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Personal Law: AIDWA का सुशील मोदी को पत्र, समान कानून की शुरुआत को लेकर जताई आशंका
Fri, 04 Nov 2022 07:18 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 04 Nov 2022 07:18 PM IST
सार
संगठन ने समिति से समान नागरिक संहिता पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है ताकि यह आश्वासन दिया जा सके कि वर्तमान कवायद इसे लाने की दिशा में एक कदम नहीं है।
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सुशील कुमार मोदी
- फोटो : Social Media
विस्तार
वामपंथी झुकाव वाले महिला संगठन एआईडीडब्ल्यूए (AIDWA) ने एक संसदीय समिति के अध्यक्ष सुशील मोदी को पत्र लिखा है, जो व्यक्तिगत कानूनों की जांच कर रही है। संगठन ने चिंता जताई कि यह समान कानूनों की शुरुआत करने का एक बहाना हो सकता है। राज्यसभा सांसद सुशील मोदी कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं। सुशील मोदी ने 11 अक्टूबर को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पैनल ने विस्तृत जांच के लिए व्यक्तिगत कानूनों की समीक्षा की पहचान की है और विषय पर व्यापक परामर्श किया है। इसने संबंधित हितधारकों के विचारों और सुझावों वाले ज्ञापन आमंत्रित किए।
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एआईडीडब्ल्यूए ने अपने पत्र में कहा है कि व्यक्तिगत कानूनों पर प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए दिया गया तीन सप्ताह का समय इतने गंभीर विषय के लिए पर्याप्त नहीं है। यह (प्रेस विज्ञप्ति) एक धारणा देता है कि ज्ञापन मांगने की पूरी कवायद इस मुद्दे पर काम करने वाले विभिन्न संगठनों और लोगों की राय लेने का एक गंभीर प्रयास नहीं है, बल्कि सिर्फ एक औपचारिकता है। यदि विचार प्राप्त करने में गंभीरता है समिति इसके लिए कहीं अधिक समय आवंटित करती।
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इसने कहा, हमें डर है कि व्यक्तिगत कानून की समीक्षा के बहाने एक समान कानून लाने का प्रयास किया जा सकता है जो बहुसंख्यक कानून होंगे, न कि महिलाओं को वास्तविक समान अधिकार देने वाला कानून। पत्र में कहा गया है कि कानून की एकरूपता से महिलाओं के लिए वास्तविक समान अधिकार नहीं होंगे, और वास्तव में सभी समुदायों पर हिंदू कानूनों और उसके लिंग पूर्वाग्रहों की नकल करने का परिणाम होगा। संगठन ने समिति से समान नागरिक संहिता पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है ताकि यह आश्वासन दिया जा सके कि वर्तमान कवायद इसे लाने की दिशा में एक कदम नहीं है।
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