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Emmanuel Macron: एआई समिट में भारत के डिजिटल सिस्टम की गूंज, मैक्रों ने कहा- दुनिया में कहीं नहीं है ऐसा मॉडल

Thu, 19 Feb 2026 10:29 AM IST
पवन पांडेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 19 Feb 2026 10:29 AM IST
सार

Emmanuel Macron At AI Impact Summit: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के डिजिटल सिस्टम की तारीफ की है। इस दौरान उन्होंने डिजिटल आईडी, डिजिटल लेन-देन और डिजिटल हेल्थ आईडी को जमकर सराहा है। पढ़ें, फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने और क्या कुछ कहा...

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French Prez Macron At AI Impact Summit Namaste greetings praised India for speedy changes know hindi news
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में फ्रांसीसी राष्ट्रपति का संबोधन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने संबोधन की शुरुआत - नमस्ते शब्द के साथ की। इस दौरान उन्होंने कहा- इस शानदार शहर में, इस शानदार देश में हमारा स्वागत करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। प्रधानमंत्री जी, आपके द्वारा होस्ट किए गए इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट में आकर बहुत अच्छा लग रहा है।'
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फ्रांस के राष्ट्रपति ने सुनाया मुंबई का किस्सा
इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक दिलचस्प कहानी सुनाई। उन्होंने मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर का जिक्र कर भारत के डिजिटल बदलाव के बारे में सबको बताया। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति एक दशक पहले बैंक अकाउंट नहीं खोल पाता था, वह अब आसानी से ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करता है। यह सिर्फ एक टेक कहानी नहीं है। यह एक सिविलाइजेशन की कहानी है।
 
भारत के डिजिटल सिस्टम के मुरीद हुए मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस दौरान कहा कि भारत ने ऐसा डिजिटल सिस्टम बनाया है, जो दुनिया में किसी और देश ने नहीं बनाया। उन्होंने बताया कि भारत ने 140 करोड़ लोगों के लिए डिजिटल पहचान (आईडी) बनाई है। भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम हर महीने करीब 20 अरब लेन-देन करता है। इसके साथ ही भारत ने 50 करोड़ लोगों को डिजिटल हेल्थ आईडी भी जारी की है। मैक्रों ने कहा कि इन सबको मिलाकर एक व्यवस्था बनी है। यह एक खुला और जुड़ा हुआ डिजिटल सिस्टम है और यही इस सम्मेलन का मुख्य विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब डिजिटल क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने के नए दौर की शुरुआत पर खड़ी है।
 

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पेरिस एआई एक्शन समिट का भी किया जिक्र
उन्होंने आगे कहा कि, 'पिछले साल जब फ्रांस और भारत ने पेरिस में एआई एक्शन समिट की सह-मेजबानी की थी, तब हमने उन तकनीकों के लिए एक वैश्विक मार्गदर्शक सिद्धांत निर्धारित किया था जो हमारे समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को बदल देंगी। हमारा मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता को तेजी से नवाचार करने, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, परिवहन, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम बनाएगी, जो मानव जाति के हित में होगा। हम दोनों इस क्रांति में विश्वास करते हैं। एआई रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक प्रमुख क्षेत्र बन गया है, और बड़ी तकनीकी कंपनियां और भी बड़ी हो गई हैं।'

 
उन्होंने कहा, 'पिछले एक साल में एआई स्ट्रेटजिक कॉम्पिटिशन का फील्ड बन गया है, लेकिन इनोवेशन, आत्मनिर्भरता और स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी पर फोकस करने वाला एक रास्ता अभी भी बना हुआ है। भारत ने छोटे, टास्क-स्पेसिफिक लैंग्वेज मॉडल विकसित करके और स्टार्टअप्स का समर्थन करने के लिए सस्ती दरों पर 38,000 सरकारी फंडेड जीपीयूएस लगाकर सॉवरेन चॉइस बनाई हैं।'

'एआई का खेल सिर्फ बड़े लोग ही खेल सकते हैं'
आखिर में मैक्रों ने कहा, 'मैंने मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर की कहानी से शुरुआत की थी। दस साल पहले, दुनिया ने भारत से कहा था कि 1.4 बिलियन लोगों को डिजिटल इकॉनमी में नहीं लाया जा सकता। भारत ने उन्हें गलत साबित कर दिया। आज कुछ लोग कहते हैं कि एआई एक ऐसा खेल है जिसे सिर्फ बड़े लोग ही खेल सकते हैं।' राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, 'भारत, फ्रांस, यूरोप और हमारे पार्टनर्स, जो हमारे तरीके में विश्वास करते हैं, कंपनियों, सरकारों और निवेशकों के साथ मिलकर एक अलग तरीका अपना सकते हैं। एआई का भविष्य वे लोग बनाएंगे जो इनोवेशन और जिम्मेदारी और तकनीक को इंसानियत के साथ जोड़ेंगे, और भारत और फ्रांस मिलकर इस भविष्य को बनाने में मदद करेंगे।'

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