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Mosquirix: मलेरिया के खिलाफ डब्ल्यूएचओ से मान्यता प्राप्त दुनिया का पहला टीका, जानिए इसके बारे में सब कुछ
Thu, 07 Oct 2021 04:41 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 07 Oct 2021 04:41 PM IST
सार
मच्छर जनित बीमारी मलेरिया के खिलाफ दुनिया का पहला टीका सामने आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को इस टीके के उपयोग की मंजूरी दे दी। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि यह टीका पूरे अफ्रीका में बच्चों को इस उम्मीद में दिया जाना चाहिए कि यह इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए रुके हुए प्रयासों को बढ़ावा देगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
डब्ल्यूएचओ ने जिस टीके के लिए सिफारिश की है उसका नाम आरटीएस,एस या मॉस्क्विरिक्स है। इसे ब्रिटेन की टीका निर्माता कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन ने विकसित किया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एढनोम गेब्रियेसिस ने इस पर कहा, 'यह अफ्रीका में अफ्रीकी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया टीका है और हमें इस पर बहुत गर्व है।'
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क्या है मॉस्क्विरिक्स टीका, कब हुआ तैयार
यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी के अनुसार मॉस्क्विरिक्स एक ऐसा टीका है जो मलेरिया से सुरक्षा में मदद के लिए छह सप्ताह से 17 माह की आयु के बच्चों को दिया जाता है। इससे हेपेटाइटिस बी वायरस से लिवर के संक्रमण से सुरक्षा में भी मदद मिलती है। हालांकि, यूरोपीय एजेंसी ने चेताया है कि टीके का इस्तेमाल केवल इसी उद्देश्य से नहीं होना चाहिए।
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इस टीके को ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन ने 1987 में विकसित किया था। इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। इनमें से एक यह कि मॉस्क्विरिक्स की चार खुराकों तक की जरूरत होती है और कई महीनों के बाद इससे मिलने वाली सुरक्षा कमजोर होने लगती है। लेकिन, वैज्ञानिकों का मानना है कि अफ्रीका में मलेरिया के खिलाफ यह टीका बड़ा असर डाल सकता है।
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घाना, केन्या और मलावी में साल 2019 से बड़े स्तर पर शुरू किए गए पायलट प्रोग्राम के तहत नवजातों को मॉस्क्विरिक्स की 23 लाख खुराकें लगाई जा चुकी हैं।
किस तरह होता है मॉस्क्विरिक्स का इस्तेमाल
यह टीका 0.5 मिलीलीटर मात्रा में इंजेक्शन के जरिए जांघ या कंधे के पास मांसपेशी में लगाया जाता है। बच्चों को तीन खुराकें लगाई जाती हैं और हर खुराक के बीच एक महीने का अंतर रहता है। चौथा इंजेक्शन तीसरी खुराक के 18 महीने बाद लगवाने को कहा जाता है।
किस तरह काम करता है मॉस्क्विरिक्स टीका
यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉस्क्विरिक्स में सक्रिय घटक का निर्माण प्रोटीन्स से किया गया है। ये प्रोटीन्स प्लास्मोडियम फाल्सिपेरम पैरासाइट (परजीवी) की सतह पर पाया जाता है। जब यह किसी बच्चे को दिया जाता है, तो उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली परजीवी से 'बाहरी' प्रोटीन को पहचानती है और उनके खिलाफ एंटीबॉडी बनाती है।
आखिर कितना असरदार है मॉस्क्विरिक्स टीका
बच्चों में मलेरिया के गंभीर मामलों में यह टीका केवल 30 फीसदी प्रभावी है, लेकिन यह अकेला अनुमति प्राप्त टीका है। यूरोपीय संघ के औषधि नियामक ने इसे साल 2015 में यह कहते हुए अनुमति दी थी कि इसके लाभ इसकी चुनौतियों से अधिक हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इसके साइड इफेक्ट बेहद कम हैं लेकिन कभी-कभी बुखार और बेहोशी आ सकती है।