कांग्रेस के नए-पुराने नेताओं में घमासान, क्या राहुल के चहेतों को निपटाने का चल रहा 'डर्टी गेम'
- नए-पुराने नेताओं के बीच घमासान खुलकर सामने आया, पार्टी नेतृत्व की बढ़ी मुश्किल
- हरियाणा की राजनीति में अशोक तंवर और हुड्डा परिवार के बीच बढ़ सकता है विवाद
- अशोक तंवर ने प्रभारी महासचिव गुलाम नबी पर लगाया 'डर्टी गेम' खेलने का आरोप
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क्या कांग्रेस में पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबियों को जानबूझकर निशाना बनाकर दरकिनार किया जा रहा है। एक साथ कई नेताओं की ओर से उठ रहे इस जटिल सवाल ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ाई हैं और नए-पुराने नेताओं के बीच घमासान खुलकर आ गया है। हरियाणा की राजनीति में अशोक तंवर और हुड्डा परिवार के बीच पुरानी अदावत हो सकती है लेकिन संजय निरूपम की तरह उनका ये कहना कि राहुल गांधी के बढ़ाए और बनाए नेताओं की लगातार राजनीतिक हत्या हो रही है और कुछ अन्य की होनी है, बाकी बड़े सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस में हाल के दिनों में या कहें राहुल गांधी के पद छोड़ने के बाद जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी है या फिर पार्टी लाइन के खिलाफ मुखर होकर बयान दिए हैं वे सभी राहुल गांधी के करीबी रहे। तंवर का ये कहना कि मैं अकेला नहीं अभी बहुत लंबी लाइन है। अभी बहुत सी राजनीतिक हत्याएं होनी हैं पार्टी में किसी बड़े षडयंत्र की ओर इशारा करता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, जतिन प्रसाद ने अभी कड़ा कदम तो नहीं उठाया लेकिन राहुल के हटने के बाद लगातार उनकी नाराजगी सामने आ रही है।
तंवर ने प्रभारी महासचिव गुलाम नबी पर लगाया 'डर्टी गेम' खेलने का आरोप
तंवर अगर हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर भारी विरोध के बावजूद कार्यकाल पूरा करने के बाद भी डटे रहे तो उसके पीछे राहुल गांधी थे। तंवर की एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस, सांसद और प्रदेश अध्यक्ष तक की ग्रूमिंग राहुल ने की। इसीलिए वे इतनी नाराजगी के बाद राहुल गांधी से खुद के व्यक्तिगत संबंध बता उनसे हुई बातचीत को बताने से इंकार करते हैं। साफ है तंवर ने इतना बड़ा फैसला लेने से पहले राहुल गांधी से बात जरूर की होगी।
तंवर ने प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद पर गंभीर आरोप लगाया है कि वह डर्टी गेम खेल रहे हैं। हरियाणा में खुद की जिम्मेदारियां अपने दोस्तों के हाथ बेच चुके हैं। आजाद पर यूपी चुनाव के दौरान भी कांग्रेस नेता केके शर्मा ने टिकट बेचने का आरोप लगाया था। आजाद सोनिया गांधी के करीबियों में हैं। ऐसे में अगर उन पर आरोप लग रहे हैं तो साफ है कि पार्टी में कहीं न कहीं राहुल समर्थक वरिष्ठ नेताओं की कार्यप्रणाली को लेकर असहज हैं।
शिवसेना से आने वाले संजय निरूपम कांग्रेस में इसीलिए बढ़ पाए क्योंकि उनकी पहुंच राहुल गांधी तक थी। राहुल गांधी के कहने पर ही निरूपम को मुंबई का अध्यक्ष बनाया गया। सोनिया के पद संभालने के ठीक पहले झारखंड में अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व आईपीएस अजोय कुमार को लंबे समय दिल्ली में रखने के बाद राहुल ने प्रदेश सौंपा था। राहुल का प्रयोग सफल होता इससे पहले राज्य के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनका इस कदर घमासान हुआ कि उन्होंने खुद को अलग कर लिया।
इसी फरवरी में त्रिपुरा कांग्रेस अध्यक्ष बने प्रद्योत ने 17 सितंबर को इस्तीफा दिया
त्रिपुरा में लगभग समाप्त हो गई कांग्रेस को जिंदा करने के लिए राहुल गांधी ने प्रयोग के तौर पर युवा नेता प्रद्योत को अध्यक्ष बनाया। प्रद्योत ने अपने हिसाब से काम शुरू किया पार्टी फंड जुटाने की प्रकिया और वरिष्ठ नेताओं की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। नार्थ ईस्ट के कांग्रेस प्रभारी महासचिव लुईजिन्हो फैलिरो से उनकी कुछ कहासुनी है।
प्रद्योत ने 17 सितंबर को इस्तीफा भेज दिया। राहुल गांधी ने इसी फरवरी में उन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी। प्रद्योत ने सोनिया गांधी की पहली बैठक में तालियां बंटोरी और वरिष्ठ नेताओं के बीच कहा मैं पार्टी में अपना पैसा लगाता हूं औरों ने भी कमाया है सबको ऐसा करना चाहिए। ऐसे में आने वाले समय में पद छोड़ने वाले नेताओं में कुछ और भी पार्टी छोड़ सकते हैं।