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भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया को बाढ़ की चेतावनी देने वाला सिस्टम लांच
Sat, 24 Oct 2020 05:57 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 24 Oct 2020 05:57 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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भारत समेत समूचे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के देशों को अचानक आने वाली बाढ़ के बारे में 6 से 24 घंटे पहले ही आगाह कर देने वाला सिस्टम शुक्रवार को लांच कर दिया गया। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) में शुरू किए गए इस सिस्टम को अपनी तरह का पहला चेतावनी तंत्र बताया जा रहा है।
दरअसल वैश्विक मौसम विभाग (डब्ल्यूएमओ) ने दक्षिण एशियाई फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम (एसएएफएफजीएस) के समन्वयक की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी भारत को दी थी। इसी कारण यहां इस सिस्टम का क्षेत्रीय केंद्र आईएमडी में स्थापित किया गया है। यह केंद्र पड़ोसी देशों को बाढ़ की चेतावनी देने के अलावा चक्रवातों के बारे में भी आगाह करेगा।
इस सिस्टम को 15वीं डब्ल्यूएमओ कांग्रेस में मंजूरी दी गई थी। इस सिस्टम को डब्ल्यूएमओ जल विज्ञान आयोग और डब्ल्यूएमओ बेसिक सिस्टम्स कमीशन ने अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा व अमेरिकी जल विज्ञान अनुसंधान केंद्र के साथ मिलकर विकसित किया है।
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आईएमडी महानिदेशक मृत्युजंय मोहपात्रा के मुताबिक, यह सिस्टम भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान आदि सदस्य देशों को ऐसी बाढ़ से होने वाले नुकसान की संभावना सहित जानकारी पहले ही देगा, जो बेहद कम समय के लिए अचानक आती है।
अमूमन ऐसी बाढ़ की तीव्रता बेहद ज्यादा होती है और बारिश के बाद बाढ़ के पीक स्तर पर आने के बीच छह घंटे से भी कम अंतराल होता है। यह बाढ़ बेहद सीमित क्षेत्र में अचानक बहुत ज्यादा बारिश हो जाने के कारण आती है।
मोहपात्रा ने कहा, आकस्मिक बाढ़ की संभावना वाटरशेड एरिया के साथ ही शहरी स्तर पर भी जारी की जाएगी। गाइडेंस सिस्टम की लांचिंग के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
24 घंटे पहले चेतावनी, छह घंटे पहले पुष्टि करेगा सिस्टम
आईएमडी महानिदेशक ने कहा, यह सिस्टम 24 घंटे पहले बाढ़ का खतरा जताते हुए चेतावनी देगा, जबकि छह घंटे पहले बाढ़ की पुष्टि करेगा। क्षेत्रीय केंद्र से यह चेतावनी राष्ट्रीय मौसम व जल विज्ञान सेवाओं, राष्ट्रीय व राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और अन्य सभी हितधारकों को दी जाएगी ताकि जान-माल की हानि बचाने के लिए पहले से तैयारी की जा सके।
यह जानकारी दक्षिण एशिया के सभी देशों को दी जाएगी। हालांकि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव एम. राजीवन ने सिस्टम के प्रदर्शन को सुधारने के लिए वर्षा और मिट्टी की नमी के निगरानी नेटवर्क को बढ़ाने की जरूरत जाहिर की।
हालिया मानसून सीजन में किया गया था परीक्षण
आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक बीपी यादव के मुताबिक, आईएमडी ने एफएफजीएस की क्षमता का परीक्षण हालिया मानसून सीजन के दौरान किया था और इसकी वैधता आंकने के लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान व मौसम संबंधी सेवाओं के लिए फ्लैश फ्लड बुलेटिन जारी किए थे।
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दरअसल वैश्विक मौसम विभाग (डब्ल्यूएमओ) ने दक्षिण एशियाई फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम (एसएएफएफजीएस) के समन्वयक की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी भारत को दी थी। इसी कारण यहां इस सिस्टम का क्षेत्रीय केंद्र आईएमडी में स्थापित किया गया है। यह केंद्र पड़ोसी देशों को बाढ़ की चेतावनी देने के अलावा चक्रवातों के बारे में भी आगाह करेगा।
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इस सिस्टम को 15वीं डब्ल्यूएमओ कांग्रेस में मंजूरी दी गई थी। इस सिस्टम को डब्ल्यूएमओ जल विज्ञान आयोग और डब्ल्यूएमओ बेसिक सिस्टम्स कमीशन ने अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा व अमेरिकी जल विज्ञान अनुसंधान केंद्र के साथ मिलकर विकसित किया है।
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आईएमडी महानिदेशक मृत्युजंय मोहपात्रा के मुताबिक, यह सिस्टम भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान आदि सदस्य देशों को ऐसी बाढ़ से होने वाले नुकसान की संभावना सहित जानकारी पहले ही देगा, जो बेहद कम समय के लिए अचानक आती है।
अमूमन ऐसी बाढ़ की तीव्रता बेहद ज्यादा होती है और बारिश के बाद बाढ़ के पीक स्तर पर आने के बीच छह घंटे से भी कम अंतराल होता है। यह बाढ़ बेहद सीमित क्षेत्र में अचानक बहुत ज्यादा बारिश हो जाने के कारण आती है।
मोहपात्रा ने कहा, आकस्मिक बाढ़ की संभावना वाटरशेड एरिया के साथ ही शहरी स्तर पर भी जारी की जाएगी। गाइडेंस सिस्टम की लांचिंग के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
24 घंटे पहले चेतावनी, छह घंटे पहले पुष्टि करेगा सिस्टम
आईएमडी महानिदेशक ने कहा, यह सिस्टम 24 घंटे पहले बाढ़ का खतरा जताते हुए चेतावनी देगा, जबकि छह घंटे पहले बाढ़ की पुष्टि करेगा। क्षेत्रीय केंद्र से यह चेतावनी राष्ट्रीय मौसम व जल विज्ञान सेवाओं, राष्ट्रीय व राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और अन्य सभी हितधारकों को दी जाएगी ताकि जान-माल की हानि बचाने के लिए पहले से तैयारी की जा सके।
यह जानकारी दक्षिण एशिया के सभी देशों को दी जाएगी। हालांकि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव एम. राजीवन ने सिस्टम के प्रदर्शन को सुधारने के लिए वर्षा और मिट्टी की नमी के निगरानी नेटवर्क को बढ़ाने की जरूरत जाहिर की।
हालिया मानसून सीजन में किया गया था परीक्षण
आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक बीपी यादव के मुताबिक, आईएमडी ने एफएफजीएस की क्षमता का परीक्षण हालिया मानसून सीजन के दौरान किया था और इसकी वैधता आंकने के लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान व मौसम संबंधी सेवाओं के लिए फ्लैश फ्लड बुलेटिन जारी किए थे।