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जमीन कब्जाने की खातिर दलित से बने मुस्लिम,  पुलिस ने जांच शुरू की 

Mon, 08 Oct 2018 12:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Mon, 08 Oct 2018 12:20 AM IST
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For the sake of grabbing land, Dalits made fake Muslim

जमीन कब्जाने के लिए साजिशकर्ता क्या-क्या साजिश नहीं रचते। ऐसा ही प्रकरण यहां जवां के रिगसपुरी की एक जमीन को देखने को मिल रहा है। यहां गांव छोड़कर हरियाणा जाकर बसे मेवाती परिवार की संपत्ति पर कब्जे की खातिर कुछ लोग दलित से मुस्लिम बन गए और इनमें दलित तो मृत व्यक्ति के नाम पर खुद आकर खड़ा हो गया। पहले इनकी फौरी शिकायत पर पुलिस ने भी फर्जीवाड़ा मानकर गांव के कुछ लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया। मगर जब मसला हाईकोर्ट गया और अदालत के आदेश पर खंड विकास अधिकारी ने जांच की तो असलियत सामने आ गई। 

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मामला भाजपा नेताओं तक पहुंचा तो वह भी हरकत में आ गए। अब पीड़ित पक्ष ने तथ्यों व खंड विकास अधिकारी की रिपोर्ट के साथ पुलिस से शिकायत की है। जिसमें धर्म बदलकर व मृत व्यक्ति के नाम पर खुद खड़े होकर जमीन कब्जाने की साजिश का आरोप है। भाजपा जिला महामंत्री गौरव शर्मा व डॉ. निशित शर्मा की मदद से यह शिकायत गांव के इलियास खां पुत्र अलीमुद्दीन की ओर से एसएसपी दफ्तर में दी गई है। जिस पर वहां मौजूद रहे सीओ तृतीय ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष जवां को एक सप्ताह में विस्तृत आख्या देने के निर्देश दिए हैं। ताकि आगे कार्रवाई की जा सके। 
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शिकायतकर्ता की मानें तो उसके गांव में रहने वाले मेवाती समाज के चाहत खां, अपनी पत्नी महरू निशा, बेटे रईस व भौंदा खां संग काफी समय पहले परिवार सहित गांव छोड़कर हरियाणा के नूह में जाकर बस गए। वहां पहुंचने के बाद चाहत खां, महरू निशा व भौंदा की मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के बाद चाहत के इकलौते वारिस बचे बेटे रईस खां ने यहां गभाना तहसील आकर वर्ष 2012 में अपने नाम आई पिता की संपत्ति का बैनामा रिगसपुरी के ही इलियास, इरशाद व आरिफ के नाम कर उन्हें बेच दी। इसके बाद वह भी वापस नूह चला गया।
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आरोप के अनुसार इस बैनामे के बाद गांव के ही एक मुस्लिम ने इस संपत्ति पर कब्जे की नीयत से साजिश रचते हुए हाथरस जनपद के रहने वाले दो दलितों को यहां लाकर उन्हें मृत भौंदा व जीवित रईस दिखाकर संपत्ति का असल मालिक व वारिस बताया। उनके नाम गांव के परिवार रजिस्टर में दर्ज कराकर उनकी ओर से बैनामा कराने वाले इलियास आदि पर फर्जी बैनामा कराने का मुकदमा गभाना थाने में दर्ज करा दिया। इसमें नामजद लोगों को अदालत से जमानत करानी पड़ी। बाद में वह लोग हाईकोर्ट गए और वहां से आदेश लेकर आए। इस आदेश पर खंड विकास अधिकारी धनीपुर ने जांच की, जिसमें परिवार रजिस्टर से चाहत खां के परिवार के नाम हटाने की संस्तुति की गई। 

फिर पीड़ितों ने खोजबीन कर पाया कि जो लोग खुद को मृत भौंदा व रईस बता रहे हैं। वह हाथरस जनपद के दलित हैं। वहां उनके गांव में उनके नाम, पते वोटर लिस्ट में दर्ज हैं। साथ ही यह पाया कि दलितों की बहन को भी मुस्लिम बनाकर यहां रिगसपुरी के ही दूसरे मुसलिम आरोपी ने शादी कर ली है। ताकि वह खुद को उनका बहनोई बता सके। इस तरह जमीन पर कब्जे के लिए यह साजिश रची गई है। शिकायत में दलितों के मूल पते के प्रधान के लिखित प्रमाण, वोटर लिस्ट व रिगसपुरी प्रधान की रिपोर्ट तक लगाई है। इसे लेकर सीओ तृतीय ने एसओ जवां को जांच के निर्देश दिए हैं।


इस प्रकरण के पीड़ित पक्ष से संपर्क होते ही पुलिस प्रशासन से मुलाकात कर उचित कार्यवाही की बात की गयी। यह प्रकरण स्पष्ट करता है कि किस प्रकार जनपद और आस पास के जिलों में धर्मांतरण की आड़ में दलित समुदाय को निशाना बना कर उन्हें फर्जीवाड़े और जमीन कब्जाने जैसे कृत्यों में प्यादा बनाया जा रहा है। यह एक बहुत ही गंभीर विषय है जो राष्ट्रविरोधी तत्वों के संरक्षण में चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी इस प्रकरण के सामाजिक न्याय और धर्मांतरण फर्जीवाड़े के विरुद्ध है । यह प्रकरण एक उदाहरण है समस्त समाज के लिए की ऐसे गिरोह से सतर्क रहें।
-डॉ. निशित शर्मा जिला प्रवक्ता भाजपा

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