फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Five points, why Manohar Parrikar reversed in state politics of Goa

गोवा में अचानक क्यों हुई परिकर की 'घर वापसी', जानिए पांच कारण?

Thu, 16 Mar 2017 05:26 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Thu, 16 Mar 2017 05:26 PM IST
विज्ञापन
Five points, why Manohar Parrikar reversed in state politics of Goa
- फोटो : ANI

गोवा में मुख्यमंत्री मनोहर परिकर ने बहुमत साबित कर उस अग्निपरीक्षा को पास कर लिया है जो राज्य में उन्हें सरकार चलाने का अधिकार देती है। बताया जा रहा है कि परिकर को भाजपा के 13 सहित कुल 22 विधायकों का समर्थन हासिल हुआ। इसके साथ ही परिकर ने विरोधियों की उस किलेबंदी को भी ध्वस्त कर दिया जिसमें वो कुछ घंटों के लिए ही पर्रिकर के मुख्यमंत्री बने रहने के दावे कर रहे थे।

विज्ञापन


अब जब पर्रिकर बहुमत से गोवा में सरकार के मुखिया बन चुके हैं तब एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा हो जाता है, वो सवाल जिस पर अभी तक गोवा में सरकार बनाने की आपाधापी और खींचतान में कोई चर्चा ही नहीं हो पाई, कि आखिर अचानक गोवा में परिकर की घर वापसी क्यों हुई?
विज्ञापन


सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि 11 मार्च से पहले तक शायद ही किसी ने देश के रक्षामंत्री परिकर  की गोवा की राजनीति में वापिस लौटने की चर्चा की हो। उस समय यह सवाल उसी तरह बेमानी माना जा रहा था जिस तरह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गुजरात में वापिस लौटने का और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के यूपी की राजनीति में वापसी करने का।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन शनिवार 11 मार्च को परिणाम आते ही गोवा की राजनीति में तेजी से हलचल हुई सोमवार होते-होते गोवा में भाजपा ने दूसरे नंबर पर रहने के बावजूद भी पर्रिकर के नेतृत्व में सरकार बनाने का दावा भी कर दिया। सवाल ये भी है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि पर्रिकर की देश के रक्षामंत्री से गोवा में घर वापसी हो गई। आइए डालते हैं ऐसे ही कारणों पर एक निगाह-

केंद्र की खींचतान भरी राजनीति में खुद को एडजस्ट नहीं कर पा रहे थे पर्रिकर

Five points, why Manohar Parrikar reversed in state politics of Goa
केंद्र की खींचतान भरी राजनीति में खुद को एडजस्ट नहीं कर पा रहे थे परिकर ​
आईआईटी पास सरल स्वभाव के परिकर ने अपनी राजनीति की शुरूआत गोवा जैसे छोटे से राज्य से की थी। वह तीन बार मुख्यमंत्री बने इसके बाद केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें रक्षामंत्री पद के लिए बुलावा आया जिस पर बिना किसी ना नुकर के परिकर ने इस जिम्‍मेदारी को संभाल लिया। उनके पद संभालने के बाद से ही चर्चाएं तेज थी कि सरल स्वभाव वाले पर्रिकर खुद को केंद्र की खींचतान और जबरदस्त चुनौतियों से भरी राजनीति में एडजस्ट नहीं कर पा रहे थे। वो लंबे समय से खुद ही गोवा में वापसी के इच्छुक नहीं थे।

अपनी हर फाइल पर पीएमओ के हस्तक्षेप से भी नाराज थे पर्रिकर
बताया जाता है कि रक्षामंत्री होने के नाते परिकर जिन रक्षा सौदों को हरी झंडी देते उन पर पीएमओ से सवाल जवाब हो जाता। बिना पीएमओ की सहमति के उनकी किसी भी फाइल को ओके नहीं किया जाता था जिससे परिकर नाराज चल रहे थे। ईमानदार छवि वाले परिकर को यह नागवार गुजरता था कि उनके हरी झंडी देने के बाद भी तमाम फाइलों को पीएमओ की सहमति के लिए अटका दिया जाता था। 
 

पर्रिकर के जाने के बाद बिगड़ी भाजपा की स्थिति

Five points, why Manohar Parrikar reversed in state politics of Goa

गोवा में बिगड़ी भाजपा की स्थिति
मनोहर पर्रिकर के गोवा में पद छोड़ने के बाद से राज्य में लगातार भाजपा की स्थिति खराब ही हुई है। पर्रिकर के बाद सीएम बनाए गए लक्ष्मीकांत पार्सेकर पार्टी और सरकार दोनों को संभालने में नाकाम ही रहे, उनके नेतृत्व में सरकार और पार्टी के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ता रहा। नतीजा ये निकला कि पार्टी तो चुनाव हारी ही पार्सेकर खुद भी अपनी सीट नहीं बचा सके। साल 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में 21 सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार 12 सीटों पर सिमट गई। ऐसे में राज्य में पार्टी को संभालने के लिए एक मजबूत चेहरे की जरूरत थी। 

कांग्रेस को चुनौती देने के लिए राज्य में किसी बड़े नेता का अभाव
गोवा में भाजपा की सबसे बड़ी मुसीबत ये थी कि मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर खुद चुनाव हार चुके थे और किसी बड़े नेता के अभाव में पार्टी पर बिखरने का संकट था। वैसे भी पार्सेकर पार्टी को संभाल कर नहीं रख पा रहे थे। पार्टी में कोई ऐसा बड़ा चेहरा भी नहीं था जो उसे एकजुट रख सके। भाजपा नेतृत्व को डर था कि समय से किसी बड़े नेता को जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई तो पार्टी में फूट भी हो सकती है जिसका फायदा सीधे सीधे कांग्रेस को होगा। ऐसे में गोवा में बड़े नुकसान से बचाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने पर्रिकर को तुंरत वहां जिम्मेदारी सौंप दी। 

पर्रिकर के सीएम बनने की स्थिति में ही दूसरे दलों के समर्थन की शर्त
पर्रिकर के गोवा लौटने की एक बड़ी वजह ये भी बताई जा रही है कि दूसरे नंबर पर रहने के बाद भाजपा को सरकार बनाने के लिए जिन दूसरे दलों की मदद की जरूरत थी उन्होंने परिकर के सीएम बनने की शर्त पर ही समर्थन देने का वादा किया। गोवा फारवर्ड पार्टी के विजय सरदेशाई ने तो भाजपा के सामने शर्त ही यह रखी कि पार्टी पर्रिकर को सीएम का चेहरा बनाए और समर्थन ले ले। यह वही विजय सरदेसाई थे जिन पर कांग्रेस भी निगाह बनाए हुए थी और पार्टी समर्थन के लिए उनकी सहमति का इंतजार कर रही थी। ऐसे में भाजपा ने बिना देरी किए पर्रिकर को सीएम उम्‍मीदवार बना दिया, जिसके बाद सरदेसाई ने भी तुरंत समर्थन देने की घोषणा कर दी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed