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Kerala: 'राजनीतिक हैसियत मापने के लिए भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें', बृंदा करात की आरिफ मोहम्मद को चुनौती

Tue, 02 Jan 2024 03:46 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम (केरल)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम (केरल) Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 02 Jan 2024 03:46 PM IST
सार

Kerala: माकपा नेता बृंदा करात ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को सीधे चुनावी राजनीति में आने की चुनाती दी। उन्होंने कहा वह भाजपा का टिकट लें और केरल में किसी भी सीट पर चुनाव लड़ें। दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।

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'Fight 2024 polls from BJP': CPIM Leader Brinda Karat's challenge to Governor Arif Mohammad Khan
बृंदा करात - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कुछ महीने का ही समय बचा है। ऐसे में सियासी नेताओं के एक-दूसरे पर हमले तेज हो गए हैं। इस बीच, माकपा नेता बृंदा करात ने मंगलवार को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उन्हें 2024 का आम चुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से लड़ना चाहिए। करात ने कहा कि उन्हें अपनी पार्टी की लाइन को आगे बढ़ाते हुए चुनाव के जरिए सीधे राजनीति में प्रवेश करना चाहिए। 

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'राजनीतिक हैसियत मापने के लिए लड़ें चुनाव'
उन्होंने आगे कहा, अगर राज्यपाल सीधे राजनीति में आना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करना चाहिए क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। इसलिए यह उनकी राजनीतिक समझ का हिस्सा होगा। करात ने कहा कि अगर वह अपनी राजनीतिक हैसियत को मापना चाहते हैं तो उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए। 

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'दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा'
उन्होंने कहा, 'केरल के राज्यपाल के लिए सीधे चुनावी राजनीति में आना ज्यादा उचित होगा। भाजपा का टिकट लें और केरल में किसी भी सीट पर चुनाव लड़ें।' उन्होंने कहा, 'दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।' माकपा की पोलित ब्यूरो की सदस्य करात ने कहा कि राज्यपाल को रोजाना सार्वजनिक बयान देकर अपने पद को नीचे गिराने के बजाय मुख्यमंत्री के साथ अपने मतभेदों को दूर करना चाहिए।

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विजयन सरकार के साथ राज्यपाल के ठंडे रिश्ते
केरल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी न देने सहित कई मुद्दों पर राज्यपाल खान के राज्य की पिनरई विजयन सरकार के साथ ठंडे संबंध रहे हैं। शनिवार को उन्होंने दावा किया कि चूंकि वे धन विधेयक हैं, इसलिए उन्हें राज्यपाल की सहमति के बिना विधानसभा द्वारा पारित नहीं किया जा सकता है।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने क्या कहा
समाचार एजेंसी एएनआई ने आरिफ मोहम्मद खान के हवाले से कहा, विश्वविद्यालय विधेयक धन विधेयक हैं। राज्यपाल की पूर्व सहमति के बिना धन विधेयकों को विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता है। वे धन विधेयक थे क्योंकि यदि आप राज्यपाल को हटाते हैं और व्यक्तिगत तौर पर कुलाधिपति नियुक्त करते हैं, तो कुछ खर्च होगा और फिर आपको राज्यपाल की सहमति की जरूरत होगी, लेकिन उस संवैधानिक प्रावधान को कम करने के लिए उन्होंने जो किया वह यह है कि उन्होंने विश्वविद्यालयों पर जिम्मेदारी डाल दी।

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