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महाराष्ट्र में 8वीं कक्षा की मराठी पुस्तक में बड़ी चूक, क्रांतिकारी सुखदेव की जगह छपा कुर्बान हुसैन का नाम
Fri, 17 Jul 2020 08:36 PM IST
Rajeev Rai
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: Rajeev Rai
Updated Fri, 17 Jul 2020 08:36 PM IST
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मराठी बाल भारती
- फोटो : social media
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महाराष्ट्र में 8वीं कक्षा की मराठी बाल भारती पुस्तक में बड़ी चूक सामने आई है। देश के लिए फांसी पर लटकने वाले बलिदानी सुखदेव की जगह पुस्तक में कुर्बान हुसैन का नाम छापा गया है। लेकिन, आश्चर्यजनक रूप से बाल भारती ने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया है। इससे सूबे में नया विवाद पैदा हो गया है।
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव का बलिदान सर्वविदित है। इन क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार की नींव हिला दी थी। ब्रिटिश सरकार ने तीनों को फांसी पर लटका दिया था। बाल भारती के निदेशक विवेक गोसावी ने कहा कि प्रसिद्ध लेखक यदुनाथ थत्ते ने अपनी प्रतिज्ञा पुस्तक में मेरे देश पर मेरा प्रेम है पाठ्यक्रम में सुखदेव का जिक्र नहीं किया है। बाल भारती की तरफ सुखदेव का नाम नहीं हटाया गया। इसलिए बाल भारती की कोई गलती नहीं है। गोसावी ने कहा कि भाषा विषय में किसी भी लेखक का लेख जस का तस छापा जाता है उसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाता। गोसावी ने कहा कि कुर्बान हुसैन भी क्रांतिकारी थे। स्वतंत्रता के इतिहास में भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव का नाम एक साथ लिया जाता है लेकिन थत्ते के लेख में सुखदेव का नाम नहीं है।
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कौन थे कुर्बान हुसैन
कुर्बान हुसैन महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पत्रकार थे। वे गजनफर नामक समाचार पत्र में स्वतंत्रता की लड़ाई, मजदूरों के मुद्दे और हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए लेख लिखा करते थे। अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में हुसैन को 12 जनवरी 1931 को फांसी दे दी गई थी। उस समय कुर्बान हुसैन की उम्र 22 साल थी।
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फडणवीस के कार्यकाल की है बाल भारती पुस्तक- सावंत
महाराष्ट्र कांग्रेस महासचिव व प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि बाल भारती के जिस पाठ्यक्रम को लेकर विवाद शुरू किया गया है वह पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के कार्यकाल की है। यह मराठी भाषा की पुस्तक है इतिहास की नहीं। कुर्बान हुसैन भी देश के लिए फांसी पर चढ़ें हैं। अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की तरह उनपर भी अभिमान होना चाहिए।