फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Friendship with India's enemy proved costly for Turkey, loss of thousands of crores estimated in these areas

Turkey: तुर्किये को महंगी पड़ी भारत के दुश्मन से दोस्ती, इन क्षेत्रों में हजारों करोड़ के नुकसान का अनुमान

Thu, 22 May 2025 07:40 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 22 May 2025 07:40 PM IST
सार

पाकिस्तान से दोस्ती तुर्किये को बहुत महंगी पड़ रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान का खुला साथ देने के कारण भारतीयों ने तुर्किये के उत्पादों का बहिष्कार कर दिया। यहीं नहीं लोगों ने तुर्किये की यात्राओं को भी टाल दिया है। 

विज्ञापन
Friendship with India's enemy proved costly for Turkey, loss of thousands of crores estimated in these areas
राष्ट्रपति तैयब अर्दोआन - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के दुश्मन पाकिस्तान से दोस्ती तुर्किये को बहुत महंगी पड़ रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान का खुला साथ देने के कारण भारतीयों ने तुर्किये के उत्पादों का बहिष्कार कर दिया। देश की एक दर्जन से अधिक बड़ी मंडियों ने तुर्किये के सेब सहित सभी फलों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया जिससे तुर्किये को भारी चोट पहुंची है। पिछले वर्ष तुर्किये में करीब 3000 करोड़ खर्च करने वाले भारतीयों में आधे से ज्यादा पर्यटकों ने तुर्किये की यात्रा का अपना प्लान कैंसिल कर दिया जिससे तुर्किये को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके अलावा देश की बड़ी शिक्षण संस्थाओं आईआईटी बांबे, जामिया, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय और जेएनयू ने तुर्किये से अपने अनुबंध तोड़ लिए हैं जिससे वहां छात्रों का बड़ा नुकसान हुआ है।      
विज्ञापन


फल के व्यापार में लगी सबसे बड़ी चोट 
तुर्किये के सेब देखने में बहुत सुंदर, बड़े और स्वादिष्ट होते हैं। यही कारण है कि भारत के उच्च वर्ग के बीच ये खासे लोकप्रिय थे। लेकिन पाकिस्तान का समर्थन करने के बाद फल विक्रेताओं ने तुर्किये के सेब का बहिष्कार कर दिया। अब ये सेब बाजार से गायब हो चुका है। व्यापारियों के दो सबसे बड़े संगठन कैट और सीटीआई ने सबसे पहले तुर्किये के साथ व्यापार का बहिष्कार किया था। उसके बाद देश के हर हिस्से से तुर्किये के फलों-कपड़ों का बहिष्कार किया जाने लगा। 
विज्ञापन


यूपी के साहिबाबाद को फल बाजार के मामले में सबसे बड़ी मंडियों में से एक माना जाता है, लेकिन साहिबाबाद मंडी ने तुर्किये के फलों के पूर्ण बहिष्कार की घोषणा कर दी है। इसके अलावा उत्तराखंड के हरिद्वार, यूपी के प्रयागराज, राजस्थान के अलवर फल बाजार, पुणे फल व्यापारी संघ और मध्य प्रदेश के ग्वालियर के फल बाजार ने भी तुर्किये का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तुर्किये के सेबों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने भी घोषणा की है कि उनसे जुड़े ट्रक ऑपरेटर्स तुर्किये के सामानों की आवाजाही के लिए अपने ट्रकों की सेवाएं नहीं देंगे। यानी यदि कोई व्यापारी तुर्किये के फल लाने की कोशिश भी करेगा तो उसे अपना सामान ले जाने के लिए ट्रक उपलब्ध नहीं होंगे।  

कपड़ों के बाजार पर भी चोट     
ऑनलाइन कपड़े बेचने वाली प्रमुख कंपनी 'एजियो' ने पाकिस्तान का समर्थन करने के कारण तुर्किये के ब्रांड्स के कपड़ों की अपने यहां बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। इसी तरह भारत में कपड़ों की खरीद के लिए सबसे प्रसिद्ध ब्रांड्स में से एक 'मंत्रा' ने भी तुर्किये के कपड़ों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया। देश के आवासीय इकाइयों में मार्बल का उपयोग खूब जमकर किया जाता है। लेकिन मार्बल के व्यापार में अग्रणी भूमिका निभाने वाले उदयपुर के मार्बल ट्रेडर्स ने तुर्किये के मार्बल बाजार का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है।

पर्यटकों ने किया बहिष्कार  
तुर्किये जाने वाले पर्यटकों में एक बड़ी संख्या भारत से जाने वाले पर्यटकों की होती थी। पिछले वर्ष ही करीब 3.3 लाख भारतीय पर्यटकों ने तुर्किये की यात्रा की थी। तुर्किये जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में हर साल 15 से 20 फीसदी की वृद्धि भी हो रही थी। लेकिन अब भारतीय पर्यटकों और पर्यटन कराने वाली एजेंसियों ने तुर्किये का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है। बहिष्कार के पहले सप्ताह में ही तुर्किये के आधे से ज्यादा बुकिंग कैंसिल कर दी गई। 

हजारों करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान
गुजरात के 800 से ज्यादा टूरिस्ट एजेंसियों के संगठन जैन लोटस ग्रुप और आईक्सिबो ने तुर्किये का बहिष्कार कर दिया है। ईजी माई ट्रिप, कॉक्स एंड किंग्स, पिक योर ट्रेल, गो होम स्टेज, वंडर ऑन और कई अन्य बडी़ ट्रैवल एजेंसियों ने भी तुर्किये का पूर्ण बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है। इससे तुर्किये के टूरिस्ट स्पॉट और होटल खाली पड़े हुए हैं।

एक अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, तुर्किये जाने वाले भारतीयों ने पिछले साल करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च किए थे। जिस तरह लोगों ने तुर्किये के लिए अपनी यात्राएं रद्द की हैं, उससे अनुमान है कि अकेले पर्यटकों के न जाने के कारण ही तुर्किये को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कई उच्च भारतीय धनाड्य परिवार हर साल तुर्किये में शादियों में सैकड़ों करोड़ रुपये का खर्च करते थे। औसतन वे इसमें 25 से 66 करोड़ रुपये तक खर्च करते थे। लेकिन इस वर्ष तुर्की को इसका नुकसान उठाना पड़ा है।    

शूटिंग करने वालों की पसंद नहीं रहा तुर्किये
तुर्किये भारतीय फिल्म निर्माताओं के लिए बहुत आकर्षक जगह रही है, लेकिन अब भारतीय फिल्म निर्माताओं के बड़े संगठन दि फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) ने तुर्किये का पूर्ण बहिष्कार करने का फैसला किया है। इसका भी बड़ा असर तुर्किये के होटल-रेस्टोरेंट और टूरिस्ट स्पॉट वाली जगहों पर पड़ा है। 

शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा नुकसान
देश की कई नामचीन शिक्षण संस्थाओं ने तुर्किये की शिक्षण संस्थाओं के साथ अनुबंध कर तुर्किये के छात्रों को बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास किया था। लेकिन पाकिस्तान से छिड़े विवाद के बाद इन संस्थाओं ने तुर्किये की शिक्षण संस्थाओं से सारे संबंध तोड़ लिए हैं। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में देश के सबसे प्रसिद्ध संस्थाओं में से एक आईआईटी बॉम्बे ने तुर्किये के विश्वविद्यालयों से अपने सभी अनुबंध तोड़ दिए। 

इसके अलावा देश का प्रमुख विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, एलपीयू, जामिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ शिक्षण संस्थानों ने भी तुर्किये से अपने सारे अनुबंध तोड़ दिए हैं। इसके कारण तुर्किये के छात्रों का बड़ा नुकसान हुआ है।     

भारत ने दिखाई अपनी व्यापारिक ताकत- एक्सपर्ट 
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि दुनिया के सभी देश आवश्यकता पड़ने पर अपनी व्यापारिक ताकत का उपयोग करते हैं। कई बार सामरिक उपयोग की वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित कर तो कभी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की उपलब्धता घटाकर अनेक देश अपनी ताकत दिखाने का काम करते हैं। 


उन्होंने कहा कि भारत में केंद्र सरकार ने इस तरह की कोई अपील नहीं की थी, लेकिन इसके बाद भी नागरिकों की ओर से स्वतः स्फूर्त तुर्किये का बहिष्कार करने की घोषणा हुई। इससे तुर्किये को बड़ी चोट पहुंची है। नागरिकों की इस अपील ने दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि भारत के साथ दुश्मनी करने वालों या उसके दुश्मनों का साथ देने वालों को  इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति अब भारत की बड़ी ताकत में तब्दील होती दिख रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed