत सौंदर्य के बारे में सुनाया। रतन सिंह पद्मावती को पाने के लिए निकल पड़ा।
जंगली रास्तों और समंदर को पार करके रतन सिंह सिंहल पहुंचा। साथ में वह तोता भी था। रतन सिंह ने तोते के द्वारा पदमावती के पास अपना प्रेमसंदेश भेजा। पद्मावती राजा रतम सिंह से मिलने एक शिव मंदिर में आई। पद्मावती को देखते ही राजा होश खो बैठा और मूर्छित हो गया। पद्मावती को कुछ समझ नहीं आया और उसने राजा की छाती पर चंदन से लिख दिया कि उसे वह तब पा सकेगा जब वह सात आकाशों जैसे ऊंचे सिंहलगढ़ पर चढ़कर आएगा।
पद्मावती की सुंदरता पर मुग्ध था अलाउद्दीन खिलजी
रतन सिंह की सभा में राघवसेन नाम का एक पंडित था, वह जादूगर भी था। एक दिन वह अधर्मी कामों रंगे हाथ पकड़ लिया गया और रतनसिंह ने उसे निष्कासित कर दिया। अपमान का घूंट पीकर राघवसेन रतन सिंह से बदलना लेने की सोचने लगा। वह दिल्ली जाकर तत्कालीन सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की सेवा में लग गया। वह जब भी खिलजी पास अपनी मौजूदगी का मौका पाता, उससे रानी पद्मावती के सौंदर्य की बात छेड़ देता। पद्मावती के सौंदर्य की बात सुनकर अलाउद्दीन उसको पाने की ललक से चित्तौड़ पहुंचा। अलाउद्दी ने रतनसिंह से कहा कि वह पद्मावती को अपनी बहन मानता है, इसलिए उनसे मिलना चाहता है। रतनसिंह ने पद्मावती से इस बारे में पूछा तो रानी ने कहा कि वह केवल तालाब के पानी में अलाउद्दीन को अपना चेहरा दिखाएगी। अलाउद्दीन इसके लिए तैयार हो गया।
तालाब के पानी में पद्मावती की सुंदरता देख पागल हो उठा था अलाउद्दीन
तालाब के पानी में पद्मावती का चेहरा देखकर अलाउद्दीन वासना के ऐसा वशीभूत हुआ कि रानी को पाने की खातिर युद्ध छेड़ दिया। उसने चित्तौड़ के किले के बाहर घेरा बंदी कर दी। उसने धोखे से रतन सिंह बंदी बनाने की साजिश रची। संधि के लिए संदेश भेजा गया। रतन सिंह अलाउद्दीन को विदा करने के लिये किले से बाहर निकला। अलाउद्दीन ने रतन सिंह को बंदी बनाया और दिल्ली की ओर कूच किया।
उधर पद्मावती अपने पति को आजाद कराने के लिये वह अपने सामंतों गोरा और बादल से मिलीं। गोरा बादल ने रतन सिंह सोलह सौ पालकियां सजाईं जिनके भीतर असलहों से लैस राजपूत सैनिकों को बैठाया गया था। वे पालकियों को लेकर दिल्ली की ओर चले। पद्मावती ने अलाउद्दीन को संदेश भेजा कि वह अपनी चेरियों के साथ सुल्तान की सेवा में आई है और आखिरी बार अपने पति रतन सिंन से मिलना चाहती है। अलाउद्दीन तैयार हो गया। पालकियों में बैठे राजपूतों ने रतन सिंह बेड़ियों से आजाद किया और उसे लेकर चित्तौड़ वापस आ गए।
पद्मावती ने अपने पति रतन सिंह को बताया कि जिस वक्त वह दिल्ली में बंदी था, कुंभलनेर के राजा देवपाल ने उसके पास पास प्रेमप्रस्ताव भेजा था। रतन सिंह यह बात सुनकर आग बबूला हो उठा और सीधा कुंभलनेर पहुंचकर देवपाल को द्वंद्व युद्ध के लिए ललकारा।
रतन सिंह ने द्वंद्व युद्ध में मार गिराया लेकिन खुद भी बहुत जख्मी हो गया। चित्तौड़ पहुंचते ही रतन सिंह की जख्मी हालत में मौत हो गई। पद्मावती और नागमती ने भी उसके शव के साथ सती होना उचित समझा। उधर, अलाउद्दीन रतन सिंह का पीछा करता हुआ चित्तौड़ पहुंचा तो उसे पद्मावती की चिता की राख मिली।
क्या है विवाद?
राजस्थान का राजपूत समाज संजयलीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का विरोध कर रहा है। राजपूतों के मुताबिक 16 हजार रानियों के साथ जौहर (आत्मसम्मान के लिए आत्मदाह) करने वाली रानी को अलाउद्दीन खिलजी के साथ दिखाया जा रहा है, ऐसे में राजपूतों का जिंदा रहना ही बेकार है। राजस्थान की धरती पर समाज के अपमानवाली शुटिंग और फिल्म दोनों को नहीं चलने दिया जाएगा।
गुजरात की महाकाल सेना ने भी करणी सेना का समर्थन दिया। शिवसेना ने कहा कि हिंदू राजा-रानियों का चरित्र हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
करणी सेना के नेता लोकेन्द्र सिंह कालवी ने पत्रकारों से कहा कि करणी सेना के कार्यकर्ता जयगढ़ किले में भंसाली से बातचीत करने गए थे। लेकिन उन्होंने फायरिंग की, जिससे कार्यकर्त्ता उग्र हो गए। इस कारण ही वहां तोड़फोड़ हुई। राजपूत समाज ने इतिहास से छेड़छाड़ कर रानी पद्मावती की छवि खराब करने को लेकर कई बार भंसाली को पत्र लिखे हैं, लेकिन उनकी ओर से ध्यान ही नहीं दिया गया। इतिहास की किसी भी किताब में पद्मावती को खिलजी की प्रेमिका नहीं बताया गया है। करणी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि आपत्तिजनक हिस्से कहानी से नहीं हटाए गए, तो बुरे नतीजे भुगतने होंगे।
Mere liye doob marne wali baat hai agar iss tarah ki chizein bardasht karein: Lokendra Singh Kalvi (Founder, Rajput Karni Sena) #Padmavati pic.twitter.com/TcOQbiOP1O
— ANI (@ANI_news) January 28, 2017