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G20 FMCBG Meeting : निर्मला सीतारमण ने इस स्थिति को बताया बेहद नाजुक, बहुपक्षीय समन्वय की जरूरत पर दिया जोर

Sat, 25 Feb 2023 03:05 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, बंगलूरू।
पीटीआई, बंगलूरू। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 25 Feb 2023 03:05 AM IST
सार

जी20 समूह के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय गवर्नरों की बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई विकासशील देशों के बढ़ते कर्ज का जिक्र करते हुए समूह देशों से इस दिशा में निर्णायक कदम उठाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आईएमएफ और विश्व बैंक जैसे अन्य बैंकों की मदद से वैश्विक चुनौतियों को कम किया जा सकता है।

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Finance Minister Nirmala Sitharaman seeks multilateral coordination to tackle debt vulnerabilities
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। - फोटो : Twitter@FinMinIndia

विस्तार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों (एफएमसीबीजी) की बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। बैठक को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। निर्मला सीतारमण ने कई विकासशील देशों की कर्ज को लेकर नाजुक होती स्थिति का मुद्दा उठाया और इस कर्ज से निपटने के लिए बहुपक्षीय समन्वय के बारे में जी-20 के सदस्य देशों से विचार आमंत्रित किए। साथ ही उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक समन्वित वैश्विक नीति बनाने में जी-20 देशों के समर्थन का स्वागत किया।

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उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीतारमण ने इस विषय पर भी विचारों को आमंत्रित किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसे बहुपक्षीय विकास बैंकों को किस तरह मजबूत किया जा सकता है जिससे वे 21वीं सदी की साझा वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सके, साथ ही सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और गरीबी उन्मूलन पर ध्यान केंद्रित रख सकें। उन्होंने कहा कि जी-20 जरूरतों और परिस्थितियों का सम्मान करते हुए ताकत का लाभ उठाकर दुनिया भर में जीवन बदल सकता है।
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बहुपक्षीय सहयोग पर जी-20 के सदस्य देशों से मांगे विचार
सीतारमण ने जी-20 एफएमसीबीजी बैठक के पहले सत्र में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे, सतत वित्त और अवसंरचना पर भी बात की। साथ ही उन्होंने वित्तीय क्षेत्र पर एक अलग सत्र में संबंधित जोखिमों को संतुलित करते हुए तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। वित्त मंत्रालय ने ट्वीट किया, वित्त मंत्री ने कई कमजोर देशों में कर्ज को लेकर बढ़ते अस्थिरता के हालात का जिक्र किया और बहुपक्षीय सहयोग पर जी-20 के सदस्य देशों से विचार मांगे। भारत जी20 समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इस नाते जी20 बैठक का एजेंडा भी भारत तय कर रहा है। वित्त मंत्री ने विभिन्न विकासशील देशों के कर्ज के प्रबंधन को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।
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गरीब देशों के कर्ज में 35 फीसदी की बढ़ोतरी
गौरतलब है कि विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने पिछले वर्ष दिसंबर में कहा था कि दुनिया के सबसे गरीब देशों पर सालाना 62 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज है जो 2021 के 46 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में 35 फीसदी बढ़ गया है और इसके साथ ही डिफॉल्ट होने का जोखिम भी बढ़ गया है। मलपास ने यह भी कहा था कि कम आय वाले देश कर्ज संकट के उच्च जोखिम में जा रहे हैं या पहले से ही इसमें बने हुए हैं और कर्ज का संकट गरीब देशों से आगे निकलता हुआ मध्य आय वर्ग वाले देशों में भी फैल रहा है।

विकासशील देशों की स्थिति वैश्विक मंदी का कारण बन सकती है
जी20 अध्यक्षता के तहत भारत मुख्य रूप से जारी भू-राजनीतिक तनाव और महामारी के कारण विकासशील देशों के सामने उत्पन्न गंभीर ऋण संकट से निपटने के तरीकों पर जोर दे रहा है। ऐसी आशंका है कि कर्ज को लेकर विकासशील देशों की जो नाजुक स्थिति है यदि उस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह वैश्विक मंदी का कारण बन सकती है और लाखों लोगों को भीषण गरीबी में धकेल सकती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संकट फिलहाल नहीं टला : दास
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हाल के महीनों में स्थिति बेहतर हुई है। अब अधिक उम्मीद है कि दुनिया गहरी मंदी से बच सकती है और उसे केवल धीमी वृद्धि या नरम मंदी का सामना करना पड़ सकता है। फिर भी हमारे सामने अनिश्चितताएं हैं।

सार्वजनिक डिजिटल इन्फ्रा सर्वाधिक परिवर्तनशील नवाचार
सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचा (डीपीआई) सबसे ज्यादा परिवर्तनशील डिजिटल नवाचार है। यह भारत समेत कई देशों में वृद्धि को आगे बढ़ाने वाले कारक के रूप में उभरा है। आर्थिक मामलों के सचिव (डीईए) अजय सेठ ने कहा, भारत समेत कई देशों के अनुभवों से स्पष्ट हो गया है कि डीपीआई सबसे ज्यादा परिवर्तनशील नवाचारों में से एक है।


डिजिटल नवाचार से बढ़ी सरकार की जवाबदेही : नीलेकणि
डीपीआई पर भारत के जी-20 कार्यबल के सह अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा, डिजिटल नवाचार से सरकार की आर्थिक बचत होने के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। समावेशी वृद्धि और विकास के लिए डीपीआई का लाभ उठाने की बात को भारत की अध्यक्षता में जी-20 की ओर से प्रमुख प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

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