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Collegium: पूर्व चीफ जस्टिस यूयू ललित का कॉलेजियम पर बड़ा बयान, बोले- सर्वसम्मति से ही भेजें दोबारा नाम
Sat, 18 Feb 2023 12:03 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sat, 18 Feb 2023 12:03 PM IST
सार
इसके पहले 11 फरवरी को भी रिटायर्ड जस्टिस यूयू ललित का कॉलेजियम को लेकर बयान आया था। उनसे पूछा गया था कि क्या कॉलेजियम सिस्टम को बदलने की जरूरत है। इसपर उन्होंने कहा कि इसका उत्तर इतना आसान नहीं है।
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पूर्व सीजेआई यूयू ललित
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को लेकर भारत के पूर्व चीफ जस्टिस यूयू ललित का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा, 'शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई प्रारंभिक सिफारिश में सर्वसम्मत की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, इसे बहुमत से पास कर सकते हैं लेकिन अगर किसी नाम को दोबारा भेजा जा रहा है तो यह जरूरी है कि उस नाम पर सभी की सहमति हो।
कॉलेजियम को लेकर दिया था बयान
इसके पहले 11 फरवरी को भी रिटायर्ड जस्टिस यूयू ललित का कॉलेजियम को लेकर बयान आया था। उनसे पूछा गया था कि क्या कॉलेजियम सिस्टम को बदलने की जरूरत है। इसपर उन्होंने कहा कि इसका उत्तर इतना आसान नहीं है। यदि आप इसके लिए कारण चाहते हैं तो मैं दस मिनट और लूंगा। हालांकि, समय की कमी के चलते वह अपना जवाब पूरा नहीं कर पाए।
चीफ जस्टिस ने इसी कार्यक्रम में जजों पर सरकार के दबाव को लेकर पूछे गए सवाल का भी जवाब दिया था। उनसे पूछा गया था कि क्या उन्होंने सीजेआई के तौर पर काम करते हुए कार्यपालिका पर दबाव को महसूस किया है? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'बिल्कुल नहीं। चीफ जस्टिस के रूप में न्यायाधीश होने के अलावा आपने जो अतिरिक्त कार्यभार धारण किया है वह प्रमुख होने का है। उनके अनुसार, वह बेंचों का गठन कर सकते हैं। मामलों को सूचीबद्ध कर सकते हैं। यह उनका विशेषाधिकार है। प्रशासनिक पक्ष निश्चित रूप से कॉलेजियम की बैठक है। वह वो है, जो बैठक बुलाता है, प्रस्ताव बनाता है कि न्यायाधीश कौन होगा आदि... '
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कॉलेजियम को लेकर दिया था बयान
इसके पहले 11 फरवरी को भी रिटायर्ड जस्टिस यूयू ललित का कॉलेजियम को लेकर बयान आया था। उनसे पूछा गया था कि क्या कॉलेजियम सिस्टम को बदलने की जरूरत है। इसपर उन्होंने कहा कि इसका उत्तर इतना आसान नहीं है। यदि आप इसके लिए कारण चाहते हैं तो मैं दस मिनट और लूंगा। हालांकि, समय की कमी के चलते वह अपना जवाब पूरा नहीं कर पाए।
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चीफ जस्टिस ने इसी कार्यक्रम में जजों पर सरकार के दबाव को लेकर पूछे गए सवाल का भी जवाब दिया था। उनसे पूछा गया था कि क्या उन्होंने सीजेआई के तौर पर काम करते हुए कार्यपालिका पर दबाव को महसूस किया है? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'बिल्कुल नहीं। चीफ जस्टिस के रूप में न्यायाधीश होने के अलावा आपने जो अतिरिक्त कार्यभार धारण किया है वह प्रमुख होने का है। उनके अनुसार, वह बेंचों का गठन कर सकते हैं। मामलों को सूचीबद्ध कर सकते हैं। यह उनका विशेषाधिकार है। प्रशासनिक पक्ष निश्चित रूप से कॉलेजियम की बैठक है। वह वो है, जो बैठक बुलाता है, प्रस्ताव बनाता है कि न्यायाधीश कौन होगा आदि... '
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