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Supreme Court: बेटा लेकर भागे पिता को अमेरिका से लाकर जेल भेजने का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई छह माह की सजा

Sun, 04 Jun 2023 06:05 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 04 Jun 2023 06:05 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि अवमानना के दोषी को किसी तरह का कोई पछतावा नहीं है, उल्टे उसकी उदंडता बताती हैं कि उसके मन में शीर्ष कोर्ट के आदेशों के लिए कोई सम्मान ही नहीं है। 

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Father who fled to America with son sentenced to six months by Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 2004 से अमेरिका में रह रहे एक व्यक्ति को अवमानना मामले में दोषी करार दिए जाने के बावजूद अपनी उदंडता से बाज न आने पर छह माह की सजा सुनाई है। साथ ही, केंद्र और सीबीआई को आदेश दिया है कि उसे जेल भेजने के लिए भारत लाने के हरसंभव प्रयास किए जाएं। दरअसल, इस व्यक्ति पर आरोप है कि अदालती आदेश के बावजूद वह अपने बेटे को उसकी मां के पास नहीं भेज रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने गत जनवरी में अदालती आदेश के बावजूद अपने बेटे को भारत वापस न लाने पर उक्त व्यक्ति को अवमानना का दोषी करार दिया था। फिर भी, अब तक बेटे को वापस न भेजने को लेकर शीर्ष अदालत ने उसे छह माह के अंदर 25 लाख जुर्माना भरने को कहा है। जस्टिस एस.के. कौल और जस्टिस ए.एस. ओका की बेंच ने कहा कि अवमानना के दोषी को किसी तरह का कोई पछतावा नहीं है, उल्टे उसकी उदंडता बताती हैं कि उसके मन में शीर्ष कोर्ट के आदेशों के लिए कोई सम्मान ही नहीं है। 
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...तो दो माह की और सजा होगी
बेंच ने अपने हालिया फैसले में अदालती फैसलों की अवमानना के लिए उसे छह माह के लिए जेल भेजने की सजा सुनाई। साथ ही कहा कि जुर्माने की राशि न भरने पर उसे दो माह की सजा और काटनी होगी। 2007 में उससे शादी करने वाली महिला की तरफ से दायर अवमानना याचिका के मामले में उसे दोषी करार दिया गया है। महिला ने मई 2022 में पारित फैसले की शर्तों के उल्लंघन को लेकर यह याचिका दायर की थी।
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क्या है पूरा मामला...
दरअसल, उक्त व्यक्ति और महिला के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था। इसी संदर्भ में मई 2022 के फैसले में कोर्ट ने 12 वर्षीय बच्चे की कस्टडी उसकी मां को सौंपी थी और कहा था कि उस समय कक्षा छह में पढ़ रहा बच्चा 10वीं तक अपनी पढ़ाई अजमेर में रहकर ही करेगा। इसके बाद उसे अमेरिका में पिता के पास भेजा जा सकता है।


बच्चे को लेकर गया, फिर नहीं भेजा...
कोर्ट ने यह भी कहा था कि दसवीं की पढ़ाई पूरी करने तक हर साल 1 से 30 जून के बीच अपने पिता के साथ रहने के लिए कनाडा और अमेरिका जा सकता है। शीर्ष अदालत ने जनवरी के अपने फैसले में कहा कि उक्त व्यक्ति पिछले साल 7 जून को अजमेर आया था और बेटे को साथ ले गया था। लेकिन उसके बाद उसे वापस नहीं भेजा। इसी को लेकर मां की तरफ से याचिका दायर की गई थी।

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