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Hindi News ›   India News ›   Food safety: 348024 food samples were taken in two years; 44520 samples failed Rs 107 crore fine collected

Food safety: दो साल में खाद्य पदार्थों के 348024 नमूने लिए; 44520 सैंपल फेल, वसूला 107.35 करोड़ जुर्माना

Fri, 04 Apr 2025 02:41 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 04 Apr 2025 02:41 PM IST
सार

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने बताया, सरकार, सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर) में परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीआई) के माध्यम से जैविक खेती और सब्जियों सहित सभी कृषि और बागवानी फसलों को बढ़ावा दे रही है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (एमओवीसीडीएनईआर) योजना लागू की जा रही है।

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Food safety: 348024 food samples were taken in two years; 44520 samples failed Rs 107 crore fine collected
चिराग पासवान - फोटो : PTI

विस्तार

देश में खाद्य पदार्थों में कई तरह की कमियां देखने को मिल रही हैं। नमूनों के विश्लेषण में गैर अनुरूपता, असुरक्षित, घटिया क्वालिटी और लेबलिंग दोष आदि बातें सामने आई हैं। दो वर्ष में खाद्य पदार्थों के 348024 नमूने लिए गए। जब इनकी जांच हुई तो इनमें से 78434 नमूनों में गैर अनुरूपता यानी कमी मिली है। अपालन करने वाले नमूनों में असुरक्षित नमूनों की संख्या 13361 रही है। निम्नस्तीय नमूनों की संख्या 44520 है। लेबलिंग दोष और भ्रामक/विविध नमूने 20553 हैं। दीवानी मामलों में दोषसिद्धि की संख्या 58050 है। वसूला गया जुर्माना 107.35 करोड़ रुपया रहा है। आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि की संख्या 2349 है। वसूला गया जुर्माना 5.42 करोड़ रुपये है। वर्ष 2022-23 में 177511 नमूनों का विश्लेषण किया गया, जबकि 2023-24 में 170513 नमूनों की जांच हुई थी। 

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लोकसभा सदस्य मालविका देवी ने गुरुवार को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री से पूछा था कि सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए/उठाए जा रहे कदमों का ब्यौरा क्या है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उद्योगों द्वारा सब्जियों को जैविक तरीके से उगाए जाने को प्रोत्साहित किया और उसका उपयोग किया जाए। दूसरा सवाल पूछा गया कि सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए/उठाए जा रहे कदमों का ब्यौरा क्या है कि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त चीनी की वास्तवित मात्रा और उत्पाद विशेष में मौजूद चीनी के प्रकार का भी उल्लेख हो। तीसरा सवाल था कि सरकार द्वारा ऐसी कंपनियों के विरूद्ध उठाए गए कदमों का ब्यौरा क्या है जो बड़ी कंपनियों द्वारा बनाए गए वास्तविक उत्पादों से मिलते जुलते उत्पाद बना रही हैं और उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों व छोटे गांवों में बेच रही हैं। चौथा सवाल पूछा गया कि सरकार द्वारा विगत वर्ष और वर्तमान वर्ष के दौरान इस संबंध में की गई दंडात्मक कार्रवाई का ब्यौरा क्या है और ऐसी कितनी कंपनियों को दंडित किया गया है। 
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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने बताया, सरकार, सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर) में परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीआई) के माध्यम से जैविक खेती और सब्जियों सहित सभी कृषि और बागवानी फसलों को बढ़ावा दे रही है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (एमओवीसीडीएनईआर) योजना लागू की जा रही है। दोनों परियोजनाएं जैविक खेती में संलग्न किसानों को प्रारंभ से लेकर अंत तक अर्थात उत्पादन से लेकर फसलोत्तर प्रबंधन प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण तक सहायता पर बल देती हैं। पीकेवीवाई और एमओवीसीडीएनईआर योजना का मुख्य फोकस प्राकृतिक संसाधन आधारित एकीकृत और जलवायु अनुकूल संधारणीय खेती प्रणालियों को बढ़ावा देना है, जो मिट्टी की उर्वरता, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, खेत पर पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण को बनाए रखना और बढ़ाना सुनिश्चित करती है। बाहरी इनपुट पर किसानों की निर्भरता को कम करती है। जैविक उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए, जैविक उत्पादों के गुणवत्ता नियंत्रण को सुनिश्चित करने के लिए दो प्रकार की जैविक प्रमाणन प्रणालियां विकसित की गई हैं। 
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निर्यात बाजार के विकास के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत
राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) योजना के तहत मान्यता प्राप्त प्रमाणन एजेंसी द्वारा तृतीय पक्ष प्रमाणन। एनपीओपी प्रमाणन योजना के अंतर्गत जैविक उत्पादों के लिए उत्पादन, प्रसंस्करण, व्यापार और निर्यात आवश्यकताओं जैसे सभी चरणों में उत्पादन और संचालन गतिविधियों को कवर किया जाता है। 

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भागीदारी गारंटी प्रणाली 
(पीजीएस इंडिया) जिसमें हितधारक (किसान/उत्पादक सहित) एक दूसरे की उत्पादन प्रथाओं का आकलन, निरीक्षण और सत्यापन करके पीजीएस इंडिया प्रमाणन के संचालन के बारे में निर्णय लेने में शामिल होते हैं। पीजीएस इंडिया प्रमाणन का उद्देश्य घरेलू बाजार की मांग को पूरा करना है। 

इसके अलावा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रशासन के तहत  एक सांविधिक निकाय, भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जैविक खाद्य प्रदार्थों के निर्माण, पैकिंग, बिक्री, बिक्री के लिए पेशकश, विपणन या अन्यथा वितरण या आयात के संबंध में खाद्य सुरक्षा एवं मानक (जैविक खाद्य पदार्थ) विनियम 2017 को अधिसूचित किया है। इस विनियम के अनुसार, 'जैविक खाद्य' के रूप में बिक्री के लिए पेश किए जाने वाले सभा खाद्य पदार्थों को राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) या भारत के लिए भागीदारी गारंटी प्रणाली (पीजीएस भारत) के प्रावधानों का पालन करना होगा। 

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) में यह निर्दिष्ट किया गया है कि योजना के अंतर्गत कवरेज के लिए पात्र खाद्य उत्पादों की प्राथमिक प्रसंस्करण सहित संपूर्ण विनिर्माण प्रक्रिया भारत में ही होनी चाहिए। इसमें एडिटिव्स, फ्लेवर और खाद्य तेल अपवाद में है। इस द्रष्टिकोण का उद्देश्य विनिर्माण प्रक्रिया में घरेलू रूप से उगाए गए कृषि उत्पादों की खरीद द्वारा किसानों को लाभान्वित करना है।   

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 और उसके तहत बनाए गए नियम और विनियम, विभिन्न खाद्य पदार्थों के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानक निर्धारित करते हैं। खाद्य सुरक्षा, मिलावट, लेबलिंग में उल्लंघन, गुणवत्ता नियंत्रण, निरीक्षण और खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम 2006, नियम और विनियम के उल्लंघन के लिए दंड से संबंधित मुद्दों में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा कार्य किया जाता है। इन मानकों का कार्यान्वयन और प्रर्वतन एफएसएसएआई और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के अधीन है। 

एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) विनियम 2020 को अधिसूचित किया है। इस विनियमन में नमक, चीनी और वसा के संबंध में लेबल पर पोषण संबंधी जानकारी का उल्लेख करना अनिवार्य किया गया है। यह शुद्धता और मार्कर यौगिक के वजन प्रतिशत के साथ स्वीटनर के नाम की अनिवार्य घोषणा भी अनिवार्य करता है। इसके अलावा, एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा और मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) संशोधन विनियम 2025 का मसौदा प्रकाशित किया है, जो नमक, चीनी और वसा के संबंध में लेबल पर पोषण संबंधी जानकारी का उल्लेख बोल्ड अक्षरों में और लेबल पर अपेक्षाकृत बढ़े हुए फॉन्ट आकार में करना अनिवार्य करता है। 


एफएसएसएआई अपने क्षेत्रीय कार्यालयों और राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे वर्ष खाद्य उत्पादों की नियमित निगरानी, मॉनीटरिंग, निरीक्षण और याद्रच्छिक नमूनाकरण करता है। यदि कोई गैर अनुरूपता पाई जाती है, तो एफएसएस अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों और विनियमों के अनुसार उपाय किए जाते हैं। अध्याय 9 (अपराध और दंड) धारा 48-67 में खाद्य पदार्थों के उत्पादन, बिक्री, भंडारण आदि, जो एफएसएस अधिनियम 2006, उसके तहत नियमों और विनियमों के उल्लंघन में है, के लिए दंड का वर्णन किया गया है। दंडात्मक कार्रवाई में असुरक्षित भोजन के मामलों में दंड और आपराधिक मुकदमा चलाना शामिल है।

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