NPA: 29 उधारकर्ता कंपनियां, सभी पर 1000-1000 करोड़ रुपये से अधिक का लोन, एनपीए में गए 61 हजार करोड़
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान सबसे अधिक 2,36,265 करोड़ रुपये के एनपीए बट्टे खाते में डाले गए, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में 58,786 करोड़ रुपये के एनपीए बट्टे खाते में डाले गए, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है।
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देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में 29 ऐसी विशिष्ट उधारकर्ता कंपनियां हैं, जिन्हें नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। प्रत्येक का बकाया 1000 करोड़ रुपये व इससे अधिक है। इन खातों में समग्र बकाया 61027 करोड़ रुपये था। वित्तीय वर्ष 2014-15 में बट्टे खाते में डाली गई कुल अनर्जक आस्तियां (एनपीए) 58786 करोड़ रुपये थी। बड़े उद्योग और सेवाओं के संबंध में बट्टे खाते में डाली गई अनर्जक आस्तियां 31723 करोड़ रुपये थी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में बट्टे खाते में डाली गई कुल अनर्जक आस्तियां (एनपीए) 216324 करोड़ रुपये थी। इस अवधि के दौरान बड़े उद्योग और सेवाओं के संबंध में बट्टे खाते में डाली गई अनर्जक आस्तियां 114528 करोड़ रुपये थी। वित्तीय वर्ष 2023-24 में बट्टे खाते में डाली गई कुल अनर्जक आस्तियां 170270 करोड़ रुपये थी। इस अवधि के दौरान बड़े उद्योग और सेवाओं के संबंध में बट्टे खाते में डाली गई अनर्जक आस्तियां 68366 करोड़ रुपये थी।
संसद की कार्यवाही के दौरान सोमवार को लोकसभा सदस्य अमरा राम ने वित्त मंत्री से पांच सवाल पूछे थे। पहला सवाल, विगत दस वर्षों के दौरान बड़े कॉरपोरेट घरानों की ऐसी ऋण राशि का कंपनीवार ब्यौरा क्या है, जिसे बट्टे खाते में डाला गया है। दूसरा सवाल, औद्योगिक इकाइयों को पांच हजार करोड़ रुपये तक संवितरित बकाया ऋण राशि का कंपनीवार ब्यौरा क्या है। तीसरा सवाल, उक्त बकाया राशि की वसूली के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। चौथा, देश में ऐसी कितनी फर्म और कंपनियां हैं, जिनके संबंध में एक हजार करोड़ रुपये या उससे अधिक की एनपीए ऋण राशि देय है। तत्संबंधी एनपीए ब्यौरा क्या है। पांचवां सवाल, विगत दस वर्षों के दौरान कितनी कंपनियों के संबंध में ऋण की राशि बट्टे खाते में डाली गई है तथा तत्संबंधी कंपनीवार और राशिवार ब्यौरा क्या है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बाबत एक विवरण सदन के पटल पर रखा। इन सवालों के जवाब में वित्त मंत्री ने बताया, आरबीआई के दिशा निर्देशों और बैंक के बोर्ड से अनुमोदित नीति के अनुसार अनर्जक आस्तियों, जिनमें अन्य बातों के साथ साथ, वैसे एनपीए भी शामिल है, जिनके चार वर्ष पूरे होने पर पूर्ण प्रावधान किया गया हो, को बट्टे खाते में डालते हैं। इस प्रकार बट्टे खाते में डाले जाने से उधारकर्ताओं को देयताओं से छूट नहीं मिलती है, इसलिए बट्टे खाते में डाले जाने से उधारकर्ताओं को कोई लाभ नहीं मिलता है।
बैंक अपने पास उपलब्ध विभिन्न वसूली तंत्रों, जैसे सिविल न्यायालयों या ऋण वसूली अधिकरणों में वाद दायर करना, वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करना, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता के अंतर्गत राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण में मामला दायर करना आदि के द्वारा उधारकर्ताओं के विरूद्ध आरंभ की गई वसूली की कार्रवाई जारी रखते हैं।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 की स्थिति के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में 29 ऐसी विशिष्ट उधारकर्ता कंपनियां हैं, जिन्हें नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। प्रत्येक का बकाया 1000 करोड़ रुपये व इससे अधिक है। इन खातों में समग्र बकाया 61027 करोड़ रुपये था। उधारकर्ताओं से बकाया राशि की वसूली करने के लिए बैंक द्वारा उधारकर्ताओं से संपर्क किया जाता है। चूक की राशि के आधार पर बैंक कॉरपोरेट उधारकर्ताओं के मामले में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया आरंभ करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण में भी जा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, यदि ऋण खाता एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया गया है तो बैंक अपने बोर्ड से अनुमोदित नीतियों के अनुसार वसूली की कार्रवाई आरंभ करते हैं, जिसमें अन्य बातों के साथ साथ सिविल न्यायालयों या ऋण वसूली अधिकरणों में वाद दायर करना, वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करना शामिल है।