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Gaganyan: 'मैंने अपने पैर सीमेंट में जमा दिए', अंतरिक्ष यात्री अंगद प्रताप ने क्यों अपने साथी से कही ये बात?

Tue, 13 May 2025 07:02 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 13 May 2025 07:02 PM IST
सार

गगनयान मिशन के अंतरिक्ष यात्री अंगद प्रताप ने कहा कि हमारे पैर अब सीमेंट में जम चुके हैं। वे और उनके साथी अब सिर्फ वायुसेना पायलट नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

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From fighter pilots to face of Gaganyan: Astronaut designates for India's maiden human spaceflight
गगनयान मिशन के क्रू सदस्य - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री-नामित अंगद प्रताप, अजीत कृष्णन, शुभांशु शुक्ला और प्रशांत नायर आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। बता दें कि इनमें से शुभांशु शुक्ला को 29 मई को इसरो और नासा की संयुक्त अंतरिक्ष यात्रा के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) भेजा जाएगा।

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अंगद प्रताप बोले सीमेंट में जमे हैं मेरे पैर
हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन में जब लोग सेल्फी लेने के लिए इन अंतरिक्ष यात्रियों के पास उमड़ पड़े, तो अंगद प्रताप ने मजाक में अपने साथी अजीत कृष्णन से कहा कि मैंने अपने पैर सीमेंट में जमा दिए हैं।" यह बयान बताता है कि अब वे सिर्फ फाइटर पायलट नहीं, बल्कि गगनयान मिशन का सार्वजनिक चेहरा बन चुके हैं।
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बता दें कि अंगद प्रताप और अजीत कृष्णन दोनों भारतीय वायुसेना के टेस्ट फाइटर पायलट रह चुके हैं, जिसके बाद अब भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के प्रतिनिधि ते तौर पर उनका एक अलग पहचान सामने आया हैं। इसको लेकर अंगद ने कहा कि अब हमारी जिंदगी थोड़ी सार्वजनिक हो गई है। लोग हमें पहचानते हैं। लेकिन एक समय के बाद ये आदत बन जाती है। लोगों से बातचीत में मुझे कई सपनों के बारे में पता चलता है और उनसे प्रेरणा भी मिलती है।

टेस्ट पायलट से अंतरिक्षा यात्री बनने का सफर
एक लड़ाकू विमान उड़ाने से अंतरिक्ष यात्री बनने तक के अंगद प्रताप का सफर काफी चुनौतीपूर्ण और रोमांचक रहा। अपनी इस यात्रा को लेकर उन्होंने कहा कि टेस्ट पायलट के तौर पर हम ऐसे जहाज उड़ाते हैं जिन्हें पहली बार असेंबल किया गया हो। उन्होंने कहा कि इसी तरह अंतरिक्ष मिशन में भी कई अनिश्चित स्थितियां होती हैं, जिनसे निपटना होता है। उन्होंने बताया कि रूस और बेंगलुरु के अंतरिक्ष प्रशिक्षण केंद्रों में उन्हें मानसिक, शारीरिक और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया, ताकि अंतरिक्ष में हर चुनौती का सामना किया जा सके।

भावुक हुए अंगद प्रताप
इसके साथ ही अंगद प्रताप ने भावुक होकर कहा कि जब प्रधानमंत्री ने हमारे नामों की घोषणा की, तो ऐसा लगा जैसे 1.4 अरब लोगों की उम्मीदें हमारे कंधों पर आ गई हों। हम अकेले नहीं उड़ते, हमारे साथ इसरो के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, टेक्नीशियनों और छात्रों के सपने भी होते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों से मिलकर उन्हें भी प्रेरणा मिलती है, और वे खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें भारत के पहले मानव मिशन का हिस्सा बनने का मौका मिला।

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गगनयान मिशन की तैयारी
गौरतलब है कि गगनयान मिशन की योजना के मुताबिक 2027 की शुरुआत में दो भारतीयों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा, जहां वे कुछ दिन रहेंगे और फिर सुरक्षित लौटेंगे। इस मिशन से पहले सभी अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग मिशन से 12 महीने पहले फिर से शुरू होगी। इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंगद प्रताप इस समय पीएचडी कर रहे हैं और अध्ययन अवकाश पर हैं, जबकि अजीत कृष्णन वायुसेना में दोबारा ड्यूटी पर लौट चुके हैं।

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