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Aditya-L1: नंबी नारायणन ने आदित्य-एल1 के महत्व पर की चर्चा, अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी पर कही यह बात

Mon, 28 Aug 2023 09:28 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 28 Aug 2023 09:28 PM IST
सार

नंबी नारायणन ने कहा कि यदि आप इसरो-एसीपी (ISRO-ACP) सहभागिता को देखें, तो यदि हमारे पास पर्याप्त फंडिंग है, तो हमें उस सहभागिता के लिए आगे क्यों बढ़ना चाहिए?  पैसों की कमी के कारण सहभागिता की शुरुआत ही हुई।

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Former ISRO scientist Nambi Narayanan explains the importance of India first solar mission Aditya-L1
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन। - फोटो : वीडियो स्क्रीनग्रैब@ANI

विस्तार

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 के महत्व के बारे में चर्चा की। आदित्य-एल1 को दो सितंबर को श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट से लॉन्च किया जाएगा। न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बाचतीत में नंबी नारायण ने कहा, प्लानेट, स्टार या गैलैक्सी के संबंध में किया गया कोई भी रिसर्च कुछ न कुछ इनपुट जरूर देता है, हम अभी सीखने की अवस्था में हैं और हम चंद्रमा पर लैंड करने में सफलता पाने वाले देश बन गए हैं।

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नंबी नारायणन ने आगे कहा कि यदि आप इसरो-एसीपी (ISRO-ACP) सहभागिता को देखें, तो यदि हमारे पास पर्याप्त फंडिंग है, तो हमें उस सहभागिता के लिए आगे क्यों बढ़ना चाहिए?  पैसों की कमी के कारण सहभागिता की शुरुआत ही हुई। बहुत से लोग नहीं जानते, वे इसे किसी न किसी तरह राजनीतिक दृष्टि से देखते हैं। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि हमारे पास पैसे नहीं थे। मैं आपको बता सकता हूं कि मेरी परियोजना तरल प्रणोदन प्रणाली (Liquid Propulsion System) पैसे की कमी के कारण खराब हो गई। हालांकि इसरो के चेयरमैन चाहते थे कि ये पैसा मुहैया कराया जाए, लेकिन उन्हें पैसा नहीं मिल सका। इसलिए यह सच था, लेकिन मैं किसी सरकार को दोष नहीं देता।
 

नंबी नारायण ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में निजी साझेदारी पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, 'यह एक अच्छी स्थिति है क्योंकि जब निजी कंपनी सामने आएंगे तो उन्हें फंडिंग ढूंढनी होगी। आपको सरकार से फंडिंग नहीं लेनी पड़ेगी। मुझे लगता है कि करदाताओं से हमेशा के लिए टैक्स नहीं लिया जाना चाहिए... हमें विभिन्न एजेंसियों से पैसा इकट्ठा करना चाहिए जो इसमें अपना फायदा देखती हों।
 


जी माधवन नायर ने सौर मिशन को लेकर कही यह बात
वहीं, आदित्य एल1 सौर मिशन को लेकर इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर ने कहा कि अंतरिक्ष यान को ऐसे बिंदु पर रखना जहां पृथ्वी और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र मेल खाता हो, कम खर्चीला होगा।
यह सूर्य का निरंतर अवलोकन करेगा।
 
नासा की पूर्व वैज्ञानिक मिला मित्रा ने दी यह जानकारी
आदित्य एल1 सौर मिशन के बारे में जानकारी देते हुए नासा की पूर्व वैज्ञानिक मिला मित्रा ने कहा, इसरो का अगला मिशन आदित्य-एल1 है, आदित्य का अर्थ ही सूर्य है, इसलिए यह मिशन सूर्य का निरीक्षण करना है...एल-1 शब्द सूर्य और पृथ्वी के बीच लैग्रेंजियन बिंदु है। ऐसे कई लैग्रेंजियन बिंदु हैं जो पृथ्वी और सूर्य के बीच की रेखा पर हैं, एल-1 भी पृथ्वी और सूर्य के बीच की रेखा पर है, यह बिंदु बहुत स्थिर है क्योंकि सूर्य का गुरुत्वाकर्षण और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण दोनों उस बिंदु पर पहुंचते हैं।


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