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Maharashtra: मुंबई हाई कोर्ट से पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर को मिली राहत, अब बुधवार को होगी सुनवाई

Mon, 04 Sep 2023 04:28 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: श्वेता महतो Updated Mon, 04 Sep 2023 04:28 PM IST
सार

पीठ ने मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए टाल दिया है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पेडनेकर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाघड़ी) और धारा 120(बी) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया था।

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Former Mayor Kishori Pednekar gets relief from Bombay High Court now hearing will be held on Wednesday
किशोरी पेडनेकर - फोटो : ANI

विस्तार

मुंबई के पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर को कोविड-19 पीड़ितों के लिए बॉडी बैग की खरीद में घोटाले मामले से सोमवार को तत्काल राहत मिल गई है। पुलिस ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि इस मामले में वे उन्हें दो दिनों तक गिरफ्तार नहीं करेंगे। पिछले हफ्ते एक सत्र अदालत द्वारा पेडनेकर की पूर्व गिरफ्तारी जमानत याचिका खारिज करने के बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 
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न्यायाधीश एन जे जमादार की एकल पीठ ने पूर्व मेयर पेडनेकर की याचिका पर सुनवाई की। पेडनेकर के वकील राहुल अरोटे ने कोर्ट में कहा कि वह (पेडनेकर) एक पूर्व मेयर है और उनपर इस मामले को लेकर गिरफ्तारी की आशंका है। 
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पीठ ने मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए टाल दिया है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पेडनेकर और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाघड़ी) और धारा 120(बी) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया था। यह शिकायत भाजपा नेता किरीट सोमैया ने दर्ज करवाई थी। 
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पूर्व मेयर के खिलाफ यह कोविड-19 केंद्रों में हुए घोटाले से जुड़ा मामला है, जिसमें धन की हेराफेरी, कोविड महामारी के दौरान बीएमसी द्वारा मृतक कोरोनोवायरस रोगियों के लिए बॉडी बैग, मास्क और अन्य वस्तुओं की खरीद में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है। 

अपने पूर्व गिरफ्तारी जमानत याचिका में पेटनेकर ने दावा किया था कि उन्हें केस में फंसाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिवसेना पार्टी के टूटने के बाद उनपर निशाना साधा जा रहा है, क्योंकि वह उद्धव ठकरे गुट की नेता है। पेडनेकर नवंबर 2019 से मार्च 2022 तक मेयर पद पर रहे। 


हाईकोर्ट ने गणपति विसर्जन की मांगी जानकारी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को बीएमसी से 10 दिनी गणपति उत्सव को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि विसर्जन की क्या पर्यावरण-अनुकूल तरीके अपनाए जाएंगे। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ एनजीओ वनशक्ति द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एनजीओ ने याचिका में आरे कॉलोनी के अंदर जल निकायों में मूर्तियों के विसर्जन के लिए नागरिक निकाय द्वारा दी गई अनुमति को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि हमें यह समझ नहीं आ रहा है कि निगम द्वारा विसर्जन की अनुमति देने के लिए पत्र कैसे जारी किए गए। बीएमसी कैसे इसे विसर्जन स्थल के रूप में उल्लेखित सकती है। कोर्ट ने अगली सुनवाई आठ सितंबर को तय की है। 
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