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Maharashtra: बिल्डरों को दी सरकारी जमीनों की जांच की मांग, अजित पवार पर सवाल; पूर्व IPS बोरवणकर ने कही यह बात

Mon, 16 Oct 2023 10:08 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: आदर्श शर्मा Updated Mon, 16 Oct 2023 10:08 PM IST
सार

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार पर बिल्डरों को आंवटित भूमि में हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया है। सोमवार को बोरवणकर ने कहा, बिल्डरों को दी गई सरकारी जमीनों की समीक्षा करने की जरूरत है। 

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former cop Borwankar says govt land transfers to builders must be reviewed, allegation on ajit pawar
अजित पवार - फोटो : फेसबुक/अजित पवार

विस्तार

पूर्व आईपीएस मीरान चड्ढा बोरवणकर की किताब में छिपी एक अंश को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार पर बिल्डरों को आंवटित भूमि में हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया है। सोमवार को बोरवणकर ने कहा, बिल्डरों को दी गई सरकारी जमीनों की समीक्षा करने की जरूरत है। इसमें राजनेताओं, बिल्डरों, नौकरशाहों और पुलिस के बीच सांठगांठ हैं। उन्होंने अपनी किताब में दावा किया कि पुणे के तत्कालीन जिला मंत्री (अजित पवार) ने 2010 में पुलिस की तीन एकड़ जमीन एक बिल्डर को सौंपने पर जोर दिया था। 
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किताब में बोरवणकर ने दावा किया कि उन्होंने बिल्डर को जमीन सौंपने का विरोध किया था, जिसे 2जी टेलीकॉम घोटाले में सीबीआई द्वारा आरोपी बनाया गया था। यह पूछे जाने पर कि अगर वह अपने आरोपों को साबित करने में विफल रहीं तो अजित पवार का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गुट उन्हें मानहानि मामले का नोटिस भेजने की सोच रहा है। बोरवंकर ने कहा कि वे ऐसा कर सकते हैं।
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पुणे के पूर्व पुलिस आयुक्त ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किताब किसी ने नहीं पढ़ी है। बिना किताब पढ़े हेडलाइन दे दी गई कि पुलिस की जमीन अजित पवार ने नीलाम कर दी। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हुआ। तत्कालीन डिविजनल कमिश्नर (दिलीप बंड) ने जिम्मेदारी ली है कि जमीन उनके द्वारा नीलाम की गई थी।
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अजित पवार ने किया खंडन
इस बीच अजित पवार ने आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उपमुख्यमंत्री के कार्यालय ने एक बयान में यह भी कहा कि जिले के संरक्षक मंत्रियों को जमीन खरीदने का अधिकार नहीं है। इसलिए सरकारी जमीन बेची नहीं जा सकती। ऐसे मामले राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखने से पहले राजस्व विभाग के पास जाते हैं। मंत्रिमंडल इस पर अंतिम फैसला लेती है। मेरा इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे किसी दबाव की परवाह नहीं है। ऐसे मामलों में मैं हमेशा सरकारी नियमों का पालन करता हूं। अथॉरिटी से इस मामले की जांच करा सकते हैं।
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