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सुझाव: पूर्व सूचना आयुक्त ने कहा- देश की सभी अदालतों में होनी चाहिए वर्चुअल सुनवाई

Mon, 12 Apr 2021 02:29 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 12 Apr 2021 02:29 AM IST
सार

  • देश में लगभग 20 हजार अदालतें हैं
  • प्रत्येक कोर्ट में हार्डवेयर पर 10 लाख रुपये खर्च किए गए
  • महामारी के दौरान ज्यादातर अदालतों में वर्चुअल सुनवाई प्रभावी ढंग से नहीं हुई

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Former Information Commissioner said: Virtual courts should be held in all the courts of India
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने वर्चुअल सुनवाई को न्यायिक प्रणाली में स्थायी बनाने की वकालत की है। गांधी ने कहा कि 2005 से सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी की उपलब्धियां नाकाफी रही हैं। कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष प्रस्ताव रखते हुए गांधी ने कहा, कमेटी द्वारा बनाई गई मसौदा रिपोर्ट में पहले के प्रयासों व सिफारिशों के प्रभाव के वास्तविक मूल्यांकन का अभाव है। 

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पूर्व सीआईसी ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली कमेटी को दिया सुझाव 
गांधी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी 2005 से है और विभिन्न अदालतों में सूचना व संचार तकनीक आधारित सिस्टम लागू करने में कुल 2,310 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अगर सॉफ्टवेयर व कंसल्टेंसी पर 309.411 करोड़ रुपये खर्च किए गए तो इसका मतलब दो हजार करोड़ रुपये हार्डवेयर पर खर्च किए गए।
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देश में लगभग 20 हजार अदालतें मानें तो इसका मतलब है कि प्रत्येक कोर्ट में हार्डवेयर पर 10 लाख रुपये खर्च किए गए। यह पर्याप्त से अधिक होना चाहिए, इसके बावजूद महामारी के दौरान ज्यादातर अदालतों में वर्चुअल सुनवाई प्रभावी ढंग से नहीं हुई।
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गांधी ने कहा, कमेटी जहां कुछ वर्चुअल कोर्ट स्थापित करने की बात करती है, मेरा सुझाव है कि सभी अदालतों में प्रभावी वर्चुअल कोर्ट होने चाहिए। इसके लिए किसी विशेष ट्रेनिंग की भी आवश्यकता नहीं है, सिर्फ कीबोर्ड इस्तेमाल करने आना चाहिए, जो किसी भी शिक्षित व्यक्ति के लिए सामान्य कौशल है।

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