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दुनिया में बढ़ रहा है कामकाजी महिलाओं का स्तर लेकिन भारत में पिछड़ रही है आधी आबादी
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
Updated Mon, 18 Sep 2017 11:17 AM IST
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भले ही देश की आबादी सवा सौ करोड़ हो और इसमें महिलाओं का दबदबा आधा कहा जाता हो (लगभग 49 फीसदी) फिर भी भारत में महिलाओं की स्वास्थ्य से लेकर सुरक्षा तक में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विश्वबैंक की एक रिपोर्ट पर नजर डालें तो भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या भी लगातार कम हो रही है।
पढ़ें: भूखा भारत: नहीं मिल पा रहा है भरपेट खाना
महिलाओं के कामकाज को लेकर हम दकियानूसी होते जा रहे हैं। 2004-05 में देश में लगभग 43 फीसदी महिलाएं कामकाजी थीं कुछ ऐसा ही आंकड़ा 1993-94 में भी था। लेकिन आज जब 2016-17 में जब देश नए कीर्तिमान रच रहा है कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा 27 फीसदी से कम होता जा रहा है। हमारे देश से अच्छी कामकाजी महिलाओं की स्थिति नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों की हैं।
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महिलाओं के कामकाज को लेकर हम दकियानूसी होते जा रहे हैं। 2004-05 में देश में लगभग 43 फीसदी महिलाएं कामकाजी थीं कुछ ऐसा ही आंकड़ा 1993-94 में भी था। लेकिन आज जब 2016-17 में जब देश नए कीर्तिमान रच रहा है कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा 27 फीसदी से कम होता जा रहा है। हमारे देश से अच्छी कामकाजी महिलाओं की स्थिति नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों की हैं।
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कामकाजी महिलाएं
भारत में महज 27 फीसदी महिलाएं ही कामकाजी हैं या फिर वो किसी न किसी रूप में कामकाज से जुड़ी हुई हैं। जबकि नेपाल सहित हमारे पड़ोसी देशों में कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा 79.9, बांग्लादेश का 57.4 और श्रीलंका 35.1 फीसदी है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 2011-12 के बीच विभिन्न कारणों से 1.97 करोड़ महिलाओं ने नौकरी छोड़ दी। लेकिन यह बात अलग है कि वो चंद महिलाएं जो विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं वो रोल मॉडल बन रही है।
ग्लोबल जेंडर 2015-16 की रिपोर्ट के मुताबिक 144 देशों में किए गए सर्वे में भारत 136 वें नंबर पर है। गांव में कामकाजी महिलाओं की स्थिति दिनबदिन खराब होती जा रही है। कृषि की रीढ़ कही जाने वाली महिलाओं को किसानी नकार रही है।
एनएसएसओ के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1993 से 2011 के बीच कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा तेजी से गिरा है। पिछले बीस सालों गांवों में करीब 13 फीसदी महिलाओं को काम कम मिला है जबकि स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या में 5 फीसदी का इजाफा हुआ है। शहरी महिलाओं में 3 फीसदी का आंकड़ा गिरा है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 2011-12 के बीच विभिन्न कारणों से 1.97 करोड़ महिलाओं ने नौकरी छोड़ दी। लेकिन यह बात अलग है कि वो चंद महिलाएं जो विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं वो रोल मॉडल बन रही है।
ग्लोबल जेंडर 2015-16 की रिपोर्ट के मुताबिक 144 देशों में किए गए सर्वे में भारत 136 वें नंबर पर है। गांव में कामकाजी महिलाओं की स्थिति दिनबदिन खराब होती जा रही है। कृषि की रीढ़ कही जाने वाली महिलाओं को किसानी नकार रही है।
एनएसएसओ के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1993 से 2011 के बीच कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा तेजी से गिरा है। पिछले बीस सालों गांवों में करीब 13 फीसदी महिलाओं को काम कम मिला है जबकि स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या में 5 फीसदी का इजाफा हुआ है। शहरी महिलाओं में 3 फीसदी का आंकड़ा गिरा है।