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Hindi News ›   India News ›   Food prices could rise globally, with El Niño set to exacerbate the crisis; S&P Global issues a warning.

महंगाई की मार: दुनियाभर में बढ़ सकती हैं खाद्य कीमतें, अल नीनो बढ़ाएगा संकट; एसएंडपी ग्लोबल ने जारी की चेतावनी

Mon, 26 Oct 2026 06:06 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई नई दिल्ली।
एएनआई नई दिल्ली। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Mon, 26 Oct 2026 06:06 PM IST
सार

एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 में दुनिया भर में खाद्य कीमतें बढ़ सकती हैं। खाद और डीजल की बढ़ती लागत के साथ अल नीनो से सूखा और बाढ़ का खतरा है। इससे फसलों की पैदावार और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

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Food prices could rise globally, with El Niño set to exacerbate the crisis; S&P Global issues a warning.
2027 में महंगा हो सकता है खाना - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

एस &पी ग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2027 में वैश्विक खाद्य कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके पीछे उर्वरक और खेती की बढ़ती लागत के साथ-साथ 'अल नीनो' से जुड़ी संभावित मौसमी गड़बड़ियां मुख्य कारण हो सकती हैं। आने वाले महीनों में इसका असर और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है, हालांकि खाद्य पदार्थों पर इसका पूरा प्रभाव दिखने में अभी समय लगेगा।
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क्या चेतावनी दी? 
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एक बेहद शक्तिशाली 'अल नीनो' प्रमुख फसल उत्पादक क्षेत्रों में कृषि उत्पादन के लिए खतरा बन सकता है, जबकि उर्वरक और डीजल की कमी किसानों पर दबाव डाल रही है। इसमें बताया गया है कि आने वाले कुछ महीनों में खाद्य आपूर्ति पर इसका असर और भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, क्योंकि किसान बढ़ती लागत और उर्वरक व डीजल की कमी से जूझ रहे हैं।'
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रिपोर्ट में क्या बताया गया? 
रिपोर्ट में कहा गया, 'तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों के विपरीत, जो तुरंत दिखाई देने लगते हैं, खाद्य पदार्थों पर इनका पूरा असर दिखने में समय लगेगा। किसान अपनी फसल बेचने से कई महीने पहले ही बीज, खाद और ईंधन खरीद लेते हैं।' इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि, 'खेती के बजट पर अभी जो दबाव पड़ रहा है, उसका असर खाद्य बाजारों में पूरी तरह से 2027 तक ही देखने को मिल सकता है।'
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खाद के उत्पादन में सुधार होगी? 
एस &पी ग्लोबल के अनुसार, खाद के उत्पादन में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है, जिससे बाजारों में स्थिरता आएगी। फसलों की ऊंची कीमतें किसानों का मुनाफा बढ़ा सकती हैं, जिससे वे खेती के तहत और अधिक जमीन ला सकते हैं और खाद का इस्तेमाल भी बढ़ा सकते हैं। हालांकि, इस बदलाव में समय लगेगा; कृषि उत्पादन और आपूर्ति में सुधार होने से पहले उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है, 'बुनियादी खाद्य फसलों के अलावा अन्य वस्तुओं पर भी 'अल नीनो' का असर पड़ेगा। इनमें वे नकदी फसलें भी शामिल हैं, जो कई गरीब इलाकों में लोगों की आजीविका के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।' इसे और विस्तार से समझाते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक कृषि क्षेत्र कई तरह के दबावों का सामना कर रहा है। इनमें खाद और ऊर्जा की बढ़ती लागत, बायोफ्यूल की बढ़ती मांग और 'अल नीनो' के कारण मौसम में होने वाली संभावित गड़बड़ियां शामिल हैं।

रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि खाद का उत्पादन काफी हद तक प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है, जबकि खेती की मशीनों को चलाने, सिंचाई प्रणालियों और कृषि उपज के परिवहन के लिए डीजल बहुत जरूरी है।  इसलिए, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें उत्पादन लागत को बढ़ा रही हैं और किसानों के मुनाफे पर दबाव डाल रही हैं।

क्या यह अकेला कृषि संकट है? 
यह कोई एक अकेला कृषि संकट नहीं है, बल्कि कई संकटों का एक साथ आना है। संघर्ष का असर खाद, ऊर्जा और बायोफ्यूल बाजारों पर पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है और किसानों के पास विकल्प कम हो रहे हैं। ठीक उसी समय, एक बहुत ही शक्तिशाली 'अल नीनो' फसलों के लिए खतरा बन गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'एक बेहद शक्तिशाली 'अल नीनो', जिसके 2026 के आखिर में अपने चरम पर पहुंचने की उम्मीद है, एक ऐसे पर्यावरणीय कारक के रूप में काम करेगा जो 2027 में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में भीषण सूखे और बाढ़ का कारण बन सकता है।'


किन इलाकों में होगा इसका असर? 
इसका असर उन इलाकों में विशेष रूप से गंभीर हो सकता है, जहां लगातार कई मौसमों तक खाद का पर्याप्त इस्तेमाल न होने के कारण फसलों की पैदावार पहले ही कमजोर हो चुकी है। एस &पी ग्लोबल ने यह भी चेतावनी दी है कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच वैश्विक अनाज भंडार ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर हैं। ऐसे में, अगर कई क्षेत्रों में एक साथ फसलें बर्बाद हो जाती हैं, तो उनसे निपटने की क्षमता बहुत सीमित रह गई है। कुल मिलाकर, उन्होंने कहा कि वैश्विक खाद्य संकट का आना पहले से तय नहीं है, लेकिन अब यह कोई दूर का खतरा भी नहीं रह गया है।
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