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नोटबंदी के 2 साल: जेटली ने गिनाए फायदे, बोले- इसका उद्देश्य नकदी की जब्ती नहीं था

Thu, 08 Nov 2018 05:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 08 Nov 2018 05:38 PM IST
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Finance minister arun jaitley enumerated advantages of demonetisation
अरुण जेटली - फोटो : ANI

8 नवंबर, 2016 को हुई नोटबंदी को आज दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इस मौके पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अर्थव्यवस्था को व्यवस्थित बनाने की दिशा में सरकार द्वारा जो भी कदम उठाए गए, उनमें नोटबंदी एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। 

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उन्होंने फेसबुक पर एक लेख पोस्ट किया है, जिसके जरिए उन्होंने कहा कि सबसे पहले सरकार ने देश के बाहर मौजूद काले धन पर निशाना साधा। संपत्ति धारकों को दंड कर के भुगतान पर उस पैसे को वापस लाने के लिए कहा गया। जो लोग ऐसा करने में असफल रहे हैं, उन पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है। दूसरे देशों में मौजूद सभी बैंक अकाउंट्स और संपत्तियों का विवरण सरकार तक पहुंचा है, जिसके परिणामस्वरूप नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
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जेटली ने कहा, 'तकनीक का इस्तेमाल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों पर रिटर्न दाखिल करने और टैक्स बेस का विस्तार करने के लिए किया गया है। कमजोर वर्ग भी देश की औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हों, यह सुनिश्चित करने की दिशा में वित्तीय समावेशन एक और महत्वपूर्ण कदम था। जन-धन खातों के जरिए अधिक से अधिक लोग बैंकिंग प्रणाली से जुड़ चुके हैं। आधार के जरिए सरकारी सहायता का प्रत्यक्ष और पूरा लाभ सीधे लाभार्थिंयों के बैंक खातों में पहुंच रहा है। जीएसटी के जरिए अप्रत्यक्ष करों के भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाना सुनिश्चित किया गया।' 
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नकद की भूमिका

वित्त मंत्री ने कहा, 'भारत नकदी के वर्चस्व वाली अर्थव्यवस्था थी। नकद लेन-देन में, लेने वाले और देने वाले का पता नहीं लगाया जा सकता। इसमें बैंकिग प्रणाली की भूमिका पीछे छूट जाती है और साथ ही टैक्स सिस्टम भी बिगड़ता है। नोटबंदी ने नकद धारकों को सारा कैश बैंकों में जमा करने पर मजबूर किया। बैकों में नकद जमा होने और किसने जमा किए, ये पता चलने के परिणामस्वरूप 17.42 लाख संदिग्ध खाता धारकों की पहचान हो सकी। नियमों का उल्लंघन करने वालों को दंड कार्रवाई का सामना करना पड़ा। बैकों में ज्यादा धन जमा होने से बैंकों की ऋण देनी की क्षमता में भी सुधार हुआ। आगे निवेश के लिए इस धन को म्यूचुअल फंड में बदल दिया गया। ये कैश भी औपचारिक प्रणाली का हिस्सा बन गया।'

गलत तर्क

उन्होंने अपने लेख में लिखा है, 'नोटबंदी की एक बे-तर्क आलोचना यह है कि लगभग पूरा नकद बैंकों में जमा हो गया है। नोटबंदी का उद्देश्य नकदी की जब्ती नहीं था। नोटबंदी का उद्देश्य था, कैश को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल कराना और कैशधारकों को टैक्स सिस्टम में लाना। भारत को नकद से डिजिटल लेनदेन में स्थानांतरित करने के लिए सिस्टम में बदलाव की जरूरत है। इसका स्पष्ट रूप से उच्च कर राजस्व और उच्च कर आधार पर असर होगा।'
 
डिजिटलीकरण पर प्रभाव

जेटली ने कहा, ‘द यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस’ यानि एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) 2016 में लांच किया गया था, जिसके जरिए दो मोबाइल धारकों के बीच वास्तविक समय में भुगतान संभव है। इसके जरिए हुआ लेन-देन अक्टूबर 2016 के 0.5 अरब रुपयों से बढ़कर सितंबर 2018 में 598 अरब रुपये पहुंच गया। भारत इंटरफेस फॉर मनी यानि भीम (बीएचआईएम) एनपीसीई द्वारा विकसित किया गया एक ऐप है, जिसमें यूपीआई का उपयोग कर त्वरित भुगतान किया जाता है। इस समय करीब 1.25 करोड़ लोग लेनदेन के लिए भीम ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। भीम ऐप के जरिए लेनदेन सितंबर 2016 के 0.02 अरब रुपये से बढ़कर सितंबर 2018 में 70.6 अरब रुपये हो गया। जून 2017 में यूपीआई के जरिए हुए कुल लेनदेन में भीम ऐप की हिस्सेदारी लगभग 48 फीसदी है।
 
उन्होंने कहा कि रुपे कार्ड का उपयोग प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) और ई-कॉमर्स दोनों में किया जाता है। इसके जरिए प्वाइंट ऑफ सेल में नोटबंदी से पहले 8 अरब रुपयों का लेनदेन हुआ था, वहीं सितंबर 2018 में यह बढ़कर 57.3 अरब रुपये हो गया और ई-कॉमर्स में ये आंकड़ा 3 अरब रुपयों से बढ़कर 27 अरब रुपये हो गया।
 
जेटली ने कहा कि आज यूपीआई और रुपे कार्ड की स्वदेशी भुगतान प्रणाली के आगे वीजा और मास्टर कार्ड भारतीय बाजारों में अपनी हिस्सेदारी खो रहे हैं। डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से होने वाले भुगतान में यूपीआई और रूपे की हिस्सेदारी अब 65 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

प्रत्यक्ष करों पर प्रभाव

वित्त मंत्री ने कहा, 'नोटबंदी का प्रभाव व्यक्तिगत इनकम टैक्स कलेक्शन पर भी देखा गया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वित्तीय वर्ष 2018-19 (31-10-2018 तक) इनकम टैक्स कलेक्शन में 20.2 फीसदी बढ़ोतरी देखी गई है। कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन भी 19.5 फीसदी अधिक रहा। नोटबंदी से दो साल पहले जहां प्रत्यक्ष कर कलेक्शन में क्रमशः 6.6 फीसदी और 9 फीसदी की वृद्धि हुई, वहीं नोटबंदी के बाद के दो वर्षों, 2016-17 में 14.6 फीसदी और 2017-18 में 18 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई।
 
इसी तरह वर्ष 2017-18 में इनकम टैक्स रिटर्न 6.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 फीसदी अधिक है। इस साल, 31-10-2018 तक 5.99 करोड़ रुपये का रिटर्न दाखिल किया जा चुका है जो पिछले वर्ष की इस तारीख तक की तुलना में 54.33 फीसदी अधिक है। इस साल 86.35 लाख नये करदाता भी जुड़े हैं।'
 
उन्होंने कहा कि मई 2014 में जब वर्तमान सरकार चुनी गई, तब इनकम टैक्स रिटर्न भरने वालों की कुल संख्या 3.8 करोड़ थी। इस सरकार के पहले चार वर्षों में यह संख्या बढ़कर 6.86 करोड़ हो गई है। इस सरकार के पहले पांच वर्ष पूरे होने तक हम निर्धारिती आधार को दोगुना करने के करीब होंगे।

अप्रत्यक्ष कर पर प्रभाव

जेटली ने कहा, 'नोटबंटी और जीएसटी के लागू होने से नकद लेनदेन बड़े पैमाने पर खत्म हुआ है। डिजिटल लेनदेन में बढ़ावा साफ देखा जा सकता है। इससे अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचा है, करदाताओं की संख्या बढ़ी है। जीएसटी लागू होने के बाद करदाताओं का आंकड़ा पहले के 60 लाख 40 हजार से बढ़कर 1 करोड़ 20 लाख हो गया। नेट टैक्स के हिस्से के रूप में दर्ज वस्तुओं और सेवाओं की वास्तविक खपत अब बढ़ी है। इसने अर्थव्यवस्था में अप्रत्यक्ष कर वृद्धि को बढ़ावा दिया है। इससे केंद्र और राज्य दोनों को फायदा हुआ है। जीएसटी के बाद प्रत्येक राज्य को हर साल कराधान में अनिवार्य 14 फीसदी की वृद्धि हो रही है। तथ्य यह है कि निर्धारकों को अपने कारोबार की घोषणा अब न केवल अप्रत्यक्ष कर के प्रभावित आंकड़े के साथ करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि कर निर्धारण में उनसे उत्पन्न आयकर का खुलासा किया गया है। 2014-15 में जीडीपी अनुपात पर अप्रत्यक्ष कर 4.4 फीसदी था। जीएसटी के बाद यह कम से कम 1 प्रतिशत अंक बढ़कर 5.4 फीसदी तक चढ़ गया है।
 
उन्होंने कहा कि छोटे करदाताओं को 97,000 करोड़ रुपये, जीएसटी निर्धारकों को 80,000 करोड़ रुपये की वार्षिक आयकर राहत देने के बावजूद टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों की दरें कम कर दी गई हैं, लेकिन टैक्स कलेक्शन बढ़ गया है। टैक्स बेस का विस्तार किया गया है। प्री-जीएसटी 31 फीसदी कर दायरे में आने वाली 334 वस्तुएं पर कर कटौती देखी गई है।
 
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने इन संसाधनों का इस्तेमाल बेहतर बुनियादी ढांचा निर्माण, सामाजिक क्षेत्र और ग्रामीण भारत के विकास के लिए किया है। इससे बेहतर क्या हो सकता है कि आज गांव सड़कों से जुड़े हैं, हर घर बिजली पहुंच रही है, ग्रामीण स्वच्छता दायरा 92 फीसदी पहुंच चुका है, आवास योजना सफल हो रही है, 8 करोड़ गरीब घरों तक गैस कनेक्शन पहुंचा है। दस करोड़ परिवारों को आयुष्मान भारत का लाभ मिल रहा है। सब्सिडी वाले भोजन पर 1,62,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, किसानों के लिए एमएसपी में 50 फीसदी की वृद्धि और सफल फसल बीमा योजना। यह अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण है जिससे 13 करोड़ उद्यमियों को मुद्रा लोन मिला है। सातवां वेतन आयोग चंद हफ्तो के भीतर लागू किया गया था और वन रैंक वन पेंशन का वादा पूरा किया गया। 

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