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फिर कोई दूसरा फिदेल कास्त्रो नहीं होगा

Sun, 27 Nov 2016 07:27 AM IST
नटवर सिंह (पूर्व विदेश सचिव)
नटवर सिंह (पूर्व विदेश सचिव) Updated Sun, 27 Nov 2016 07:27 AM IST
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Former foreign secretary Natwar Singh on Fidel Castro
फिदेल कास्त्रो - फोटो : Getty Images
क्यूबा, इसे देश नहीं छोटा सा एक टापू कहिए। दुनिया में इस टापू की पहचान कभी और किसी के आगे न झुकने की है। क्यूबा को यह गर्वीली पहचान महान शख्सियत, दुनिया में समाजवाद की स्थापना केलिए निरंतर संघर्ष करने वाले फिलेद कास्त्रो ने दी। वही कास्त्रो जिसने दुनिया के छोटे-छोटे देशों को बताया कि स्वाभिमान के साथ जीना किसे कहते हैं। कैसे एक छोटा सा देश दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका से आधी सदी तक लोहा ले सकता है। 
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आधी सदी तक आर्थिक प्रतिबंध झेलने वाले देश को स्वास्थ्य, चिकित्सा, उद्योग और कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाईयां दिला कर जीवित रहते किवदंती बने। इसलिए मैं कहता हूं कि दुनिया में अब कोई दूसरा फिदेल कास्त्रो पैदा नहीं होगा। 
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यूं तो बतिस्ता की तानाशाह सरकार को साल 1959 में ही उखाड़ फेंकने के बाद से ही फिदेल भारत के शुभचिंतकों में शुमार रहे। गुट निरपेक्षता का सिद्घांत विकसित करने वाले अपने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से उनकी निकटता जगजाहिर है। देश की पहली महिला पीएम इंदिरा गांधी को तो वह बहन मानते थे। 
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जहां तक मेरा सवाल है तो मेरा उनके साथ सामना बीती सदी के 80 के दशक में तब हुआ जब कास्त्रो साल 1983 के मार्च महीने में 7वें गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए। इसी सम्मेलन में मैंने जाना कि फिदेल विवाद का निपटारा किस खूबसुरती से करते हैं। 

उद्घाटन समारोह में उस समय तनावपूर्ण वातावरण पैदा हो गया जब जॉर्डन को मिस्र से पहले बोलने का मौका दिए जाने से नाराज यासर अराफात ने स्वदेश कूच करने की तैयारी कर ली। इस फैसले से जाहिर तौर पर मैं हक्का बक्का था। मैंने इसकी सूचना इंदिराजी के साथ-साथ कास्त्रो को दी। 

यासिर अराफात को मनाने की जिम्मेदारी

Former foreign secretary Natwar Singh on Fidel Castro
फाइल फोटोः नटवर सिंह - फोटो : Getty Images
फिर इंदिरा जी ने कास्त्रो को अराफात को मनाने का जिम्मा सौंपा। दोनों अलग जगह बैठे और कास्त्रो ने अराफात से पूछा कि क्या वह इंदिरा को अपना मित्र मानते हैं। इस पर अराफात बोले वह तो मेरी बड़ी बहन हैं। फिर कास्त्रो तपाक से बोले फिर आपको छोटे भाई की तरह व्यवहार करना चाहिए। 

इसके साथ ही सारा तनाव छूमंतर हो गया। इसके बाद मेरी उनके कई मुलाकातें हुई। हर मुलाकात में मैं उन्होंने और अधिक ऊर्जावान पाया। दुनिया के बेसहारा और गरीबों के लिए हमेशा से कुछ नया करने की उनकी भूख कभी मरी नहीं।

दरअसल फिदेल इसलिए महान नहीं थे कि उन्होंने आधी सदी तक एक देश पर राज किया। वह इसलिए महान थे कि उन्होंने दुनिया को स्वाभिमान से जीना सिखाया। उन्होंने दुनिया को क्यूबा के जरिए यह बताया कि कैसे एक समाजवादी व्यवस्था की स्थापना की जाती है। 

उन्होंने दुनिया को यह भी बताया कि कैसे एक छोटा सा देश दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश से अपने स्वाभिमान की सफलता और गर्व के साथ रक्षा कर सकता है। जरा सोचिए वह फिदेल ही थे, जिन्होंने अमेरिका जैसे सर्वशक्तिशाली देश से आधी सदी तक लोहा लिया। फिर अमेरिका को अपनी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर किया और राष्ट्रपति बनने के बाद बराक ओबामा को क्यूबा जा कर फिदेल की तारीफ में कसीदे पढ़ने पड़े।

हिमांशु मिश्र से बातचीत पर आधारित
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