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Flood: असम में बाढ़ के कारण काजीरंगा में एक चौथाई से अधिक वन शिविर जलमग्न, जान बचाने पहाड़ियों पर जा रहे जानवर
Mon, 01 Jul 2024 06:08 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Mon, 01 Jul 2024 06:08 PM IST
सार
असम में बाढ़ के कारण वन्यजीवों के आवास का एक बड़ा हिस्सा अब जलमग्न हो गया है। जानवर अपने को बचाने के लिए भी सुरक्षित स्थान ढूंढ रहे हैं। काजीरंगा का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा जलमग्न है।
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असम में बाढ़ प्रतीकात्मक
- फोटो : एएनआई
विस्तार
असम में बाढ़ की स्थिति बिगड़ने पर जल स्तर बढ़ा। जिसके चलते काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के 233 वन शिविरों में से 26 प्रतिशत से अधिक को प्रभावित हो गए। जानवर अपने को बचाने के लिए भी सुरक्षित स्थान ढूंढ रहे हैं।
राज्य भर में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, लगातार बारिश के कारण कई जिले जलमग्न हो गए हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। असम में बाढ़ के कारण वन्यजीवों के आवास का एक बड़ा हिस्सा अब जलमग्न हो गया है। जानवर अपने को बचाने के लिए भी सुरक्षित स्थान ढूंढ रहे हैं। यही कारण है कि पूर्वी कार्बी आंगलोंग जिले में दक्षिण दिशा की ओर ऊंचे स्थानों की तलाश में बड़ी संख्या में जानवर राष्ट्रीय राजमार्ग-715 को पार करने लगे हैं। हालांकि, बाढ़ या राजमार्ग पार करते समय दुर्घटनाओं के कारण अब तक किसी जानवर की मौत की सूचना नहीं मिली है।
असम में बाढ़ की एक रिपोर्ट के अनुसार काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में कुल 61 वन शिविर बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। इसमें कहा गया है कि अगोराटोली रेंज में 22, काजीरंगा में 10, बागोरी में आठ, बुरहापहाड़ रेंज में पांच और बोकाखाट में छह शिविर जलमग्न हैं। रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय उद्यान के विश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग में 10 वन शिविर जलमग्न हो चुके हैं।
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जानवरों की सुरक्षा के लिए धारा 144 के तहत उठाए कदम
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) से गुजरने वाले एनएच-715 को पार करने वाले जानवरों की सुरक्षा के लिए सीआरपीसी की धारा 144 के तहत जानवरों की सुरक्षा के लिए गोलाघाट जिला प्रशासन ने रविवार शाम को एहतियाती आदेश जारी किया। गोलाघाट के जिला मजिस्ट्रेट विवेक श्याम पंग्योक ने कहा कि राजमार्ग पर भारी यातायात होता है। उन्होंने कहा "सक्रिय बाढ़ के दौरान वाहनों का चलने से जोखिम की संभावनाएं अधिक होती हैं। खासतौर पर जंगली जानवरों के लिए आसन्न खतरे का कारण बनता है।" उन्होंने कहा कि जानवर कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के अंतर्गत आने वाले आश्रय के लिए पहाड़ियों पर अस्थायी रूप से प्रवास करने के लिए गलियारों का उपयोग करते हैं।
यातायात प्रबंधन के लिए आदेश जारी
इसके बाद सोमवार से केएनपी से गुजरने वाले एनएच-715 पर यातायात प्रबंधन के लिए आदेशों का एक सेट जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि किसी भी वाणिज्यिक वाहन को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल निजी वाहन ही दिन के समय विनियमित गति से चलेंगे। इसमें कहा गया है, "रात के समय केवल स्थानीय निजी वाहनों को ही केएनपी पार करने की अनुमति होगी।" आदेश में वाणिज्यिक और निजी दोनों तरह के वाहनों के लिए विभिन्न यातायात डायवर्जन बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को असम में मौजूदा बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली। संकट से निपटने के लिए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
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राज्य भर में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, लगातार बारिश के कारण कई जिले जलमग्न हो गए हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। असम में बाढ़ के कारण वन्यजीवों के आवास का एक बड़ा हिस्सा अब जलमग्न हो गया है। जानवर अपने को बचाने के लिए भी सुरक्षित स्थान ढूंढ रहे हैं। यही कारण है कि पूर्वी कार्बी आंगलोंग जिले में दक्षिण दिशा की ओर ऊंचे स्थानों की तलाश में बड़ी संख्या में जानवर राष्ट्रीय राजमार्ग-715 को पार करने लगे हैं। हालांकि, बाढ़ या राजमार्ग पार करते समय दुर्घटनाओं के कारण अब तक किसी जानवर की मौत की सूचना नहीं मिली है।
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असम में बाढ़ की एक रिपोर्ट के अनुसार काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में कुल 61 वन शिविर बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। इसमें कहा गया है कि अगोराटोली रेंज में 22, काजीरंगा में 10, बागोरी में आठ, बुरहापहाड़ रेंज में पांच और बोकाखाट में छह शिविर जलमग्न हैं। रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय उद्यान के विश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग में 10 वन शिविर जलमग्न हो चुके हैं।
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जानवरों की सुरक्षा के लिए धारा 144 के तहत उठाए कदम
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) से गुजरने वाले एनएच-715 को पार करने वाले जानवरों की सुरक्षा के लिए सीआरपीसी की धारा 144 के तहत जानवरों की सुरक्षा के लिए गोलाघाट जिला प्रशासन ने रविवार शाम को एहतियाती आदेश जारी किया। गोलाघाट के जिला मजिस्ट्रेट विवेक श्याम पंग्योक ने कहा कि राजमार्ग पर भारी यातायात होता है। उन्होंने कहा "सक्रिय बाढ़ के दौरान वाहनों का चलने से जोखिम की संभावनाएं अधिक होती हैं। खासतौर पर जंगली जानवरों के लिए आसन्न खतरे का कारण बनता है।" उन्होंने कहा कि जानवर कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के अंतर्गत आने वाले आश्रय के लिए पहाड़ियों पर अस्थायी रूप से प्रवास करने के लिए गलियारों का उपयोग करते हैं।
यातायात प्रबंधन के लिए आदेश जारी
इसके बाद सोमवार से केएनपी से गुजरने वाले एनएच-715 पर यातायात प्रबंधन के लिए आदेशों का एक सेट जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि किसी भी वाणिज्यिक वाहन को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल निजी वाहन ही दिन के समय विनियमित गति से चलेंगे। इसमें कहा गया है, "रात के समय केवल स्थानीय निजी वाहनों को ही केएनपी पार करने की अनुमति होगी।" आदेश में वाणिज्यिक और निजी दोनों तरह के वाहनों के लिए विभिन्न यातायात डायवर्जन बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को असम में मौजूदा बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली। संकट से निपटने के लिए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।