{"_id":"5ca515edbdec2213fd29a03c","slug":"flat-buyers-can-not-be-forced-to-accept-unilateral-contracts-supreme-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"फ्लैट खरीदार को एकतरफा करार मानने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
फ्लैट खरीदार को एकतरफा करार मानने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
Thu, 04 Apr 2019 01:52 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Thu, 04 Apr 2019 01:52 AM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिल्डर किसी भी फ्लैट खरीदार को एकतरफा करार मानने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट का पोजेशन देने में दो साल की देरी करने के एक मामले में गुरूग्राम की बिल्डर पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से फ्लैट खरीदार को उसका 4.83 करोड़ 10.7 फीसदी ब्याज केसाथ देने के लिए कहा है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि 8 मई 2012 बिल्डर व खरीदार केबीच करार हुआ था। करार के मुताबिक, अगर फ्लैट खरीदार ने रकम देने में देरी की तो उसे 18 फीसदी ब्याज देना होगा वहीं अगर बिल्डर ने तय समय में फ्लैट का पोजेशन नहीं दिया तो खरीदार 12 महीने और इंतजार करेगा। रिफंड की स्थिति में बिल्डर सिर्फ मूलधन वापस करेगा। उसमें देरी हुई तो बिल्डर नौ फीसदी ब्याज का भुगतान करेगा।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह करार एकतरफा है और अनुचित है। इसे वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा है कि फ्लैट खरीदार को एकतरफा करार मानने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। बिल्डर द्वारा तैयार इस तरह केकरार पर फ्लैट खरीदार केपास हस्तक्षर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। ऐसी स्थिति में इस करार को अंतिम और बाध्यकारी नहीं हो सकता।
विज्ञापन
इससे पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर से कहा था कि वह फ्लैट खरीददार को 4.83 करोड़ रुपये 10.7 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करें। इस फैसले को बिल्डर कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के फैसले को जायज ठहराया है।
वास्तव में बिल्डर कंपनी ने गुरुग्राम के सेक्टर-62 में एक प्रोजेक्ट लांच किया था। खरीदार ने इसमें फ्लैट बुक कराया। चार मई, 2012 को बिल्डर व खरीदार केबीच करार पर हस्ताक्षर हुआ। बिल्डर ने वर्ष 2015 तक फ्लैट को पोजेशन देने का वायदा किया था लेकिन बिल्डर इसे पूरा करने में नाकाम रहा था। जिसके बाद वर्ष 2017 में खरीदार ने शिकायत दर्र्ज कराई थी और रिफंड की मांग की थी।