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G20:पूर्व राजदूत काटजू ने की नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन की तारीफ; कहा- भविष्य की कूटनीति के लिए शानदार उदाहरण

Sun, 17 Sep 2023 05:58 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 17 Sep 2023 05:58 PM IST
सार

काटजू ने कहा कि यूक्रेन में विभाजन की प्रबल भावना को देखते हुए अंतर को पाटना आसान नहीं था, लेकिन भारत ने इस मुद्दे पर आम सहमति बनाई। यूक्रेन मुद्दे पर पहले अंदेशा जताया जा रहा था कि सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाएगी। हालांकि भारत ने यह कर दिखाया।

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former Ambassador Vivek Katju Says G20 declaration textbook example for future diplomacy
G20 Summit - फोटो : Social Media

विस्तार

जी-20 शिखर सम्मेलन की शानदार मेजबानी और नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन (एनडीएलडी) को सर्वसम्मति के साथ स्वीकारे जाने के लिए भारत और पीएम मोदी के नेतृत्व की दुनियाभर में तारीफ हो रही है। इस बीच, पूर्व राजदूत विवेक काटजू ने भी इसकी सराहना की है। उन्होंने कहा कि भविष्य की कूटनीति के लिए G20 घोषणा बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने शनिवार को भारतीय महिला प्रेस कोर (IWPC) में G20 शिखर सम्मेलन पर एक पैनल चर्चा में भाग लेते हुए शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन मुद्दे से निपटने के लिए भारत की विशेष रूप से सराहना की।

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काटजू ने कहा कि यूक्रेन में विभाजन की प्रबल भावना को देखते हुए अंतर को पाटना आसान नहीं था, लेकिन भारत ने इस मुद्दे पर आम सहमति बनाई। यूक्रेन मुद्दे पर पहले अंदेशा जताया जा रहा था कि सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाएगी। हालांकि भारत ने यह कर दिखाया। काटजू ने कहा कि ये घोषणापत्र भविष्य की कूटनीति के लिए एक पाठ्यपुस्तक उदाहरण होगा। भारतीय महिला प्रेस कोर के शिखर सम्मेलन के पैनलिस्टों में पूर्व राजदूत केसी सिंह और राजीव डोगरा भी शामिल थे।
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आईडब्ल्यूपीसी ने इस शिखर सम्मेलम के बारे में एक बयान भी जारी किया। इसमें काटजू के हवाले से कहा कि जी20 में अफ्रीकी संघ को शामिल करना भारत द्वारा निभाई गई एक रचनात्मक भूमिका थी। जी20 का ध्यान अब दुनिया में स्थिरता लाने पर होना चाहिए। इस दौरान पूर्व राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी के मुद्दों और आतंकवाद पर बयानों को जी20 घोषणा में शामिल किए जाने के बावजूद, भ्रष्टाचार के उन्मूलन पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
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वहीं, नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन पर टिप्पणी करते हुए पूर्व राजदूत केसी सिंह ने कहा कि अमेरिकियों ने भारत को अपने साथ लाने के लिए कदम पीछे खींचे थे। जिससे चीन के खिलाफ अपने रुख को वह साफ कर सके। बहुपक्षीय संस्थानों के सुधारों को लेकर केसी सिंह ने कहा कि चीन 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण के साथ सबसे बड़ा कर्जदार है। इस दौरान उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट-एंड-रोड पहल को जवाब देगा। हालांकि उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर के कार्यान्वयन पर संदेह भी जताया। 


पूर्व राजदूत डोगरा ने जी20 की सफलता को स्वीकार करते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है कि हमने इस तरह का सफल आयोजन किया है। यह इतिहास खुद को दोहरा रहा है। इस दौरान उन्होंने भारत द्वारा अंकटाड और एनएएम (1983) की मेजबानी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि भारत की कूटनीति का बाधाओं पर काबू पाने का इतिहास रहा है।

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