पूर्व आईएएस ने ब्रेन रिसर्च के लिए मौत से पहले दान किया घर
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शरवरी गोखले अपनी 36 साल की सेवा में अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) के पद पर थीं। कैंसर के कारण उन्हें समय से पहले रिटायरमेंट लेना पड़ा था। उनके बेहद करीबी और महाराष्ट्र के पूर्व गृह सचिव चंद्रा अयंगर ने बताया कि शरवरी पिछले तीन सालों से अपना इलाज करा रही थीं। छह से सात महीने पहले उन्होंने अपनी पूरी पूंजी किसी नेक काम में खर्च करने का फैसला किया। शरवरी के अमेरिका में रहने वाले भाई जगदीश ने शोध संस्थान को फ्लैट दान देने के पीछे उनके (शरवरी) विज्ञान के प्रति आकर्षण को कारण बताया।
'पैसे का बेहतर इस्तेमाल हो और ज्यादा से ज्यादा शोध के काम को बढ़ावा मिले'
पूर्व पुलिस कमिश्नर मीरन वोरवनकर ने बताया कि गोखले की एक मित्र ने उन्हें किसी एनजीओ को सामाजिक सेवा के लिए दान करने की सलाह दी थी लेकिन वह अपनी संपत्ति सीबीआर को ही देना चाहती थीं। वह चाहती थीं कि उनके पैसे का बेहतर इस्तेमाल हो और ज्यादा से ज्यादा शोध के काम को बढ़ावा मिल सके।
गोखले के एक अन्य पूर्व सहयोगी लीना का कहना है कि जीवन को लेकर शरवरी का एक अलग नजरिया रखती थी। उनकी सोच उन्हें भीड़ से अलग करने वाली थी। गोखले के इस कदम की सराहना करते हुए सीबीआर ने कहा कि यह सहयोग उनके मानवतावादी सोच को दर्शाता रहेगा। मानव मस्तिष्क की आयु संबंधित दिक्कतों को समझने में उनकी यह सौगात मददगार साबित होगी।