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संकल्प से ही सफलता: कर्ज से रोजगार तक, हर कदम कठिन परीक्षा; निवेश संकट 'शुभेंदु' के समक्ष चुनौतियों का पहाड़
Sun, 10 May 2026 07:02 AM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sun, 10 May 2026 07:02 AM IST
सार
- बंगाल बेहाल...7.71 लाख करोड़ का कर्ज
- 11.89 फीसदी गरीबी दर
- 0.6 फीसदी ही विदेशी निवेश
- 75 वर्ष की वैचारिक नींव को मिला आकार
प्रचंड जीत के साथ पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई भाजपा के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। इनमें कर्ज, बेरोजगारी, ठप परियोजनाओं को चालू करने और निवेश संकट के बीच चुनावी वादों को पूरा करने की मुश्किल परीक्षा पास करनी होगी।
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बंगाल में शुभेंदु का शपथ ग्रहण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बंगाल की जिस धरती पर 75 वर्ष पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की वैचारिक नींव रखी थी, उसी राज्य में पहली बार भाजपा 207 सीटें हासिल कर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता तक पहुंची। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में शनिवार को राज्यपाल आरएन रवि ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उनके साथ पांच मंत्रियों ने भी शपथ ली। इस दौरान पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ भाजपा-राजग शासित करीब 20 राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी नई सरकार को ऐसे समय जिम्मेदारी मिली है, जब राज्य भारी कर्ज, रोजगार संकट, धीमे औद्योगिक निवेश, अधूरी आधारभूत परियोजनाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों से जूझ रहा है। सत्ता परिवर्तन के साथ राजनीतिक तस्वीर जरूर बदल गई है, लेकिन आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियां जस की तस बनी हुई हैं।
यह भी पढ़ें- रविवार को विधायक दल के नेता चुने जाएंगे हिमंत: 12 को लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ; PM मोदी भी रहेंगे मौजूद
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विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार के सामने सबसे कठिन काम वित्तीय संतुलन बनाए रखने और निवेशकों का भरोसा लौटाने का होगा। पिछले कुछ वर्षों में राज्य की आर्थिक स्थिति और परियोजनाओं की धीमी रफ्तार को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। नई सरकार दृढ़ संकल्प से ही हालात सुधार सकेगी। राज्य पर कुल कर्ज करीब 7.71 लाख करोड़ रुपये है। आर्थिक जानकारों के अनुसार इतनी बड़ी देनदारी के बीच नई सरकार के लिए विकास योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। ब्याज भुगतान और राजकोषीय दबाव आने वाले वर्षों में सरकार की सबसे बड़ी चिंता बन सकते हैं।
गरीबी और सामाजिक असमानता बड़ी चुनौती
2023 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में गरीबी दर करीब 11.89 प्रतिशत बताई गई है, हालांकि इन आंकड़ों को लेकर अलग-अलग मत हैं।
रोजगार संकट और बढ़ता पलायन
रोजगार का मुद्दा भी नई सरकार के लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य से बाहर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या करीब 22 लाख बताई जाती है, जबकि गैर-सरकारी अनुमान इसे 50 लाख से अधिक बताते हैं। उद्योग और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन लगातार राजनीतिक बहस का विषय रहा है।
उद्योग और निवेश में पिछड़ता बंगाल
औद्योगिक निवेश के मोर्चे पर भी पश्चिम बंगाल की स्थिति चिंता का विषय मानी जाती है। देश में कुल विदेशी निवेश में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 0.6 प्रतिशत बताई जाती है। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में करीब सात हजार कंपनियों के राज्य छोड़ने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन पाने से निवेश प्रभावित हुआ।
भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ा रोड़ा
बड़ी परियोजनाओं के सामने जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल रहा है। रेलवे विस्तार परियोजनाओं के लिए 4564 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई थी, लेकिन केवल 27 प्रतिशत जमीन ही उपलब्ध हो सकी। इसके कारण केंद्र की करीब 2900 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रभावित हुईं, जबकि लगभग 1500 करोड़ रुपये की परियोजनाएं धीमी गति से चल रही हैं।
यह भी पढ़ें- PM Modi: आज कर्नाटक-तेलंगाना के दौरे पर पीएम मोदी; हैदराबाद को देंगे ₹9400 करोड़ के विकास परियोजनाओं की सौगात
शिक्षा व्यवस्था सुधारने का भी इम्तिहान
2023 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 8207 ऐसे स्कूल बताए गए हैं, जहां छात्र संख्या 30 या उससे कम है। इनमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूल शामिल हैं। कम छात्र संख्या के कारण कई स्कूलों के अस्तित्व पर सवाल खड़े हुए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल छात्र संख्या का नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा ढांचे और संसाधनों के असंतुलन का भी मुद्दा है।
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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी नई सरकार को ऐसे समय जिम्मेदारी मिली है, जब राज्य भारी कर्ज, रोजगार संकट, धीमे औद्योगिक निवेश, अधूरी आधारभूत परियोजनाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों से जूझ रहा है। सत्ता परिवर्तन के साथ राजनीतिक तस्वीर जरूर बदल गई है, लेकिन आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियां जस की तस बनी हुई हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार के सामने सबसे कठिन काम वित्तीय संतुलन बनाए रखने और निवेशकों का भरोसा लौटाने का होगा। पिछले कुछ वर्षों में राज्य की आर्थिक स्थिति और परियोजनाओं की धीमी रफ्तार को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। नई सरकार दृढ़ संकल्प से ही हालात सुधार सकेगी। राज्य पर कुल कर्ज करीब 7.71 लाख करोड़ रुपये है। आर्थिक जानकारों के अनुसार इतनी बड़ी देनदारी के बीच नई सरकार के लिए विकास योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। ब्याज भुगतान और राजकोषीय दबाव आने वाले वर्षों में सरकार की सबसे बड़ी चिंता बन सकते हैं।
गरीबी और सामाजिक असमानता बड़ी चुनौती
2023 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में गरीबी दर करीब 11.89 प्रतिशत बताई गई है, हालांकि इन आंकड़ों को लेकर अलग-अलग मत हैं।
- रंगराजन समिति के पुराने मानकों के आधार पर शहरों में प्रतिदिन 47 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 32 रुपये खर्च करने वालों को गरीबी रेखा से ऊपर माना गया था।
- इन्हीं मानकों को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। बावजूद इसके, ग्रामीण और सीमावर्ती जिलों में आर्थिक असमानता अब भी बड़ा मुद्दा मानी जाती है।
रोजगार संकट और बढ़ता पलायन
रोजगार का मुद्दा भी नई सरकार के लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य से बाहर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या करीब 22 लाख बताई जाती है, जबकि गैर-सरकारी अनुमान इसे 50 लाख से अधिक बताते हैं। उद्योग और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन लगातार राजनीतिक बहस का विषय रहा है।
उद्योग और निवेश में पिछड़ता बंगाल
औद्योगिक निवेश के मोर्चे पर भी पश्चिम बंगाल की स्थिति चिंता का विषय मानी जाती है। देश में कुल विदेशी निवेश में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 0.6 प्रतिशत बताई जाती है। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में करीब सात हजार कंपनियों के राज्य छोड़ने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन पाने से निवेश प्रभावित हुआ।
भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ा रोड़ा
बड़ी परियोजनाओं के सामने जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी बाधाओं में शामिल रहा है। रेलवे विस्तार परियोजनाओं के लिए 4564 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई थी, लेकिन केवल 27 प्रतिशत जमीन ही उपलब्ध हो सकी। इसके कारण केंद्र की करीब 2900 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रभावित हुईं, जबकि लगभग 1500 करोड़ रुपये की परियोजनाएं धीमी गति से चल रही हैं।
यह भी पढ़ें- PM Modi: आज कर्नाटक-तेलंगाना के दौरे पर पीएम मोदी; हैदराबाद को देंगे ₹9400 करोड़ के विकास परियोजनाओं की सौगात
शिक्षा व्यवस्था सुधारने का भी इम्तिहान
2023 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 8207 ऐसे स्कूल बताए गए हैं, जहां छात्र संख्या 30 या उससे कम है। इनमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूल शामिल हैं। कम छात्र संख्या के कारण कई स्कूलों के अस्तित्व पर सवाल खड़े हुए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल छात्र संख्या का नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा ढांचे और संसाधनों के असंतुलन का भी मुद्दा है।
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